बच्चों का गुस्सा उनकी सामान्य भावनाओं का हिस्सा है। हालांकि, छोटी उम्र में वे अपनी भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त नहीं कर पाते, इसलिए कई बार रोने, चिल्लाने, चीजें फेंकने या मारने तक की नौबत आ जाती है। ऐसे समय में माता-पिता का शांत रहना और बच्चे को सही तरीके से गाइड करना बेहद जरूरी है।
बच्चों का अचानक गुस्सा होना पैरेंट्स के लिए परेशान करने वाला हो सकता है। खिलौना टूट जाना, भाई-बहन का उनकी पसंदीदा चीज ले लेना, स्क्रीन टाइम खत्म होना, मनपसंद चीज न मिलना या किसी काम के लिए मना कर दिया जाना जैसी छोटी-छोटी बातें बच्चों को काफी परेशान कर सकती हैं। कई बार बच्चा अपनी नाराजगी को रोकर, चिल्लाकर या गुस्सा करके जाहिर करता है।
ऐसे समय में बच्चे को डांटने या सजा देने के बजाय उसे अपनी भावनाओं को समझना और नियंत्रित करना सिखाना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। माता-पिता बच्चे को यह समझाने में मदद कर सकते हैं कि गुस्सा आना गलत नहीं है, लेकिन गुस्से में किसी को चोट पहुंचाना या चीजें तोड़ना सही नहीं है। आइए जानते हैं ऐसे 8 आसान तरीके, जिनकी मदद से आप बच्चे को गुस्सा संभालना सिखा सकते हैं।
1. बच्चे को उसकी भावनाओं के नाम बताएं
छोटे बच्चों के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि वे वास्तव में क्या महसूस कर रहे हैं। ऐसे में माता-पिता उनकी भावनाओं को पहचानने में मदद कर सकते हैं।
अगर बच्चा भाई-बहन के खिलौना ले जाने पर गुस्सा है, तो आप कह सकते हैं, “लगता है तुम्हें गुस्सा आ रहा है क्योंकि तुम्हारा खिलौना ले लिया गया।” इसी तरह निराशा, दुख, डर, झुंझलाहट और खुशी जैसे शब्दों से बच्चे को परिचित कराएं।
जब बच्चा अपनी भावना को पहचानने और उसका नाम लेने लगेगा, तो उसके लिए चिल्लाने या मारपीट करने के बजाय अपनी बात शब्दों में बताना आसान हो सकता है।
2. गुस्सा आने पर थोड़ा रुकना सिखाएं
बच्चे को समझाएं कि गुस्सा आते ही तुरंत प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं है। उसे कुछ देर रुकने, अपनी जगह से थोड़ा दूर जाने या शांत बैठने के लिए प्रोत्साहित करें।
आप बच्चे के साथ मिलकर एक छोटा-सा नियम बना सकते हैं कि जब गुस्सा बहुत ज्यादा आए तो वह कुछ सेकंड के लिए रुककर सोचेगा। इस तरीके का अभ्यास उस समय भी कराएं जब बच्चा शांत हो। इससे गुस्से के समय उसे यह तरीका याद रखने में आसानी होगी।
3. आसान ब्रीदिंग एक्सरसाइज कराएं
गहरी और धीमी सांस लेना बच्चे को शांत होने में मदद करने वाली आसान तकनीक हो सकती है। इसे बच्चों के लिए मजेदार बनाने के लिए किसी खेल की तरह सिखाया जा सकता है।
उदाहरण के लिए बच्चे से कहें कि वह कल्पना करे कि वह किसी फूल की खुशबू सूंघ रहा है और फिर धीरे-धीरे मोमबत्ती बुझा रहा है। इसी तरह कुछ बार धीरे सांस लेने और छोड़ने का अभ्यास कराया जा सकता है।
बच्चे को यह तकनीक केवल गुस्से के समय ही न सिखाएं। रोजाना शांत समय में इसका अभ्यास कराने से वह जरूरत पड़ने पर इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकता है।
4. गुस्सा निकालने का सुरक्षित तरीका बताएं
बच्चे को यह समझना जरूरी है कि गुस्सा व्यक्त करना गलत नहीं है, लेकिन किसी को चोट पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है।
गुस्से के समय बच्चा ड्रॉइंग कर सकता है, अपनी बात लिख सकता है, किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात कर सकता है या कुछ देर शांत जगह पर बैठ सकता है। छोटे बच्चों के लिए तकिया पकड़कर बैठना या उसे दबाना भी एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
साथ ही, बच्चे को स्पष्ट रूप से बताएं कि मारना, काटना, लात मारना या किसी पर चीजें फेंकना सही व्यवहार नहीं है।
5. सलाह देने से पहले बच्चे की बात सुनें
कई बार बच्चा इसलिए और ज्यादा परेशान हो जाता है क्योंकि उसे लगता है कि कोई उसकी बात समझ ही नहीं रहा। ऐसे समय में तुरंत भाषण देने या गलती बताने के बजाय पहले उसकी बात सुनें।
आप कह सकते हैं, “मैं समझ सकता हूं कि तुम परेशान हो” या “तुम्हें यह बात बिल्कुल अच्छी नहीं लगी, है ना?”
इससे बच्चे को महसूस हो सकता है कि उसकी भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। जब बच्चा थोड़ा शांत हो जाए, तब उससे बात करें कि गुस्सा क्यों आया और अगली बार ऐसी स्थिति में वह क्या कर सकता है।
6. खुद भी शांत रहें
बच्चे के गुस्से के जवाब में माता-पिता का जोर से चिल्लाना स्थिति को और बिगाड़ सकता है। इसलिए कोशिश करें कि आपका व्यवहार शांत रहे।
अगर बच्चा चिल्ला रहा है, तो आप भी अपनी आवाज ऊंची करने के बजाय धीमी आवाज में बात करें। जरूरत हो तो कुछ पल रुककर खुद को शांत करें और फिर बच्चे से बातचीत करें।
बच्चे अक्सर अपने आसपास के बड़ों के व्यवहार से भी सीखते हैं। इसलिए माता-पिता खुद गुस्से को कैसे संभालते हैं, इसका असर बच्चे पर भी पड़ सकता है।
7. गुस्से के ट्रिगर को पहचानें
बच्चे का गुस्सा अचानक दिखाई दे सकता है, लेकिन उसके पीछे कोई वजह या पैटर्न हो सकता है। ध्यान दें कि बच्चा किन परिस्थितियों में बार-बार नाराज होता है।
क्या वह भूख लगने पर ज्यादा चिड़चिड़ा होता है? क्या स्क्रीन टाइम खत्म होने पर गुस्सा करता है? क्या भाई-बहन के साथ किसी खास स्थिति में झगड़ा बढ़ जाता है?
इन ट्रिगर्स को पहचानने के बाद माता-पिता पहले से बच्चे को तैयार कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, स्क्रीन टाइम खत्म होने से कुछ मिनट पहले उसे बता दें कि अब गेम या वीडियो बंद करने का समय आने वाला है।
8. शांत होने के बाद समाधान पर बात करें
गुस्से के बीच बच्चे को लंबी समझाइश देने की कोशिश करने के बजाय पहले उसे शांत होने का मौका दें। जब बच्चा सामान्य स्थिति में आ जाए, तब उसके साथ बैठकर घटना पर बात करें।
पूछें कि उसे किस बात पर गुस्सा आया, उस समय उसने क्या किया और अगली बार ऐसी स्थिति आने पर वह क्या अलग कर सकता है। आप उसे दो-तीन विकल्प भी दे सकते हैं।
मसलन, अगर भाई-बहन ने उसका खिलौना ले लिया तो अगली बार वह मारने के बजाय अपनी बात कह सकता है, किसी बड़े की मदद ले सकता है या कुछ देर इंतजार कर सकता है।
बच्चे को गुस्सा दबाना नहीं, संभालना सिखाएं
बच्चे का गुस्सा पूरी तरह खत्म करना लक्ष्य नहीं होना चाहिए। गुस्सा इंसानी भावनाओं का सामान्य हिस्सा है। असली उद्देश्य बच्चे को यह सिखाना है कि वह अपनी तेज भावनाओं को सुरक्षित और उचित तरीके से कैसे संभाल सकता है।
माता-पिता को बच्चे की भावना को स्वीकार करने और गलत व्यवहार के बीच अंतर समझना चाहिए। यानी बच्चे से यह कहा जा सकता है कि “तुम्हें गुस्सा आने का पूरा हक है, लेकिन किसी को मारना सही नहीं है।”
अगर बच्चा लगातार बहुत ज्यादा गुस्सा करता है, खुद को या दूसरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है या उसका व्यवहार रोजमर्रा की जिंदगी में गंभीर परेशानी पैदा कर रहा है, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित हो सकता है।


