नई दिल्ली: उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई पीठ ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Reliance Infrastructure) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी KM Toll Road Private Limited के खिलाफ कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू करने की मंजूरी दे दी है। यह कार्रवाई भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की याचिका पर हुई है। अब कंपनी का समाधान इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत किया जाएगा, जिससे इसका भविष्य काफी हद तक JP Associates की तरह हो सकता है, जहां अंततः खरीदारों के बीच बोली लगने के बाद कंपनी का स्वामित्व बदल गया था।
Highlights
- NCLT ने KM Toll Road Private Limited के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दी।
- SBI ने 233.44 करोड़ रुपये के बकाया कर्ज की वसूली के लिए दायर की थी याचिका।
- कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
- NCLT ने आशीष अविनाश साओजी को अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) नियुक्त किया।
- कंपनी का दावा, NHAI से 2,096 करोड़ रुपये के आर्बिट्रेशन अवार्ड का इंतजार।
SBI की याचिका पर शुरू हुई दिवाला प्रक्रिया
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई सूचना में बताया कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने KM Toll Road Private Limited के खिलाफ IBC की धारा 7 के तहत याचिका दायर की थी। बैंक का आरोप था कि कंपनी ने लिए गए कर्ज का भुगतान नहीं किया, जिसके चलते कुल 233.44 करोड़ रुपये (ब्याज सहित) की देनदारी बकाया है।
NCLT ने 22 जुलाई 2026 को इस याचिका को स्वीकार कर लिया था, जबकि कंपनी को इस आदेश की जानकारी 5 अगस्त 2026 को प्राप्त हुई।
JP Associates जैसा हो सकता है भविष्य
NCLT के आदेश के बाद अब KM Toll Road Private Limited के खिलाफ कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रिजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू होगी। इस प्रक्रिया के दौरान विभिन्न निवेशक और कंपनियां समाधान योजना (Resolution Plan) पेश करेंगी। यदि लेनदारों (Creditors) को कोई योजना उपयुक्त लगती है, तो कंपनी का स्वामित्व नए खरीदार को सौंपा जा सकता है।
हाल ही में JP Associates के मामले में भी इसी तरह की प्रक्रिया के बाद समाधान योजना को मंजूरी मिली थी। ऐसे में बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि KM Toll Road के मामले में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने क्या कहा?
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने स्पष्ट किया है कि KM Toll Road में उसका लगभग 548 करोड़ रुपये का निवेश (Exposure) पहले ही कंपनी की बैलेंस शीट में पूरी तरह Provision किया जा चुका है। इसका मतलब है कि इस दिवाला प्रक्रिया से रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की वित्तीय स्थिति पर किसी अतिरिक्त बड़े नुकसान की संभावना नहीं है।
कंपनी का कहना है कि इस निवेश के लिए पहले ही लेखांकन प्रावधान कर लिया गया था, इसलिए यह आदेश वित्तीय परिणामों पर कोई नया बड़ा प्रभाव नहीं डालेगा।
NHAI के साथ विवाद का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान KM Toll Road ने NCLT के सामने तर्क दिया कि कंपनी पूरी तरह दिवालिया नहीं है, बल्कि केवल अस्थायी वित्तीय संकट से गुजर रही है। कंपनी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ लंबे समय से चल रहे विवाद के कारण उसका प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ।
कंपनी ने यह भी बताया कि उसे NHAI से लगभग 2,096 करोड़ रुपये के आर्बिट्रेशन अवार्ड मिलने की उम्मीद है। यदि यह राशि प्राप्त होती है तो उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है।
हालांकि NCLT ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि जब कर्ज और डिफॉल्ट दोनों साबित हो चुके हैं तो IBC के प्रावधानों के अनुसार दिवाला प्रक्रिया शुरू करना अनिवार्य है।
IRP की नियुक्ति, अब उनके हाथ में होगा प्रबंधन
NCLT ने इस मामले में श्री आशीष अविनाश साओजी को अंतरिम समाधान पेशेवर (Interim Resolution Professional – IRP) नियुक्त किया है। अब कंपनी का संचालन और प्रबंधन IRP की निगरानी में होगा।
IRP लेनदारों की समिति (Committee of Creditors) का गठन करेंगे और निर्धारित समय सीमा के भीतर कंपनी के लिए समाधान योजना तैयार की जाएगी। यदि समाधान नहीं निकलता है, तो अंततः कंपनी की परिसंपत्तियों की बिक्री या लिक्विडेशन की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
अनिल अंबानी समूह के लिए बढ़ी चुनौती
पिछले कुछ वर्षों में अनिल अंबानी समूह की कई कंपनियां वित्तीय संकट और कानूनी मामलों का सामना कर चुकी हैं। अब KM Toll Road के खिलाफ शुरू हुई दिवाला प्रक्रिया समूह के लिए एक और बड़ा झटका मानी जा रही है। हालांकि, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर का कहना है कि इस आदेश का उसकी मौजूदा वित्तीय स्थिति पर सीमित प्रभाव पड़ेगा क्योंकि संबंधित निवेश पहले ही पूरी तरह प्रावधानित किया जा चुका है।


