ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश: भारत और जापान के बीच शिक्षा, रिसर्च और रोजगार के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने जापान के यामानाशी प्रान्त से आए 200 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यामानाशी प्रान्त के गवर्नर श्री कोतारो नागासाकी ने किया। उनके साथ प्रीफेक्चुरल सरकार और जापानी बिजनेस कम्युनिटी के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
इस दौरान गलगोटियास यूनिवर्सिटी, यामानाशी प्रीफेक्चुरल गवर्नमेंट और यामानाशी यूनिवर्सिटी के बीच महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का फोकस टैलेंट मोबिलिटी, वैश्विक करियर अवसर, ग्रीन हाइड्रोजन रिसर्च, स्टूडेंट एक्सचेंज और संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
गवर्नर कोतारो नागासाकी ने की गलगोटियास यूनिवर्सिटी की सराहना
यामानाशी के गवर्नर कोतारो नागासाकी ने यूनिवर्सिटी के कैंपस और यहां उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने छात्रों और शिक्षण व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा, “यदि यह 30 वर्ष पहले होता, तो मैं गलगोटियास यूनिवर्सिटी में अवश्य प्रवेश लेता।”
गवर्नर के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल का यूनिवर्सिटी के AI ब्लॉक में पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। अतिथियों को औपचारिक उत्तरीय (शॉल) भी भेंट किए गए।
कार्यक्रम में यामानाशी प्रान्त के उप-गवर्नर श्री जुनिची इशिदेरा, यामानाशी सरकार के एडवाइज़र श्री नीरेंद्र उपाध्याय, उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन कैबिनेट मंत्री श्री जयवीर सिंह, जेवर के विधायक श्री धीरेंद्र सिंह और YEIDA के CEO श्री राकेश कुमार सिंह, IAS समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। गलगोटियास यूनिवर्सिटी की ओर से CEO डॉ. ध्रुव गलगोटिया और कुलाधिपति श्री सुनील गलगोटिया ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
टैलेंट मोबिलिटी और ग्रीन हाइड्रोजन पर हुआ समझौता
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यामानाशी प्रीफेक्चुरल गवर्नमेंट के साथ MoU और यामानाशी यूनिवर्सिटी के साथ LoI पर हस्ताक्षर रहा। इन समझौतों के जरिए दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक चलने वाले सहयोग का रोडमैप तैयार किया गया है।
समझौते के तहत भारतीय छात्रों और जापानी संस्थानों के बीच स्किलिंग, रोजगार और टैलेंट मोबिलिटी के नए अवसर विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन एनर्जी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संयुक्त रिसर्च को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान Japan External Trade Organization (JETRO) की ओर से एक प्रेजेंटेशन भी दिया गया। इसमें भारत और यामानाशी के बीच इंडस्ट्री पार्टनरशिप, टैलेंट डेवलपमेंट और रोजगार के अवसरों को मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
ग्रीन हाइड्रोजन पर रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा
प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान कैंपस में कई फोकस्ड ग्रुप डिस्कशन आयोजित किए गए। इनमें से एक विशेष समूह ने गलगोटियास यूनिवर्सिटी के फैकल्टी सदस्यों के साथ ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर विस्तृत चर्चा की।
चर्चा में क्लीन एनर्जी, लो-कार्बन मोबिलिटी, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और संयुक्त रिसर्च से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। इसके अलावा छात्रों और शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
ग्रीन हाइड्रोजन को भारत और जापान दोनों के लिए भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में इस तरह का अकादमिक और रिसर्च सहयोग दोनों देशों के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है।
नर्सिंग और हेल्थकेयर क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाएं
जापानी प्रतिनिधिमंडल के एक अन्य समूह ने गलगोटियास यूनिवर्सिटी के Digital Nursing Skills and Simulation Centre का दौरा किया। यहां प्रतिनिधियों ने नर्सिंग और हेल्थ साइंसेज से जुड़े एक विशेष सत्र में हिस्सा लिया।
इस दौरान हेल्थकेयर एजुकेशन, स्किल डेवलपमेंट और भविष्य की वर्कफोर्स तैयार करने के विषय पर चर्चा हुई। भारत और जापान के बीच नर्सिंग तथा हेल्थकेयर क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को भी इस दौरे के अहम पहलुओं में शामिल किया गया।
जापानी प्रतिनिधियों ने यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ भी संवाद किया। बातचीत में कैंपस लाइफ, भारतीय और जापानी संस्कृति तथा छात्रों के करियर लक्ष्यों को लेकर विचार साझा किए गए।
AI, ड्रोन और सेमीकंडक्टर लैब्स का भी किया दौरा
प्रतिनिधिमंडल ने गलगोटियास यूनिवर्सिटी के विभिन्न Centres of Excellence और एडवांस्ड लैब्स का निरीक्षण भी किया। इनमें iOS Development Centre, L&T Centre of Excellence के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर से संबंधित सुविधाएं शामिल थीं।
जापानी प्रतिनिधियों ने यूनिवर्सिटी के इंडस्ट्री-इंटीग्रेटेड टीचिंग और रिसर्च मॉडल को समझा। इससे दोनों देशों के बीच तकनीकी शिक्षा, इंडस्ट्री एक्सपोजर और रिसर्च सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने क्या कहा?
गलगोटियास यूनिवर्सिटी के CEO डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने इस साझेदारी को भारत-जापान सहयोग के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यामानाशी प्रान्त के साथ शुरू हुई यह लॉन्ग-टर्म पार्टनरशिप छात्रों को ग्लोबल करियर के वास्तविक अवसर देने में मदद करेगी।
उन्होंने कहा कि समझौतों के जरिए यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं को जापान के साथ मिलकर क्लीन एनर्जी से जुड़ी चुनौतियों पर काम करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने 200 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का यूनिवर्सिटी परिसर में स्वागत करना गर्व का विषय बताया।
सुनील गलगोटिया ने भारत-जापान मित्रता को बताया ज्ञान और अनुशासन पर आधारित
गलगोटियास यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति श्री सुनील गलगोटिया ने भारत और जापान के संबंधों को ज्ञान, अनुशासन और पारस्परिक सम्मान जैसे साझा मूल्यों पर आधारित बताया।
उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत-जापान संबंधों को मजबूत करने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच और उत्तर प्रदेश के विकास एवं कायाकल्प में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व से प्रेरित है।
उन्होंने कहा कि गलगोटियास यूनिवर्सिटी दोनों देशों के बीच एक सेतु की भूमिका निभा रही है और यह साझेदारी आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसरों के दरवाजे खोल सकती है।
स्थानीय प्रतिभाओं को मिलेंगे ग्लोबल अवसर
जेवर के विधायक श्री धीरेंद्र सिंह ने भी भारत-जापान सहयोग के बढ़ते दायरे का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि गलगोटियास यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान स्थानीय प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय अवसरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इस दौरे के बाद दोनों पक्षों ने आने वाले महीनों में समझौतों को जमीन पर उतारने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके तहत स्टूडेंट एक्सचेंज, फैकल्टी कोलैबोरेशन, स्किलिंग, टैलेंट मोबिलिटी और जॉइंट रिसर्च से जुड़े ठोस कार्यक्रम विकसित किए जाने की योजना है।
इस तरह यामानाशी प्रान्त का यह दौरा केवल एक औपचारिक प्रतिनिधिमंडल यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और जापान के बीच शिक्षा, तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और रोजगार के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।


