नई दिल्ली: किसानों और सरकार दोनों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया (Urea) की कीमतों में जून 2026 के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मई में तेज उछाल के बाद जून में यूरिया के दाम करीब 40% तक कम हो गए हैं। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह चीन द्वारा यूरिया निर्यात प्रतिबंधों में आंशिक ढील और पश्चिम एशिया में सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता का कम होना माना जा रहा है।
हालांकि राहत की बात यह है कि कीमतों में मासिक गिरावट आई है, लेकिन जून 2026 में यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमतें अभी भी जून 2025 की तुलना में लगभग 45% अधिक बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि खरीफ सीजन के दौरान खाद की उपलब्धता और आयात लागत पर इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है।
मई के मुकाबले जून में 40% सस्ता हुआ यूरिया
उर्वरक विभाग के आंकड़ों के अनुसार जून 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की औसत कीमत 572 डॉलर प्रति टन रही। एक वर्ष पहले यानी जून 2025 में यह कीमत करीब 395 डॉलर प्रति टन थी। हालांकि सालाना आधार पर कीमतें अभी भी ऊंची हैं, लेकिन मई 2026 के मुकाबले जून में लगभग 40% की गिरावट दर्ज की गई है।
इस गिरावट से भारत जैसे बड़े आयातक देशों को राहत मिलने की उम्मीद है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी आने से आयात लागत घट सकती है और सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी कुछ कम हो सकता है।
चीन के फैसले से बाजार में बढ़ी सप्लाई
विशेषज्ञों के अनुसार कीमतों में नरमी आने की सबसे बड़ी वजह चीन की ओर से यूरिया निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों में आंशिक ढील देना है। चीन दुनिया के सबसे बड़े यूरिया उत्पादकों में शामिल है। उसके निर्यात बढ़ने से वैश्विक बाजार में सप्लाई बेहतर हुई, जिससे कीमतों पर दबाव कम हुआ।
इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित नहीं हुई, जिससे बाजार में घबराहट भी कम हुई और कीमतें नीचे आईं।
खरीफ सीजन के लिए भारत के पास पर्याप्त यूरिया
उर्वरक उद्योग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक भारत के पास खरीफ सीजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त यूरिया का भंडार उपलब्ध है। सरकार लगातार वैश्विक बाजार और पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि भविष्य में यदि सप्लाई प्रभावित होती है तो समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके।
इसका उद्देश्य किसानों को किसी भी स्थिति में खाद की कमी का सामना न करना पड़े।
किन उर्वरकों की कीमतें अब भी ऊंची हैं?
जहां यूरिया की कीमतों में राहत देखने को मिली है, वहीं अन्य प्रमुख उर्वरकों की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। उर्वरक विभाग के जून बुलेटिन के अनुसार—
- डाय-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) की कीमतें पिछले वर्ष से अधिक बनी हुई हैं।
- पोटाश और फॉस्फोरिक एसिड के दाम भी ऊंचे स्तर पर हैं।
- सल्फर की कीमत लगभग 1,050 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 265% अधिक है।
- अमोनिया की कीमतों में भी सालाना आधार पर करीब 95% की वृद्धि दर्ज की गई है।
इन महंगे कच्चे माल का असर उर्वरक उद्योग की लागत पर लगातार बना हुआ है।
उत्पादन लक्ष्य से अधिक रहा यूरिया उत्पादन
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मई और जून 2026 के दौरान देश में यूरिया उत्पादन निर्धारित लक्ष्य से अधिक रहा। इससे घरेलू उपलब्धता मजबूत हुई और आयात पर दबाव कम करने में मदद मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी आने से आने वाले महीनों में खाद की उपलब्धता बेहतर बनी रह सकती है।
यूरिया आयात कम करने की दिशा में सरकार की तैयारी
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यूरिया क्षेत्र से जुड़ी नई नीति को मंजूरी दी है। इस नीति का उद्देश्य देश में घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना है।
यदि यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो आने वाले वर्षों में भारत का यूरिया आयात धीरे-धीरे कम हो सकता है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत और उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
किसानों के लिए इसका क्या मतलब?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में आई गिरावट और देश में पर्याप्त भंडार होने से खरीफ सीजन में किसानों को खाद की उपलब्धता को लेकर राहत मिल सकती है। हालांकि अन्य उर्वरकों की ऊंची कीमतें अभी भी चुनौती बनी हुई हैं। सरकार की नई नीति और घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी भविष्य में खाद की आपूर्ति को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।


