देशभर में पेट्रोलियम कंपनियों ने 17 मई 2026 के लिए डीजल की नई कीमतें जारी कर दी हैं। आज मुंबई में डीजल का भाव ₹93.14 प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है। पिछले 10 दिनों के दौरान डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां न्यूनतम रेट ₹90.03 और अधिकतम ₹93.14 प्रति लीटर तक पहुंचा। हालांकि, आज अधिकांश बड़े शहरों में कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की कमजोरी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर भारत के ईंधन बाजार पर लगातार बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ती है तो डीजल और पेट्रोल दोनों की कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है।
भारत में डीजल की कीमतें सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव से तय नहीं होतीं, बल्कि इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स, डीलर कमीशन और परिवहन लागत भी शामिल होती है। यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों में डीजल की कीमतें अलग दिखाई देती हैं।
प्रमुख शहरों में आज का डीजल रेट
| शहर | डीजल कीमत (प्रति लीटर) | बदलाव |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | ₹90.67 | कोई बदलाव नहीं |
| मुंबई | ₹93.14 | कोई बदलाव नहीं |
| कोलकाता | ₹95.13 | कोई बदलाव नहीं |
| चेन्नई | ₹95.35 | +₹0.10 |
| गुरुग्राम | ₹90.83 | -₹0.06 |
| नोएडा | ₹91.31 | +₹0.11 |
| बेंगलुरु | ₹94.10 | कोई बदलाव नहीं |
| भुवनेश्वर | ₹96.11 | +₹0.40 |
| चंडीगढ़ | ₹85.25 | कोई बदलाव नहीं |
| हैदराबाद | ₹98.96 | कोई बदलाव नहीं |
| जयपुर | ₹93.23 | +₹0.20 |
| लखनऊ | ₹91.01 | +₹0.32 |
| पटना | ₹94.97 | -₹0.13 |
आखिर क्यों बदलते रहते हैं डीजल के दाम?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। अगर रुपया कमजोर होता है तो आयात महंगा हो जाता है और इसका असर डीजल-पेट्रोल की कीमतों पर दिखाई देता है।
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई को लेकर चिंता ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल को मजबूत बनाए रखा है। यही वजह है कि भारतीय तेल कंपनियां भी कीमतों को लेकर सतर्क नजर आ रही हैं।
डीजल महंगा होने से आम आदमी पर क्या असर पड़ता है?
डीजल सिर्फ वाहनों में इस्तेमाल होने वाला ईंधन नहीं है। इसका सीधा संबंध देश की सप्लाई चेन और परिवहन व्यवस्था से है। ट्रक, बसें, कृषि मशीनें और कई औद्योगिक सेक्टर डीजल पर निर्भर हैं। ऐसे में डीजल महंगा होने का असर धीरे-धीरे इन चीजों पर दिखाई देता है:
- सब्जियों और खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं
- ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ती है
- बस और कैब किराए महंगे हो सकते हैं
- कृषि लागत में बढ़ोतरी हो सकती है
- ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं की लागत बढ़ सकती है
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर डीजल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो इसका असर खुदरा महंगाई पर भी दिखाई दे सकता है।
क्या आगे और बढ़ सकते हैं डीजल के दाम?
ऊर्जा बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में कच्चे तेल की दिशा बेहद अहम रहने वाली है। यदि ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर स्थिर रहता है और रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो भारत में ईंधन कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि, केंद्र सरकार और तेल मार्केटिंग कंपनियां फिलहाल कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही हैं ताकि आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
Source: Goodreturns Diesel Prices
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