DK Shivakumar-Adani Meeting: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उद्योगपति गौतम अदाणी की मुलाकात के बाद राज्य की सियासत में घमासान शुरू हो गया है। बीजेपी ने इस मुलाकात को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए दोहरे मापदंड का आरोप लगाया है। वहीं, कर्नाटक सरकार ने मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया है और कहा है कि सरकारी टेंडर प्रक्रिया में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं हुआ।
कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी की मुलाकात अब राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन गई है। दोनों की मुलाकात रविवार, 24 अगस्त को बेंगलुरु में हुई। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इसे महज एक शिष्टाचार भेंट बताया गया है, लेकिन बीजेपी ने इस मुलाकात को लेकर कांग्रेस पर सवाल खड़े किए हैं।
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि अदाणी ग्रुप की एक कंपनी बेंगलुरु की प्रस्तावित हेब्बाल-सिल्क बोर्ड टनल रोड परियोजना के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी यानी L1 के तौर पर सामने आई है। हालांकि, टेंडर प्रक्रिया अभी आधिकारिक रूप से पूरी नहीं हुई है।
करीब एक घंटे चली डीके शिवकुमार और गौतम अदाणी की मुलाकात
सूत्रों के मुताबिक, गौतम अदाणी ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ गए थे। एयरपोर्ट वापस लौटने के दौरान वह सदाशिवनगर स्थित मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के आवास पहुंचे। यहां दोनों के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया। खुद डीके शिवकुमार ने भी कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहली बार था जब गौतम अदाणी उनसे मिलने आए। उन्होंने बताया कि अदाणी कर्नाटक में कई कारोबारी गतिविधियों से जुड़े हैं और इसी सिलसिले में शिष्टाचार के तौर पर उनसे मिलने आए थे।
हालांकि, इस मुलाकात में प्रस्तावित टनल रोड परियोजना को लेकर कोई चर्चा हुई या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
टनल रोड प्रोजेक्ट ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
डीके शिवकुमार और गौतम अदाणी की मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब बेंगलुरु की हेब्बाल से सिल्क बोर्ड तक प्रस्तावित 16.75 किलोमीटर लंबी टनल रोड परियोजना पहले से ही राजनीतिक बहस का विषय बनी हुई है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अदाणी एंटरप्राइजेज इस परियोजना के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के तौर पर सामने आई है। कंपनी की बोली करीब 22,267 करोड़ रुपये बताई गई है। यह राशि सरकार की शुरुआती अनुमानित परियोजना लागत करीब 17,698 करोड़ रुपये से अधिक है।
अभी टेंडर को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में विपक्ष इस बात पर सवाल उठा रहा है कि जिस कंपनी का नाम इतने बड़े प्रोजेक्ट की बोली प्रक्रिया में सामने आया है, उसके चेयरमैन की मुख्यमंत्री से मुलाकात को केवल शिष्टाचार भेंट कैसे माना जाए।
BJP ने कांग्रेस पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री और गौतम अदाणी की मुलाकात के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली में कांग्रेस अदाणी का विरोध करती है, जबकि कर्नाटक में उसकी सरकार अदाणी के साथ बैठक कर रही है।
उन्होंने इसे कांग्रेस का ‘दोहरा मापदंड’ बताया। अशोक ने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी ने डीके शिवकुमार को गौतम अदाणी से मिलने की अनुमति दी थी।
बीजेपी नेता ने आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार अदाणी के लिए लाल कालीन बिछा रही है। उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर कांग्रेस अदाणी को कारोबारी मानती है, तो उसे अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट करना चाहिए।
सुरंग सड़क परियोजना का भी बीजेपी कर रही विरोध
बेंगलुरु की प्रस्तावित टनल रोड परियोजना को लेकर बीजेपी पहले से ही विरोध कर रही है। पार्टी का कहना है कि इस परियोजना से पर्यावरण और शहर के पेड़ों पर असर पड़ सकता है।
बीजेपी के युवा सांसद तेजस्वी सूर्या भी इस मामले को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख कर चुके हैं। ऐसे में अदाणी ग्रुप की कंपनी के टेंडर में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के तौर पर सामने आने और उसके बाद गौतम अदाणी की मुख्यमंत्री से मुलाकात ने राजनीतिक विवाद को और हवा दे दी है।
प्रियांक खड़गे ने किया मुख्यमंत्री का बचाव
विवाद के बीच कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए गौतम अदाणी एक कारोबारी होने के साथ-साथ संबंधित परियोजनाओं में एक कॉन्ट्रैक्टर हैं और टेंडर प्रक्रिया नियमों के मुताबिक चल रही है।
प्रियांक खड़गे ने कहा कि अदाणी ग्रुप की कुछ कंपनियां महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनियों में शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित नहीं किया है।
उनका कहना था कि अगर कोई कंपनी नियमों के मुताबिक सबसे कम बोली लगाती है, तो केवल राजनीतिक मतभेदों के आधार पर उसे टेंडर प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता।
‘कानूनी तरीके से टेंडर मिला तो कोई दिक्कत नहीं’
प्रियांक खड़गे ने कांग्रेस के अदाणी को लेकर राजनीतिक रुख और सरकारी कामकाज के बीच अंतर करने की बात कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का अदाणी ग्रुप को लेकर राजनीतिक रुख अपनी जगह है, लेकिन सरकारी टेंडर पारदर्शी प्रक्रिया के तहत तय होते हैं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर अदाणी ग्रुप की कंपनी नियमों के मुताबिक L1 बनती है और उसे कानूनी तरीके से टेंडर मिलता है, तो विपक्ष को इसमें आपत्ति क्यों होनी चाहिए।
पवन खेड़ा बोले- उद्योगपति के खिलाफ नहीं, एकाधिकार के खिलाफ कांग्रेस
कांग्रेस सांसद और प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी डीके शिवकुमार और गौतम अदाणी की मुलाकात पर पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी उद्योगपति के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह एकाधिकार के खिलाफ है।
पवन खेड़ा के मुताबिक, किसी कारोबारी से मुलाकात को केवल इस आधार पर राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए कि वह व्यक्ति अदाणी समूह से जुड़ा है। कांग्रेस का मुख्य विरोध किसी एक उद्योगपति के हाथों में अत्यधिक आर्थिक शक्ति और एकाधिकार को लेकर है।
मुलाकात से लेकर टेंडर तक, क्यों बढ़ा विवाद?
पूरे विवाद को तीन अहम बिंदुओं से समझा जा सकता है। पहला, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की गौतम अदाणी से मुलाकात हुई। दूसरा, इसी दौरान अदाणी एंटरप्राइजेज का नाम बेंगलुरु की बड़ी टनल रोड परियोजना में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के तौर पर सामने आया। तीसरा, बीजेपी कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के अदाणी विरोध और कर्नाटक सरकार के रुख में अंतर को मुद्दा बना रही है।
फिलहाल सरकार का कहना है कि मुलाकात शिष्टाचार भेंट थी और टेंडर प्रक्रिया में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया गया। दूसरी ओर, बीजेपी इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस के कथित दोहरे मापदंड से जोड़कर देख रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदाणी-शिवकुमार मुलाकात और बेंगलुरु टनल रोड प्रोजेक्ट कर्नाटक की राजनीति में बड़ा मुद्दा बने रहने की संभावना है।


