भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सप्ताह में शानदार वापसी करते हुए करीब 3 फीसदी की तेजी दर्ज की। वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू बाजार ने शुरुआती कमजोरी से उबरते हुए मजबूती दिखाई। अब 3 अगस्त से शुरू होने वाले नए कारोबारी सप्ताह में निवेशकों की नजर कई बड़े घटनाक्रमों पर रहेगी, जो बाजार की आगे की दिशा तय कर सकते हैं।
सबसे बड़ा फोकस भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर रहेगा। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी, अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक टेक सेक्टर और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार के लिए अहम ट्रिगर साबित हो सकते हैं।
पिछले सप्ताह शुक्रवार को सेंसेक्स 166.5 अंक की बढ़त के साथ 78,095 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 66 अंक से ज्यादा चढ़कर 24,384 पर पहुंच गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की खरीदारी देखने को मिली।
RBI की MPC बैठक पर बाजार की सबसे ज्यादा नजर
इस सप्ताह बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटना भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक होगी। आरबीआई 5 अगस्त को ब्याज दरों को लेकर अपना फैसला घोषित कर सकता है।
ब्रोकरेज फर्म नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई द्वारा रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखने की उम्मीद है। हालांकि निवेशकों की नजर सिर्फ ब्याज दरों पर नहीं होगी, बल्कि केंद्रीय बैंक महंगाई, आर्थिक विकास, तरलता और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर क्या संकेत देता है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।
अगर आरबीआई अपने रुख में नरमी दिखाता है तो बैंकिंग, रियल एस्टेट और ब्याज दरों से जुड़े सेक्टरों को फायदा मिल सकता है। वहीं, महंगाई को लेकर चिंता जताने पर बाजार में सतर्कता बढ़ सकती है।
अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर
मध्य पूर्व में जारी तनाव भी इस सप्ताह शेयर बाजार के लिए बड़ा फैक्टर रहेगा। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने के संकेत दिए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद बनी है।
दूसरी तरफ, स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के आसपास जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। इस क्षेत्र में किसी भी नए घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय बाजार के लिए चिंता का कारण बन सकती है। महंगे क्रूड से देश में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, जिसका असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर पड़ सकता है।
FII की खरीदारी से मिलेगी बाजार को दिशा
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी बाजार के लिए अहम रहेंगी। लगातार पांच कारोबारी सत्रों तक बिकवाली करने के बाद विदेशी निवेशक पिछले तीन कारोबारी दिनों में शुद्ध खरीदार बने हैं।
FII की वापसी से बाजार में सकारात्मक माहौल बना है। विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी अब मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बढ़ती दिख रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, रुपये की स्थिरता और भारतीय कंपनियों के वैल्यूएशन में संतुलन भी विदेशी निवेश को आकर्षित कर रहा है। अगर FII की खरीदारी आगे भी जारी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है।
ग्लोबल टेक सेक्टर और आईटी शेयरों पर नजर
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में टेक्नोलॉजी शेयरों का प्रदर्शन भी भारतीय बाजार को प्रभावित कर सकता है। माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसे दिग्गजों के मजबूत तिमाही नतीजों के बाद वैश्विक टेक सेक्टर में भरोसा बढ़ा है।
दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में चिप सेक्टर में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक भारत जैसे स्थिर बाजारों की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
इसका असर भारतीय आईटी कंपनियों और बड़े टेक शेयरों पर देखने को मिल सकता है। अगर वैश्विक टेक शेयरों में तेजी जारी रहती है तो घरेलू आईटी इंडेक्स को भी समर्थन मिल सकता है।
कॉरपोरेट नतीजों से बढ़ेगी स्टॉक आधारित हलचल
अप्रैल-जून तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे भी इस सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। करीब 573 कंपनियां अपने तिमाही वित्तीय परिणाम जारी करेंगी।
इनमें State Bank of India, Trent Limited, Nykaa, Bharti Airtel और Titan Company जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
इन कंपनियों के नतीजे, बिक्री में वृद्धि, मार्जिन और भविष्य की रणनीति से जुड़े संकेत संबंधित सेक्टरों के साथ-साथ पूरे बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
बाजार के लिए आगे क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्ताह बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। आरबीआई की नीति, वैश्विक घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की चाल तय करेंगी।
अगर FII की खरीदारी जारी रहती है, कच्चे तेल में बड़ी तेजी नहीं आती और आरबीआई का रुख बाजार के अनुकूल रहता है तो सेंसेक्स और निफ्टी में आगे भी तेजी की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि निवेशकों को वैश्विक जोखिमों और कंपनियों के नतीजों पर नजर रखते हुए सतर्क रणनीति अपनानी होगी।


