तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर पहुंचती दिख रही है। इसी कड़ी में बीजेपी नेता CR Kesavan ने कांग्रेस और DMK पर महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को लेकर बड़ा हमला बोला है। मदुरै में दिए गए अपने बयान में उन्होंने दोनों पार्टियों पर “महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य के साथ विश्वासघात” करने का आरोप लगाया।
उनका यह बयान सिर्फ एक चुनावी टिप्पणी नहीं, बल्कि उस बड़े राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा है जिसमें महिला अधिकार, आरक्षण और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे केंद्र में आ चुके हैं।
चुनावी पृष्ठभूमि: क्यों अहम है यह मुकाबला?
Tamil Nadu में 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होना है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। इस बार मुकाबला पारंपरिक दो धड़ों के बीच ही नहीं, बल्कि संभावित त्रिकोणीय बनता दिख रहा है।
मुख्य मुकाबला:
- DMK के नेतृत्व वाला गठबंधन
- NDA गठबंधन, जिसमें Bharatiya Janata Party शामिल है
- अभिनेता Vijay की पार्टी TVK
इस चुनाव में विकास, रोजगार और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण एक बड़ा चुनावी एजेंडा बन चुका है।
CR केशवन का आरोप: “महिलाओं के साथ विश्वासघात”
अपने संबोधन में CR Kesavan ने DMK और Indian National Congress पर तीखा हमला करते हुए कहा कि इन दलों ने महिलाओं के अधिकारों को नजरअंदाज किया है।
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए दोनों पार्टियों की तुलना “मीर जाफर” और “एट्टप्पन” जैसे विश्वासघात के प्रतीकों से की। यह बयान साफ तौर पर चुनावी माहौल को गर्माने वाला माना जा रहा है।
केशवन का कहना था कि:
- कांग्रेस ने अपने लंबे शासनकाल में महिला आरक्षण को प्राथमिकता नहीं दी
- महिला अधिकारों से जुड़े कई मुद्दों को नजरअंदाज किया गया
- गरीब और सामान्य पृष्ठभूमि की महिलाओं को अवसर नहीं मिला
शाह बानो केस का जिक्र: पुरानी बहस फिर ताजा
केशवन ने अपने बयान में Shah Bano case का भी उल्लेख किया, जो भारत की राजनीति और कानून में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।
उनका आरोप था कि उस समय कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटकर महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया।
यह मुद्दा दशकों पुराना जरूर है, लेकिन चुनावी राजनीति में इसे आज भी एक बड़े उदाहरण के रूप में पेश किया जाता है।
“नारी शक्ति” पर बीजेपी का फोकस
केशवन ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को लेकर किए गए प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि:
- विकसित भारत का सपना, महिलाओं की भागीदारी के बिना अधूरा है
- निर्णय लेने वाले पदों पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है
- “नारी शक्ति” देश की आधी आबादी है, जिसे बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए
बीजेपी लंबे समय से महिला सशक्तिकरण को अपने प्रमुख एजेंडों में शामिल करती रही है, और इस चुनाव में भी यह एक केंद्रीय मुद्दा बना हुआ है।
DMK और कांग्रेस का पक्ष क्या हो सकता है?
हालांकि इस बयान पर DMK या कांग्रेस की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, लेकिन इन पार्टियों का अपना पक्ष भी मजबूत रहा है।
संभावित तर्क:
- DMK सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाओं पर जोर देती है
- कांग्रेस महिला आरक्षण बिल और सामाजिक योजनाओं का समर्थन करती रही है
- दोनों दल महिलाओं के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हैं
यानी यह मुद्दा सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं, बल्कि नीतिगत बहस का हिस्सा भी है।
चुनावी रणनीति: महिला वोट बैंक कितना अहम?
तमिलनाडु जैसे राज्यों में महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
राजनीतिक दलों के लिए:
- महिला सुरक्षा
- रोजगार
- शिक्षा
- आर्थिक सशक्तिकरण
जैसे मुद्दे चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
CR केशवन का बयान भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है, जिसमें महिला वोटर्स को सीधे संबोधित करने की कोशिश की गई है।
क्या बनेगा बड़ा मुद्दा?
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि:
- क्या महिला सशक्तिकरण चुनाव का मुख्य मुद्दा बनता है
- विपक्ष इस बयान का कैसे जवाब देता है
- मतदाता इस बहस को किस नजर से देखते हैं
निष्कर्ष
तमिलनाडु चुनाव 2026 सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि विचारधाराओं और नीतियों का मुकाबला भी बन चुका है। महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दे इस चुनाव को और भी अहम बना रहे हैं।
CR Kesavan का DMK और कांग्रेस पर हमला राजनीतिक रूप से कितना असर डालता है, यह तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे, लेकिन इतना तय है कि इस बार “नारी शक्ति” चुनावी विमर्श के केंद्र में है।
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