भारतीय शेयर बाजार में लगातार सातवें कारोबारी सत्र गिरावट देखने को मिली है। बुधवार, 19 अगस्त को निफ्टी 50 इंडेक्स 0.32 फीसदी फिसलकर 24,078 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, बीएसई सेंसेक्स भी 0.42 फीसदी की गिरावट के साथ 76,909 अंक पर बंद हुआ। लगातार कई सत्रों की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निफ्टी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे जा सकता है?
बीते सात कारोबारी सत्रों में निफ्टी 50 में करीब 2.1 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। सेंसेक्स की स्थिति भी कमजोर रही है। पिछले सात सत्रों में से छह में सेंसेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ और इस दौरान इसमें भी करीब 2.1 फीसदी की कमजोरी आई है।
बाजार में मौजूदा कमजोरी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें सबसे अहम बढ़ता जियोपॉलिटिकल तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड लगातार 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। महंगे क्रूड से महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत होती है, जिसका असर वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर भी पड़ सकता है।
किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा गिरावट रही?
19 अगस्त के कारोबार में सभी सेक्टरों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स अपेक्षाकृत मजबूत रहा और उसने बाजार को कुछ सहारा दिया। हालांकि, निफ्टी मीडिया, एनर्जी और एफएमसीजी इंडेक्स में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।
एनर्जी शेयरों पर कच्चे तेल की कीमतों का असर महत्वपूर्ण है, जबकि एफएमसीजी कंपनियों के लिए महंगाई और उपभोक्ता मांग से जुड़े जोखिम बाजार की चिंता बढ़ा सकते हैं। दूसरी ओर, आईटी सेक्टर में मजबूती ने व्यापक बाजार की गिरावट को कुछ हद तक सीमित करने में मदद की।
फिर भी, लगातार सातवें सत्र की गिरावट यह बताती है कि फिलहाल बाजार में खरीदारी की तुलना में बिकवाली का दबाव ज्यादा मजबूत है।
12 सत्रों से कंसॉलिडेशन में निफ्टी
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक निफ्टी पिछले करीब 12 कारोबारी सत्रों से एक सीमित दायरे में कंसॉलिडेशन कर रहा है। ऐसे में अब 24,000 के आसपास का स्तर तकनीकी नजरिए से काफी महत्वपूर्ण हो गया है।
कोटक सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक इंट्राडे मार्केट का टेक्स्चर फिलहाल कमजोर बना हुआ है। हालांकि, अगर निफ्टी 24,150 के स्तर को दोबारा पार करने में सफल रहता है, तो शॉर्ट टर्म में पुलबैक रैली की संभावना बन सकती है।
ऐसी स्थिति में निफ्टी के लिए अगला संभावित स्तर 24,300 से 24,350 के बीच हो सकता है। यानी मौजूदा स्तर से बाजार में तेजी लौटने के लिए 24,150 के ऊपर टिकना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या 24,000 के नीचे जा सकता है निफ्टी?
निफ्टी के लिए सबसे बड़ी चिंता 24,000 का स्तर है। यह केवल एक तकनीकी सपोर्ट नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक स्तर भी है। अगर इंडेक्स लगातार बिकवाली के बीच इस स्तर के नीचे फिसलता है और वहां टिक जाता है, तो बाजार में दबाव और बढ़ सकता है।
कोटक सिक्योरिटीज के मुताबिक 24,000 के नीचे जाने पर निफ्टी 23,900 से 23,850 के क्षेत्र की ओर फिसल सकता है। इसलिए आने वाले सत्रों में 24,000 का स्तर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हालांकि, केवल एक बार 24,000 के नीचे जाना ही निर्णायक ब्रेकडाउन नहीं माना जाएगा। बाजार यह भी देखेगा कि निफ्टी इस स्तर के नीचे कितनी देर टिकता है और वहां कारोबार के दौरान खरीदारी लौटती है या नहीं।
एसबीआई सिक्योरिटीज ने भी जताई चिंता
एसबीआई सिक्योरिटीज के सुदीप शाह के मुताबिक शेयर बाजार में फिलहाल जोखिम लेने की क्षमता कमजोर हुई है। निफ्टी में लगातार बिकवाली का दबाव दिखाई दे रहा है और निवेशक बाजार में नए सिरे से बड़ी पोजीशन लेने से सतर्क नजर आ रहे हैं।
ऐसे माहौल में बाजार के लिए केवल घरेलू संकेतक ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। वैश्विक बाजारों की दिशा, कच्चे तेल की कीमतें और मध्यपूर्व में जारी तनाव भी भारतीय इक्विटी बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।
खासकर अगर क्रूड की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे भारत के लिए आयात बिल और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसका असर बाजार की धारणा पर पड़ना स्वाभाविक है।
क्रूड ऑयल बना बाजार की बड़ी चिंता
मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी शेयर बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण जोखिमों में से एक बन गई है। ब्रेंट क्रूड करीब 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है और तीन महीनों के उच्च स्तर के करीब कारोबार कर रहा है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने पर देश के आयात खर्च पर दबाव बढ़ता है। लंबे समय तक ऊंची कीमतें बनी रहने पर महंगाई, चालू खाते और कंपनियों की लागत को लेकर बाजार में चिंता पैदा हो सकती है।
यही वजह है कि निवेशक मध्यपूर्व की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
मध्यपूर्व के तनाव से बढ़ी अनिश्चितता
मध्यपूर्व में जारी तनाव फिलहाल कम होता नजर नहीं आ रहा है। 18 अगस्त को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुले होने की बात कही थी।
दूसरी ओर, ईरान की ओर से इससे अलग दावा किया गया है। ईरान का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही नहीं हो रही है। दोनों पक्षों के बयानों में अंतर ने बाजार की अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। इसलिए इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आने की आशंका बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
आगे बाजार की दिशा कैसे तय होगी?
अब निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर सबसे अहम सपोर्ट जोन में शामिल हो गया है। इसके ऊपर बने रहने पर इंडेक्स में कंसॉलिडेशन जारी रह सकता है और 24,150 के ऊपर मजबूती मिलने पर 24,300-24,350 की तरफ रिकवरी की संभावना बन सकती है।
वहीं, अगर निफ्टी 24,000 के नीचे निर्णायक रूप से फिसलता है, तो 23,900-23,850 का क्षेत्र अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट बन सकता है। इस स्थिति में बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है।
इसलिए फिलहाल बाजार में जल्दबाजी में किसी एक दिशा का अनुमान लगाना जोखिम भरा हो सकता है। निवेशकों के लिए निफ्टी के 24,000 और 24,150 जैसे महत्वपूर्ण स्तरों पर नजर रखना जरूरी होगा। साथ ही, क्रूड ऑयल की कीमत और मध्यपूर्व से आने वाली खबरें भी बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। ऊपर दी गई जानकारी बाजार विशेषज्ञों और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


