Sugar Price Update: फेस्टिव सीजन से पहले देश में चीनी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। खुदरा बाजार में चीनी के दाम बढ़कर करीब ₹58.2 प्रति किलोग्राम पहुंच गए हैं। एक महीने के मुकाबले कीमत में करीब 20 फीसदी और एक साल पहले की तुलना में लगभग 26 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने इसकी वजहों को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।
सरकार ने चीनी की कीमतों में तेजी के लिए कम घरेलू उत्पादन, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम की मार, फसल में बीमारियां, वैश्विक स्तर पर सप्लाई की कमी और जमाखोरी-सट्टेबाजी को प्रमुख कारण बताया है। साथ ही सरकार ने उन दावों को भी खारिज किया है कि इथेनॉल उत्पादन के लिए ज्यादा चीनी इस्तेमाल होने के कारण घरेलू बाजार में उपलब्धता कम हुई है।
इस साल चीनी का उत्पादन कितना रहेगा?
मौजूदा चीनी सीजन यानी अक्टूबर से सितंबर के दौरान देश में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है। यह सरकार के शुरुआती अनुमान 343 लाख टन से लगभग 11 फीसदी कम है।
उत्पादन में कमी का असर शुरुआती स्टॉक पर भी पड़ने की आशंका है। अधिकारियों के मुताबिक 1 अक्टूबर को चीनी का शुरुआती स्टॉक करीब 33-34 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह लगभग 50 लाख टन था।
हालांकि सरकार का कहना है कि नया स्टॉक बाजार में आने तक मौजूदा स्टॉक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त रहेगा।
क्यों बढ़ रही है चीनी की कीमत?
खाद्य मंत्रालय के मुताबिक चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे कोई एक कारण नहीं है। कई घरेलू और वैश्विक वजहों ने मिलकर बाजार पर दबाव बनाया है।
प्रमुख कारणों में शामिल हैं:
- अनुमान से कम घरेलू चीनी उत्पादन
- त्योहारों के सीजन से पहले मांग में बढ़ोतरी
- खराब मौसम के कारण गन्ने की फसल को नुकसान
- महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में फसल संबंधी बीमारियां
- वैश्विक स्तर पर चीनी की सप्लाई में कमी
- बाजार में सट्टेबाजी और जमाखोरी
त्योहारी सीजन में मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में सीमित सप्लाई के बीच बढ़ी मांग ने कीमतों पर दबाव और बढ़ा दिया है।
सरकार ने उठाया बड़ा कदम
चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता कम करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद करना है।
सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब त्योहारी सीजन नजदीक है और घरेलू बाजार में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना है।
क्या इथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी?
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच यह सवाल भी उठ रहा था कि इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का इस्तेमाल बढ़ने से घरेलू बाजार में उपलब्धता कम हुई है। हालांकि सरकार ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
खाद्य मंत्रालय के अनुसार, इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12 फीसदी से घटकर 2025-26 में लगभग 9 फीसदी रह गई है। यानी कुछ साल पहले की तुलना में इथेनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल बढ़ने के बजाय कम हुआ है।
सरकार ने यह भी बताया कि देश में बनने वाले इथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज से तैयार होता है। ऐसे में मौजूदा चीनी महंगाई के लिए इथेनॉल उत्पादन को मुख्य वजह मानना सही नहीं है।
महाराष्ट्र और यूपी में फसल को नुकसान
इस साल चीनी उत्पादन के अनुमान में कमी की एक बड़ी वजह गन्ने की फसल पर मौसम और बीमारियों का असर भी है।
अधिकारियों के मुताबिक पिछले साल अक्टूबर में महाराष्ट्र में भारी बारिश हुई थी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में गन्ने की फसल को रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों से नुकसान पहुंचा। इससे गन्ने की पैदावार और चीनी उत्पादन दोनों प्रभावित हुए।
राज्यों ने मौजूदा सीजन के लिए शुरुआत में चीनी उत्पादन करीब 343 लाख टन रहने का अनुमान लगाया था। वहीं इंडस्ट्री बॉडी ISMA का शुरुआती अनुमान करीब 348 लाख टन था। बाद में उत्पादन को लेकर अनुमान घटाए गए।
चीनी निर्यात पर भी लगी रोक
सरकार को चीनी उत्पादन में कमी के शुरुआती संकेत जनवरी में ही मिलने लगे थे। हालांकि उस समय मिलों में गन्ने की पेराई जारी थी।
जानकारी के मुताबिक चीनी का निर्यात मार्च में शुरू हुआ था, लेकिन उत्पादन कम रहने के संकेत मिलने के बाद सरकार ने मई की शुरुआत में ही निर्यात पर रोक लगा दी। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रखना था।
सरकार का कहना है कि चीनी की सप्लाई में कमी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। वैश्विक स्तर पर भी 2026-27 के लिए करीब 33 लाख टन चीनी की कमी का अनुमान लगाया गया है।
आगे क्या होगा?
फेस्टिव सीजन में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए कीमतों पर नजर बनी रहेगी। सरकार की ओर से ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति और पहले से निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध घरेलू सप्लाई को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि चीनी उत्पादन में कमी और वैश्विक बाजार में सप्लाई की स्थिति के कारण कीमतों पर दबाव पूरी तरह खत्म होने में समय लग सकता है। आने वाले दिनों में घरेलू उत्पादन, आयात और त्योहारों के दौरान मांग का स्तर यह तय करेगा कि चीनी की कीमतों में आगे राहत मिलती है या तेजी जारी रहती है।
निष्कर्ष: सरकार के मुताबिक चीनी की मौजूदा महंगाई के पीछे इथेनॉल सबसे बड़ी वजह नहीं है। कम उत्पादन, मौसम से फसल को नुकसान, त्योहारों की मांग, वैश्विक सप्लाई की कमी और जमाखोरी जैसे कई कारण मिलकर कीमतों को ऊपर ले गए हैं। सरकार ने सप्लाई बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है, जिससे आने वाले समय में बाजार को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।


