Japan Second Capital vs India Debate: जापान ने संभावित बड़े भूकंप जैसी आपदाओं के दौरान सरकारी कामकाज को बिना रुकावट जारी रखने के लिए बैकअप राजधानी (Backup Capital) बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके बाद भारत में भी यह सवाल एक बार फिर चर्चा में है कि क्या देश को नई दिल्ली के अलावा दूसरी राजधानी की जरूरत है? यह बहस नई नहीं है। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर से लेकर कई राजनीतिक नेताओं तक समय-समय पर इस विचार का समर्थन करते रहे हैं। हालांकि भारत और जापान की जरूरतें और परिस्थितियां एक-दूसरे से काफी अलग हैं।
जापान क्यों बना रहा है दूसरी (बैकअप) राजधानी?
जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। हाल ही में 7.1 तीव्रता के भूकंप के बाद वहां यह चिंता और गहरी हो गई कि यदि भविष्य में कोई विनाशकारी आपदा टोक्यो को प्रभावित करती है तो देश का प्रशासन कैसे चलेगा।
इसी सोच के तहत जापान की संसद (नेशनल डाइट) ने एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित किया है। इसे सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) और उसके सहयोगी दल निप्पोन इशिन नो काई (Japan Innovation Party) ने पेश किया। प्रस्ताव का उद्देश्य टोक्यो की जगह नई स्थायी राजधानी बनाना नहीं, बल्कि एक आपातकालीन प्रशासनिक केंद्र (Emergency Administrative Hub) विकसित करना है, ताकि किसी भी बड़ी प्राकृतिक आपदा के समय सरकार बिना बाधा अपना काम जारी रख सके।
भारत में दूसरी राजधानी की बहस क्यों उठती रही है?
भारत में दूसरी राजधानी की मांग का आधार जापान से अलग रहा है। यहां यह बहस मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर केंद्रित रही है—
- उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्रशासनिक संतुलन
- पूरे देश के लिए बेहतर प्रशासनिक पहुंच
- राष्ट्रीय सुरक्षा और शासन का विकेंद्रीकरण
देश का लगभग पूरा केंद्रीय प्रशासन नई दिल्ली में केंद्रित है। ऐसे में कई विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में कुछ महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों का विकेंद्रीकरण प्रशासन को अधिक प्रभावी बना सकता है।
डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने क्यों दिया था दूसरी राजधानी का सुझाव?
भारत में दूसरी राजधानी का सबसे मजबूत और शुरुआती प्रस्ताव संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने दिया था।
उन्होंने अपनी 1955 में प्रकाशित पुस्तक “Thoughts on Linguistic States” में नई दिल्ली को अकेली राजधानी बनाए रखने पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने तीन प्रमुख कारण बताए थे—
1. दक्षिण भारत से दूरी
दिल्ली दक्षिण भारत के लोगों और अधिकारियों के लिए काफी दूर है। इससे प्रशासनिक कामकाज और यात्रा दोनों कठिन हो जाते हैं।
2. मौसम की चुनौती
दिल्ली की अत्यधिक गर्मी और कड़ाके की ठंड प्रशासनिक दृष्टि से आदर्श परिस्थितियां नहीं मानी गईं।
3. सुरक्षा का मुद्दा
अंबेडकर का मानना था कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के अपेक्षाकृत करीब होने के कारण युद्ध या संकट की स्थिति में दिल्ली अधिक संवेदनशील हो सकती है।
अंबेडकर ने हैदराबाद को क्यों चुना था?
डॉ. अंबेडकर ने हैदराबाद को दूसरी राजधानी के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प बताया था।
इसके पीछे उनके तर्क थे—
- भारत के लगभग मध्य में स्थित शहर
- उत्तर और दक्षिण भारत के बीच बेहतर संतुलन
- बहुसांस्कृतिक और कॉस्मोपॉलिटन पहचान
- बेहतर प्रशासनिक पहुंच
उनका मानना था कि इससे राष्ट्रीय एकता और प्रशासनिक संतुलन दोनों मजबूत होंगे।
2018 में बेंगलुरु को दूसरी राजधानी बनाने की मांग
साल 2018 में यह मुद्दा फिर चर्चा में आया जब कर्नाटक के तत्कालीन आवास मंत्री एम. कृष्णप्पा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बेंगलुरु को भारत की दूसरी राजधानी घोषित करने की मांग की।
प्रस्ताव में कहा गया था कि—
- बेंगलुरु देश का टेक्नोलॉजी हब है।
- यहां का मौसम अनुकूल है।
- मजबूत आर्थिक आधार मौजूद है।
- दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व बेहतर होगा।
हालांकि इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
दुनिया के कई देशों में एक से ज्यादा राजधानियां
भारत अगर भविष्य में प्रशासनिक संस्थानों का विकेंद्रीकरण करता है तो यह कोई नई अवधारणा नहीं होगी। कई देशों में पहले से अलग-अलग शहरों में सरकारी संस्थान संचालित होते हैं।
| देश | व्यवस्था |
|---|---|
| दक्षिण अफ्रीका | प्रिटोरिया (कार्यपालिका), केप टाउन (संसद), ब्लोएमफोनटेन (न्यायपालिका) |
| मलेशिया | प्रशासन पुत्राजया, संसद कुआलालंपुर |
| श्रीलंका | संसद श्री जयवर्धनेपुरा कोट्टे, वाणिज्यिक केंद्र कोलंबो |
| नीदरलैंड | संवैधानिक राजधानी एम्स्टर्डम, सरकार और संसद द हेग |
| बोलीविया | ला पाज (प्रशासनिक), सुक्रे (संवैधानिक एवं न्यायपालिका) |
इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक शक्तियों का विभाजन कई देशों में सफल मॉडल के रूप में काम कर रहा है।
जापान और भारत की जरूरतों में सबसे बड़ा अंतर
दोनों देशों में दूसरी राजधानी की चर्चा जरूर हो रही है, लेकिन उद्देश्य बिल्कुल अलग हैं।
जापान का उद्देश्य
- प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सरकार का संचालन जारी रखना
- बैकअप प्रशासनिक केंद्र तैयार करना
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाना
भारत की बहस
- क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व
- प्रशासनिक विकेंद्रीकरण
- दक्षिण भारत की बेहतर भागीदारी
- राष्ट्रीय सुरक्षा और सुगम शासन
यानी जापान “Backup Capital” चाहता है, जबकि भारत में चर्चा “Second Capital” की रही है।
क्या भारत को वास्तव में दूसरी राजधानी की जरूरत है?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल नई राजधानी बनाना आसान या व्यावहारिक विकल्प नहीं है। नई दिल्ली में सेंट्रल विस्टा समेत हजारों करोड़ रुपये का बुनियादी ढांचा विकसित किया जा चुका है।
इसके बजाय कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए जाते हैं—
- संसद का एक सत्र हर साल दक्षिण भारत के किसी शहर में आयोजित किया जाए।
- सुप्रीम कोर्ट की स्थायी क्षेत्रीय पीठें चेन्नई, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में स्थापित की जाएं।
- केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी एजेंसियों का चरणबद्ध विकेंद्रीकरण किया जाए।
- डिजिटल गवर्नेंस और आपदा प्रबंधन के लिए बैकअप प्रशासनिक केंद्र विकसित किए जाएं।
निष्कर्ष
जापान का बैकअप राजधानी मॉडल प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की रणनीति का हिस्सा है, जबकि भारत में दूसरी राजधानी की बहस प्रशासनिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी रही है। फिलहाल भारत की एकमात्र राजधानी नई दिल्ली ही है, लेकिन बदलते समय, तकनीक और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए भविष्य में सरकारी संस्थानों के विकेंद्रीकरण और वैकल्पिक प्रशासनिक केंद्रों पर चर्चा जारी रह सकती है।


