अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में मई 2026 के दौरान बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 25 मई 2026 को क्रूड ऑयल की कीमत घटकर 93.36 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। महीने की शुरुआत में यह 107.64 डॉलर पर कारोबार कर रहा था। यानी सिर्फ 25 दिनों में करीब 13% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक मांग में नरमी, अमेरिका में क्रूड स्टॉक बढ़ना और मध्य पूर्व में सप्लाई को लेकर आशंकाएं कम होने से तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इसका असर आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और एटीएफ की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
मई 2026 में क्रूड ऑयल की कीमतों का हाल
| विवरण | कीमत |
|---|---|
| 1 मई 2026 | $107.64 |
| 25 मई 2026 | $93.36 |
| मई में सबसे ऊंचा स्तर | $113.63 (4 मई) |
| मई में सबसे निचला स्तर | $93.36 (25 मई) |
| कुल प्रदर्शन | गिरावट |
| प्रतिशत बदलाव | -13.27% |
क्यों टूट रही हैं कच्चे तेल की कीमतें?
1. वैश्विक मांग में कमजोरी
चीन, यूरोप और अमेरिका जैसे बड़े देशों में औद्योगिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ने से तेल की मांग पर असर पड़ा है। कई देशों में मैन्युफैक्चरिंग डेटा उम्मीद से कमजोर रहा है।
2. अमेरिका में बढ़ा क्रूड स्टॉक
अमेरिकी एनर्जी एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार वहां कच्चे तेल का भंडार बढ़ा है। सप्लाई ज्यादा होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव बना।
3. मिडिल ईस्ट तनाव में नरमी
पिछले कुछ हफ्तों में ईरान और खाड़ी क्षेत्र को लेकर जो तनाव बना हुआ था, उसमें थोड़ी राहत देखने को मिली है। इससे सप्लाई बाधित होने का खतरा कम हुआ।
4. डॉलर की मजबूती
अमेरिकी डॉलर मजबूत होने पर क्रूड ऑयल खरीदना कई देशों के लिए महंगा हो जाता है। इससे मांग कमजोर पड़ती है और कीमतें गिरती हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देश के लिए राहत की खबर मानी जाती है।
पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सकता है
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है तो तेल कंपनियां आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत दे सकती हैं।
महंगाई पर दबाव घटेगा
ट्रांसपोर्ट लागत कम होने से फल-सब्जियां, दूध, किराना और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर असर पड़ सकता है। इससे खुदरा महंगाई में राहत मिल सकती है।
रुपये को मिल सकती है मजबूती
क्रूड ऑयल आयात बिल घटने से भारत का व्यापार घाटा कम हो सकता है। इससे रुपये पर दबाव घटेगा।
एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं?
कमोडिटी मार्केट विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के नीचे बना रहता है तो भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है। हालांकि ओपेक देशों के उत्पादन फैसले और जियो-पॉलिटिकल तनाव आगे की दिशा तय करेंगे।
आगे क्या रह सकता है ट्रेंड?
विशेषज्ञों के अनुसार जून 2026 में क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अगर वैश्विक मांग कमजोर रहती है और सप्लाई सामान्य बनी रहती है तो कीमतें 90 डॉलर के नीचे भी जा सकती हैं। वहीं किसी बड़े भू-राजनीतिक संकट की स्थिति में अचानक तेजी भी लौट सकती है।
Also Read:


