असम विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार मतदाताओं का उत्साह रिकॉर्ड स्तर पर देखने को मिला। गुरुवार को हुए मतदान में लगभग 84.42% वोटिंग दर्ज की गई, जो आगे और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इस ऐतिहासिक मतदान पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे “सामान्य नहीं, बल्कि ऐतिहासिक” बताया है।
सरमा के अनुसार, यह चुनाव केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें असम की जनता ने अपनी संस्कृति, पहचान और जमीन की रक्षा के लिए एकजुट होकर मतदान किया है।
रिकॉर्ड मतदान ने बनाया नया इतिहास
असम में इस बार 126 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान कराया गया। शाम 5 बजे तक जो आंकड़े सामने आए, उनके मुताबिक 84.42% वोटिंग दर्ज की गई, जो 2021 के चुनावों से अधिक है।
2021 में जहां करीब 82% मतदान हुआ था, वहीं इस बार यह आंकड़ा उसे पार करता नजर आ रहा है। कई मतदान केंद्रों पर तो 95% से ज्यादा मतदान की खबरें भी सामने आईं।
यह दर्शाता है कि राज्य के लोगों में लोकतंत्र के प्रति जागरूकता और भागीदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ी है।
“जनता के चेहरों पर दिख रहा परिणाम” — सरमा
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस चुनाव का परिणाम पहले ही लोगों के चेहरों पर दिखाई दे रहा है।
उन्होंने लिखा कि लोगों के चेहरे पर जो उम्मीद, गर्व और खुशी नजर आ रही है, वही इस चुनाव का असली परिणाम है।
उनका यह बयान यह संकेत देता है कि बीजेपी इस चुनाव में अपनी स्थिति को लेकर काफी आश्वस्त नजर आ रही है।
चुनाव नहीं, आंदोलन: सरमा का बड़ा दावा
सरमा ने कहा कि बीजेपी ने इस चुनाव को केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे एक आंदोलन में बदलने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन असम की सभ्यता, संस्कृति और भूमि की रक्षा के लिए था।
उनके अनुसार, इस बार लोग जाति और भाषा से ऊपर उठकर एकजुट हुए और उन्होंने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अपनी पहचान और संस्कृति की रक्षा करना चाहते हैं।
घुसपैठ और जनसांख्यिकी पर फोकस
अपने बयान में सरमा ने अवैध घुसपैठ और जनसांख्यिकी (demographic) बदलाव के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया।
उन्होंने कहा कि असम की जनता ने इस बार स्पष्ट रूप से यह तय किया है कि वे अपनी जमीन और पहचान की रक्षा करेंगे।
उनके अनुसार, यह चुनाव केवल सरकार बदलने का नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य को सुरक्षित करने का भी है।
विपक्ष के साथ सीधी टक्कर
इस चुनाव में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं और मुख्य मुकाबला बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के बीच माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस बार मुकाबला कड़ा है, लेकिन रिकॉर्ड मतदान ने सभी पार्टियों के लिए समीकरण बदल दिए हैं।
उच्च मतदान प्रतिशत आमतौर पर बदलाव का संकेत माना जाता है, लेकिन कई बार यह मौजूदा सरकार के पक्ष में भी जाता है।
“असम झुकेगा नहीं” — मजबूत संदेश
हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने बयान में कहा,
“असम न झुकेगा, असम लड़ेगा, असम जिंदा रहेगा।”
उनका यह बयान भावनात्मक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह न केवल उनके समर्थकों को उत्साहित करता है, बल्कि चुनावी माहौल को भी और अधिक गर्माता है।
क्या कहता है यह मतदान?
इतिहास में इतने बड़े स्तर पर मतदान होना यह दर्शाता है कि जनता अपने भविष्य को लेकर गंभीर है। यह लोकतंत्र की मजबूती का भी संकेत है।
उच्च मतदान का मतलब यह भी है कि लोग बदलाव चाहते हैं या फिर मौजूदा सरकार को मजबूत समर्थन देना चाहते हैं।
अंतिम परिणाम चाहे जो भी हो, यह स्पष्ट है कि असम की जनता ने इस बार बढ़-चढ़कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लिया है।
निष्कर्ष
असम विधानसभा चुनाव 2026 में हुआ रिकॉर्ड मतदान न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।
हिमंत बिस्वा सरमा का इसे “ऐतिहासिक” बताना इस बात को दर्शाता है कि यह चुनाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अहम है।
अब सबकी नजरें चुनाव परिणाम पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि जनता का यह उत्साह किस दिशा में जाता है। लेकिन एक बात साफ है—असम की जनता ने इस बार लोकतंत्र को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
Also Read:


