नई दिल्ली। कभी ATM से पैसे निकालने का मतलब ही डेबिट कार्ड होता था। बैंक खाता खुलते ही ग्राहक को डेबिट कार्ड दिया जाता था और नकदी निकालने से लेकर दुकानों पर भुगतान तक इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता था। लेकिन अब भारत की भुगतान व्यवस्था तेजी से बदल रही है। मोबाइल फोन और UPI ने लोगों के लेनदेन करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। इसका असर डेबिट कार्ड के उपयोग पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
HighLights
- पिछले दो सालों में डेबिट कार्ड लेनदेन में 44% की गिरावट दर्ज की गई।
- UPI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने भुगतान की आदतों को बदल दिया है।
- कार्डलेस कैश निकासी और क्रेडिट कार्ड के बढ़ते उपयोग ने भी डेबिट कार्ड की जरूरत कम की।
- विशेषज्ञों का मानना है कि ATM पूरी तरह खत्म नहीं होंगे, लेकिन उनकी भूमिका बदल सकती है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में डेबिट कार्ड लेनदेन में लगभग 44 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। यह बदलाव केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम में आ रहे बड़े परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है।
2 सालों में कितनी घट गई डेबिट कार्ड की उपयोगिता?
RBI की वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, डेबिट कार्ड लेनदेन की संख्या लगातार कम हो रही है।
| वित्त वर्ष | डेबिट कार्ड लेनदेन (लाख में) |
|---|---|
| 2023-24 | 22,860 |
| 2024-25 | 16,120 |
| 2025-26 | 12,802 |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि केवल दो वर्षों में डेबिट कार्ड लेनदेन में करीब 44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। यह बदलाव उस समय आया है जब देश में डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।
UPI ने बदल दी पूरी तस्वीर
डेबिट कार्ड के उपयोग में गिरावट की सबसे बड़ी वजह UPI को माना जा रहा है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI ने भुगतान को इतना आसान बना दिया है कि अब अधिकांश लोग छोटी-बड़ी खरीदारी के लिए कार्ड निकालने की जरूरत महसूस नहीं करते।
RBI के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 में UPI लेनदेन 13,11,295 लाख था, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,16,169 लाख तक पहुंच गया। यानी लगभग 84 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
आज किराना दुकान, सब्जी मंडी, पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट, टैक्सी, ऑनलाइन शॉपिंग और बिजली-पानी के बिलों तक के भुगतान के लिए लोग UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं। QR कोड स्कैन कर कुछ सेकंड में भुगतान पूरा हो जाता है। यही वजह है कि कार्ड स्वाइप करने या POS मशीन पर निर्भरता कम होती जा रही है।
कार्डलेस कैश निकासी भी बनी बड़ी वजह
बैंकिंग सेक्टर में तेजी से बढ़ रही तकनीकी सुविधाओं ने भी डेबिट कार्ड की जरूरत को कम किया है। कई बैंक अब मोबाइल बैंकिंग ऐप और UPI आधारित कार्डलेस कैश निकासी की सुविधा दे रहे हैं।
इस सुविधा के जरिए ग्राहक बिना डेबिट कार्ड ATM से नकदी निकाल सकते हैं। उपयोगकर्ता को केवल मोबाइल नंबर, UPI ऐप या बैंकिंग एप्लिकेशन की मदद से नकदी निकालने की अनुमति मिल जाती है।
इस बदलाव के कारण लोगों को हर समय फिजिकल डेबिट कार्ड साथ रखने की आवश्यकता कम होती जा रही है।
क्या ATM का दौर खत्म होने वाला है?
डेबिट कार्ड के उपयोग में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि ATM जल्द ही खत्म हो जाएंगे। भारत अभी भी एक ऐसा देश है जहां बड़ी आबादी नकदी पर निर्भर है।
ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे कस्बों और कई पारंपरिक व्यवसायों में नकद लेनदेन का महत्व बना हुआ है। इसके अलावा बुजुर्ग नागरिकों और ऐसे लोगों के लिए ATM अभी भी महत्वपूर्ण हैं जो डिजिटल भुगतान का सीमित उपयोग करते हैं।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में ATM की भूमिका बदल सकती है। पहले जहां ATM का मुख्य उद्देश्य डेबिट कार्ड के माध्यम से नकदी उपलब्ध कराना था, वहीं भविष्य में कार्डलेस निकासी और डिजिटल बैंकिंग सेवाएं अधिक महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
क्रेडिट कार्ड का बढ़ता प्रभाव
एक और बड़ा बदलाव क्रेडिट कार्ड के बढ़ते उपयोग के रूप में देखा जा रहा है। जहां डेबिट कार्ड सीधे बैंक खाते से जुड़े होते हैं, वहीं क्रेडिट कार्ड ग्राहकों को अतिरिक्त सुविधाएं प्रदान करते हैं।
रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक ऑफर, EMI विकल्प और यात्रा लाभ जैसी सुविधाओं ने क्रेडिट कार्ड को अधिक आकर्षक बना दिया है। RBI और उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में क्रेडिट कार्ड लेनदेन की संख्या में सालाना आधार पर लगभग 23 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
युवा उपभोक्ताओं के बीच क्रेडिट कार्ड और UPI के संयोजन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे डेबिट कार्ड की भूमिका और सीमित होती दिखाई दे रही है।
भारत तेजी से बढ़ रहा है Cashless Economy की ओर
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान बाजारों में शामिल हो चुका है। सरकार की डिजिटल इंडिया पहल, UPI की सफलता, स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार ने डिजिटल भुगतान को आम लोगों तक पहुंचा दिया है।
आज लाखों छोटे व्यापारी भी QR कोड आधारित भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। इससे नकदी और कार्ड दोनों पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो रही है। डिजिटल लेनदेन की यह वृद्धि देश को कैशलेस इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ा रही है।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भुगतान व्यवस्था में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
- कार्डलेस कैश निकासी का उपयोग बढ़ सकता है।
- UPI Lite और UPI आधारित नई सेवाएं लोकप्रिय हो सकती हैं।
- Credit Card on UPI का दायरा और बढ़ सकता है।
- फिजिकल डेबिट कार्ड की जरूरत पहले से कम हो सकती है।
- ATM नेटवर्क की भूमिका नकदी वितरण से आगे बढ़कर डिजिटल सेवाओं तक पहुंच सकती है।
निष्कर्ष
RBI के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि भारत में डेबिट कार्ड का उपयोग तेजी से घट रहा है और इसकी सबसे बड़ी वजह UPI का बढ़ता प्रभाव है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि ATM पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। भारत में नकदी की जरूरत अभी भी बनी हुई है, लेकिन भुगतान के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। आने वाले वर्षों में डेबिट कार्ड की भूमिका सीमित हो सकती है, जबकि UPI, कार्डलेस बैंकिंग और डिजिटल भुगतान व्यवस्था भारतीय वित्तीय प्रणाली का मुख्य आधार बन सकती है।


