Air Pollution News: भारत में पिछले आठ साल से रह रहे कनाडाई नागरिक कालेब फ्रिसेन ने खराब होती एयर क्वॉलिटी के चलते अपना शहर बदल लिया। दिल्ली और बेंगलुरु में रहने के बाद अब वह मिजोरम के आइजोल में रह रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों की सेहत के साथ कोई जोखिम नहीं लेना चाहते थे।
भारत के बड़े शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और स्वास्थ्य से भी जुड़ता जा रहा है। इसी बीच भारत में पिछले आठ वर्षों से रह रहे एक कनाडाई नागरिक की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। खराब एयर क्वॉलिटी के कारण उन्होंने पहले दिल्ली छोड़ी और इसके बाद बेंगलुरु से भी अपना ठिकाना बदल लिया। अब वह मिजोरम की राजधानी आइजोल में रह रहे हैं।
कालेब फ्रिसेन नाम के इस कनाडाई नागरिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि बच्चों की सेहत को देखते हुए साफ हवा में रहना उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण था। उनके इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर महानगरों में प्रदूषण और बेहतर जीवन के लिए शहर बदलने को लेकर बहस शुरू हो गई।
दिल्ली में प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता
India's air pollution has me on the move.
I left Delhi in 2018 and shifted to Bengaluru (I was told it was the Garden City of India). One major reason was NCR's air pollution. I couldn't tolerate another PM2.5 999+ winter.
Earlier in 2026, I moved to Mizoram. Bengaluru's air… https://t.co/m131RlKetp pic.twitter.com/5L6ObgjzZ7
— Caleb (@caleb_friesen) August 21, 2026 कालेब फ्रिसेन ने बताया कि उन्होंने साल 2018 में दिल्ली छोड़ने का फैसला किया था। खासकर सर्दियों के दौरान दिल्ली की खराब होती एयर क्वॉलिटी उनके लिए बड़ी चिंता बन गई थी। प्रदूषण के कारण उन्होंने ऐसा शहर तलाशने का फैसला किया, जहां परिवार को अपेक्षाकृत बेहतर हवा मिल सके।
दिल्ली के बाद फ्रिसेन बेंगलुरु चले गए। उन्हें उम्मीद थी कि भारत का ‘गार्डन सिटी’ कहा जाने वाला बेंगलुरु रहने के लिए बेहतर विकल्प साबित होगा। हालांकि, उनके मुताबिक समय के साथ बेंगलुरु की हवा की गुणवत्ता को लेकर भी उनकी चिंता बढ़ती गई।
2026 में मिजोरम के आइजोल पहुंचे
बेंगलुरु के बाद फ्रिसेन ने साल 2026 की शुरुआत में मिजोरम के आइजोल का रुख किया। आइजोल से उनका पारिवारिक जुड़ाव भी है, क्योंकि उनकी पत्नी का परिवार वहां रहता है। इसके अलावा, अपने दो बच्चों की परवरिश को लेकर भी उन्होंने इस फैसले को महत्वपूर्ण बताया।
फ्रिसेन का कहना है कि बच्चों की सेहत के साथ किसी तरह का जोखिम लेना वह नहीं चाहते थे। उनके अनुसार, परिवार के लिए ऐसी जगह रहना जरूरी है जहां वातावरण अपेक्षाकृत साफ हो और बच्चों को प्रदूषण से होने वाले संभावित स्वास्थ्य जोखिमों का सामना कम करना पड़े।
‘मैं जोखिम नहीं लेना चाहता था’
अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में फ्रिसेन ने बच्चों की परवरिश और साफ हवा के महत्व पर बात की। उन्होंने कहा कि वह दो बच्चों की परवरिश कर रहे हैं और उनका मानना है कि बच्चे को पालने के लिए पूरे समुदाय के सहयोग की जरूरत होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि वह ऐसा कोई जोखिम नहीं लेना चाहते थे जिससे उनके बच्चे भविष्य में अस्थमा जैसी समस्या का सामना करें। यही वजह रही कि उन्होंने परिवार के लिए बेहतर वातावरण वाले स्थान को प्राथमिकता दी।
फ्रिसेन ने भारतीय महानगरों में रहने वाले लोगों को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि लोगों को साफ हवा में सांस लेने के लिए पहाड़ों की ओर भागने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। उनके मुताबिक महानगरों में रहने वाले लोगों को भी स्वस्थ और साफ वातावरण मिलना चाहिए।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
कालेब फ्रिसेन की पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने आइजोल को खूबसूरत और हरा-भरा शहर बताते हुए उनके फैसले की तारीफ की।
एक यूजर ने आइजोल को सपने जैसा शहर बताया। वहीं, कुछ लोगों ने उनकी पोस्ट को लेकर सवाल भी उठाए और पूछा कि कहीं यह किसी तरह का प्रमोशन तो नहीं है।
इन सवालों के जवाब में फ्रिसेन ने स्पष्ट किया कि यह कोई पेड प्रमोशन नहीं है। उन्होंने बताया कि वह भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों पर वीडियो बनाते हैं, लेकिन उनके पोस्ट प्रायोजित नहीं होते।
एक अन्य यूजर ने आइजोल की हरियाली और खूबसूरती की तारीफ की। कुछ लोगों ने शहर के एयरपोर्ट पर उतरने के अनुभव का भी जिक्र किया। वहीं, एक यूजर ने प्रदूषण से निपटने का सीधा समाधान बताते हुए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की बात कही।
प्रदूषण पर गंभीर सवाल खड़े करती है कहानी
कालेब फ्रिसेन का अनुभव भले ही व्यक्तिगत हो, लेकिन यह कहानी भारत के बड़े शहरों में एयर क्वॉलिटी को लेकर बढ़ती चिंता की ओर जरूर ध्यान खींचती है। बेहतर नौकरी, कारोबार और सुविधाओं के कारण बड़ी संख्या में लोग महानगरों का रुख करते हैं, लेकिन प्रदूषण जैसी समस्या उनके जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
फ्रिसेन का दिल्ली से बेंगलुरु और फिर आइजोल तक पहुंचने का सफर इसी सवाल को सामने रखता है कि क्या लोगों को बेहतर हवा के लिए अपना शहर बदलने की जरूरत पड़नी चाहिए। खासकर बच्चों वाले परिवारों के लिए यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
हालांकि, किसी एक व्यक्ति के अनुभव के आधार पर किसी शहर की पूरी एयर क्वॉलिटी का आकलन नहीं किया जा सकता। फिर भी उनकी कहानी सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर चर्चा जरूर शुरू करती है कि शहरों में विकास के साथ स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण को भी उतनी ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए।


