Bihar Flood Risk: उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद बिहार में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। खासतौर पर गंडक नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में अचानक पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर बैराज और इसके आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है।
नेपाल में आई बाढ़ को लेकर बिहार की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि नेपाल से निकलने वाली कई नदियां बिहार में प्रवेश करती हैं। इन नदियों के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश या अचानक बाढ़ आने पर कुछ ही घंटों में बिहार के नदी क्षेत्रों में पानी का बहाव बढ़ सकता है।
नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मचा हड़कंप
उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई जबरदस्त बाढ़ के बाद कई इलाकों में हालात बिगड़ गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में भोटे कोशी नदी में अचानक बाढ़ आने के बाद बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की सूचना है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार, इस घटना के बाद कम से कम 105 भारतीयों के लापता होने की बात सामने आई है। वहीं, बुधवार को नेपाल में आई बाढ़ में कम से कम 8 लोगों की मौत की खबर है।
सीमा पार चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी मडस्लाइड की घटना की जानकारी सामने आई है। चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, सीमा के पास एक व्यापारिक केंद्र में कीचड़ और मलबे के तेज बहाव से काफी लोग प्रभावित हुए हैं।
हालांकि, नेपाल में आई अचानक बाढ़ के सटीक कारण को लेकर अभी पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं है। पिछले साल इसी क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ के बाद ग्लेशियर झील से पानी निकलने की संभावना को कारण बताया गया था। इसलिए इस बार भी जलग्रहण क्षेत्र में होने वाली किसी भी असामान्य गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
बिहार में क्यों बढ़ाई गई निगरानी?
नेपाल के गंडक कैचमेंट एरिया में अचानक बाढ़ की स्थिति बनने से बिहार में प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। दरअसल, नेपाल से आने वाला अतिरिक्त पानी गंडक नदी के बहाव को प्रभावित कर सकता है।
बिहार प्रशासन ने पश्चिमी चंपारण के बगहा और वाल्मीकिनगर बैराज के आसपास निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों को आशंका है कि नेपाल के ऊपरी क्षेत्रों में पानी बढ़ने के बाद उसका असर गंडक नदी में कुछ घंटों के भीतर दिखाई दे सकता है।
यही वजह है कि नदी के जलस्तर और पानी के बहाव पर लगातार नजर रखी जा रही है। गंडक नदी के किनारे बसे इलाकों और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के किनारे अनावश्यक रूप से न जाएं और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
भोटे कोशी से गंडक तक कैसे पहुंचता है पानी?
नेपाल में भोटे कोशी नदी से जुड़ी बाढ़ की घटना का बिहार के लिए महत्व समझने के लिए नदियों की भौगोलिक स्थिति को समझना जरूरी है।
भोटे कोशी नदी तिब्बत क्षेत्र से निकलती है और नेपाल में आगे चलकर त्रिशूली नदी प्रणाली से जुड़ती है। यही नदी प्रणाली आगे भारत में गंडक नदी के रूप में प्रवेश करती है।
इस वजह से नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में होने वाली भारी बारिश, अचानक बर्फ पिघलने या फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं का असर नीचे की ओर नदी के बहाव पर पड़ सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि नेपाल में आई हर बाढ़ सीधे बिहार में भी बाढ़ पैदा करेगी। नदी का जलस्तर, बारिश की मात्रा, पानी की रफ्तार, बैराज की स्थिति और स्थानीय मौसम समेत कई कारक इसका असर तय करते हैं।
किन नेपाली जिलों पर रखी जा रही है नजर?
बिहार के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के मुताबिक, गंडक और कोसी नदी के कैचमेंट एरिया में आने वाले नेपाल के कई जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा अधिक माना जा रहा है।
गंडक कैचमेंट एरिया में रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, लमजुंग और तनहुं जैसे जिले शामिल हैं। वहीं, कोसी कैचमेंट एरिया में दोलखा और सिंधुपालचोक जैसे जिलों पर भी नजर रखी जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि इन इलाकों में अचानक बाढ़ की स्थिति बनने पर उसका प्रभाव भारत की ओर आने वाली नदियों के जलस्तर पर पड़ सकता है। इसलिए नेपाल में मौसम और नदी के हालात की निगरानी बिहार के लिए भी महत्वपूर्ण हो गई है।
गंडक नदी के किनारे इन इलाकों को रहना होगा सतर्क
गंडक नदी बिहार के कई इलाकों से होकर गुजरती है। ऐसे में नेपाल के ऊपरी हिस्से में पानी बढ़ने की स्थिति में पश्चिमी चंपारण समेत नदी के किनारे बसे क्षेत्रों में विशेष सावधानी जरूरी है।
खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए। अगर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता है तो प्रशासन जरूरत के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दे सकता है।
फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि लोग अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल प्रशासन, मौसम विभाग तथा आपदा प्रबंधन से मिलने वाली आधिकारिक जानकारी को ही आधार बनाएं।
फरक्का बैराज को लेकर क्यों उठी मांग?
नेपाल की बाढ़ से अलग बिहार में इस समय गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर भी चिंता बनी हुई है। इसी बीच फरक्का बैराज को लेकर बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच एक अहम मुद्दा सामने आया है।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने का आग्रह किया है। बिहार का तर्क है कि इससे गंगा के बढ़ते जलस्तर और ऊपरी हिस्से में बने दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, फरक्का बैराज से पानी छोड़ने का मुद्दा केवल बिहार और पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। इसका संबंध भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे से भी जुड़ा हुआ है।
1996 की गंगा जल संधि भी है अहम
भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 में गंगा जल बंटवारे को लेकर एक समझौता हुआ था। यह समझौता फरक्का में गंगा के पानी के बंटवारे से जुड़ा है और इसकी अवधि 30 साल की है।
यह समझौता इस साल दिसंबर में 30 साल पूरे करने वाला है। ऐसे में इसके भविष्य और संभावित नवीनीकरण को लेकर भी चर्चा तेज है।
बिहार लंबे समय से यह मांग करता रहा है कि गंगा जल से जुड़े किसी भी भविष्य के समझौते में राज्य के हितों को पर्याप्त महत्व दिया जाए। फरक्का बैराज से पानी के प्रवाह को लेकर राज्य की चिंता इसी व्यापक मुद्दे से भी जुड़ी हुई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ओर से बिहार को आश्वासन दिया गया है कि भविष्य की प्रक्रिया में फरक्का बैराज और गंगा जल बंटवारे से जुड़ी राज्य की चिंताओं पर विचार किया जाएगा।
पटना के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता क्या है?
बिहार के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता गंगा और उसकी सहायक नदियों का बढ़ता जलस्तर है। कुछ इलाकों में नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने की स्थिति सामने आई है।
पटना और बक्सर समेत कई क्षेत्रों में नदी के जलस्तर को लेकर प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। खास बात यह है कि राज्य में बारिश सामान्य से कम रहने के बावजूद कुछ स्थानों पर नदियों का जलस्तर बढ़ा है।
ऐसे में नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में अचानक पानी बढ़ने की स्थिति बिहार के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकती है। गंडक और अन्य नदियों में पानी का प्रवाह बढ़ने पर निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
बिहार के नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को फिलहाल कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।
- नदी और तेज बहाव वाले पानी के पास जाने से बचें।
- प्रशासन की ओर से जारी चेतावनी और निर्देशों पर नजर रखें।
- अफवाहों या सोशल मीडिया पर वायरल अपुष्ट वीडियो पर भरोसा न करें।
- जरूरी दस्तावेज और दवाइयां सुरक्षित स्थान पर रखें।
- स्थानीय प्रशासन की ओर से सुरक्षित स्थान पर जाने को कहा जाए तो देरी न करें।
- बच्चों और बुजुर्गों को नदी तथा जलभराव वाले इलाकों से दूर रखें।
निष्कर्ष
नेपाल के उत्तरी हिस्से में अचानक आई बाढ़ के बाद बिहार में गंडक नदी और उसके आसपास के इलाकों को लेकर सतर्कता बढ़ाना इसलिए जरूरी है क्योंकि नेपाल का ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र बिहार की नदी व्यवस्था से सीधे जुड़ा हुआ है। फिलहाल प्रशासन की नजर नदी के जलस्तर और पानी के संभावित बहाव पर है।
हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि नेपाल की बाढ़ के कारण बिहार में बड़े पैमाने पर बाढ़ आएगी। स्थिति काफी हद तक नेपाल में बारिश, नदी के बहाव और आने वाले घंटों में जलस्तर में होने वाले बदलाव पर निर्भर करेगी। ऐसे में लोगों को घबराने के बजाय सतर्क रहने और प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की जरूरत है।


