Asian Market Today: बुधवार को एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है। दक्षिण कोरिया का बाजार सबसे मजबूत नजर आया, जहां Kospi में इंट्राडे कारोबार के दौरान करीब 3.94 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। जापान के शेयर बाजार में भी हल्की बढ़त रही, जबकि ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 दबाव में कारोबार करता नजर आया। निवेशकों की नजर अब अमेरिका के जुलाई CPI आंकड़ों, फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संकेतों और पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम पर है।
एशियाई बाजारों की चाल ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो गई है जब पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी शेयर बाजारों में लगातार दूसरे दिन कमजोरी देखने को मिली। अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने वैश्विक बाजारों के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है।
एशियाई बाजारों में कैसा रहा कारोबार?
दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार बुधवार के सत्र में एशिया के प्रमुख बाजारों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला रहा। Kospi इंडेक्स में इंट्राडे कारोबार के दौरान 3.94 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। इससे पहले भी इंडेक्स में करीब 1.5 फीसदी की बढ़त देखी गई थी। बाजार में यह तेजी निवेशकों की खरीदारी और क्षेत्रीय बाजारों में सकारात्मक संकेतों के बीच देखने को मिली।
जापान में सार्वजनिक अवकाश के बाद शेयर बाजार खुले और यहां भी कारोबार में हल्की मजबूती दिखाई दी। Nikkei 225 में करीब 0.43 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई, जबकि व्यापक Topix इंडेक्स करीब 0.34 फीसदी ऊपर रहा। हालांकि, जापानी बाजार में तेजी सीमित रही और निवेशकों ने बड़े आर्थिक संकेतकों से पहले सतर्क रुख अपनाया।
दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिली। S&P/ASX 200 इंडेक्स करीब 0.52 फीसदी नीचे कारोबार करता नजर आया। इस तरह एशियाई बाजारों की तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं रही और अलग-अलग देशों में निवेशकों का रुख अलग दिखाई दिया।
US Market में लगातार दूसरे दिन गिरावट
एशियाई बाजारों की शुरुआत से पहले अमेरिकी शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी दिन दबाव देखने को मिला। मंगलवार, 11 अगस्त को अमेरिकी बेंचमार्क इंडेक्स शुरुआती मजबूती को बरकरार नहीं रख सके। टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।
Dow Jones Industrial Average दिन के ऊपरी स्तर से 430 अंकों से ज्यादा नीचे फिसला और अंत में करीब 180 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं, S&P 500 में करीब 0.3 फीसदी और Nasdaq Composite में लगभग 0.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिकी बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी दिखाई दी थी, लेकिन सत्र आगे बढ़ने के साथ निवेशकों ने मुनाफावसूली और जोखिम कम करने का रास्ता अपनाया। खासकर टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी का असर Nasdaq पर ज्यादा दिखाई दिया।
अब अमेरिकी बाजार के लिए अगला बड़ा ट्रिगर जुलाई का Consumer Price Index यानी CPI डेटा है। महंगाई के ये आंकड़े इस बात के संकेत दे सकते हैं कि आने वाले महीनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर किस दिशा में आगे बढ़ सकता है।
US CPI डेटा पर निवेशकों की नजर
अमेरिका में महंगाई के आंकड़े इस समय वैश्विक बाजारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतकों में शामिल हैं। CPI डेटा से यह पता चलेगा कि जुलाई में उपभोक्ता महंगाई की स्थिति कैसी रही। अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में नरमी की गुंजाइश सीमित हो सकती है।
इसके उलट, महंगाई के आंकड़े अगर उम्मीद से कमजोर रहते हैं तो बाजार में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत हो सकती है। इसका असर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर, सोना और दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ सकता है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए भी अमेरिकी CPI डेटा अहम है, क्योंकि अमेरिकी बाजारों में बड़े उतार-चढ़ाव का असर अगले सत्र में घरेलू बाजार के सेंटीमेंट पर देखने को मिल सकता है।
Crude Oil में तेजी जारी
कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को भी तेजी जारी रही। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेशकों की नजर तेल की सप्लाई पर बनी हुई है।
कारोबार के दौरान Brent crude futures करीब 72 सेंट यानी 0.81 फीसदी बढ़कर 89.63 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, US West Texas Intermediate यानी WTI crude करीब 71 सेंट या 0.85 फीसदी बढ़कर 83.91 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा।
पिछले कारोबारी सत्र में भी दोनों प्रमुख क्रूड बेंचमार्क में 1 डॉलर से ज्यादा की तेजी देखने को मिली थी। इससे दोनों की कीमतें 31 जुलाई के बाद के सबसे ऊंचे क्लोजिंग स्तरों के आसपास पहुंच गई थीं।
सोमवार को भी तेल की कीमतों में करीब 5 फीसदी की तेज तेजी देखने को मिली थी। इसके पीछे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर उम्मीदों में कमी को एक प्रमुख कारण माना गया।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतों के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। मंगलवार को अमेरिका और यमन में ईरान समर्थित हूथी गुटों की ओर से समुद्री मार्गों में जहाजों पर अलग-अलग हमलों की जानकारी सामने आई।
इन घटनाओं ने दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर चिंता बढ़ाई है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
ईरान की ओर से भी होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कड़ा रुख सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेज़ाई ने कहा कि जब तक अमेरिका युद्ध समाप्त करने के लिए तेहरान की शर्तों को स्वीकार नहीं करता, तब तक जलडमरूमध्य को बंद रखने की स्थिति बनी रह सकती है।
यदि इन समुद्री मार्गों से तेल की आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ सकता है और लंबे समय तक तेजी रहने की स्थिति में महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है।
Gold Price Today: सोना स्थिर, चांदी में मामूली तेजी
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में बुधवार को ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं दिखा। निवेशक एक तरफ पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी CPI डेटा का इंतजार कर रहे हैं।
मंगलवार को करीब 0.5 फीसदी की गिरावट के बाद शुरुआती कारोबार में सोना करीब 4,370 डॉलर प्रति औंस के आसपास रहा। इसके बाद Spot Gold करीब 0.1 फीसदी गिरकर 4,367.56 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया।
वहीं, चांदी में मामूली तेजी रही और Spot Silver करीब 0.1 फीसदी बढ़कर 64.72 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
सोने के लिए फिलहाल दो बड़े फैक्टर महत्वपूर्ण हैं। पहला, पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और दूसरा, अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिजर्व का रुख। अगर वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग को सपोर्ट मिल सकता है।
भारतीय शेयर बाजार पर क्या होगा असर?
एशियाई बाजारों का मिला-जुला रुख भारतीय शेयर बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण है। Kospi में तेज तेजी जहां सकारात्मक संकेत दे रही है, वहीं अमेरिकी बाजारों की कमजोरी और क्रूड की बढ़ती कीमतें बाजार पर दबाव डालने वाले फैक्टर हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। क्रूड महंगा होने पर भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है और रुपये पर भी दबाव देखने को मिल सकता है। लंबे समय तक तेल की कीमतों में तेजी रहने पर महंगाई और कंपनियों की लागत पर भी असर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, अगर अमेरिकी CPI डेटा उम्मीद के मुताबिक नरम रहता है और फेड की ओर से ब्याज दरों में नरमी की संभावना बढ़ती है, तो इससे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश को सपोर्ट मिल सकता है।
आज बाजार के लिए ये फैक्टर रहेंगे अहम
बुधवार के कारोबारी सत्र में वैश्विक निवेशकों की नजर मुख्य रूप से कुछ बड़े संकेतकों पर रहेगी। इनमें अमेरिकी CPI डेटा सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव, क्रूड ऑयल की कीमत, डॉलर की चाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
एशियाई बाजारों में अभी तस्वीर मिली-जुली है। दक्षिण कोरिया का Kospi मजबूत बढ़त के साथ सबसे आगे है, जापान में हल्की मजबूती है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में कमजोरी दिखाई दे रही है। ऐसे में भारतीय बाजार में भी शुरुआत के बाद ग्लोबल संकेतों के आधार पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
फिलहाल वैश्विक बाजार एक साथ कई जोखिमों को पचा रहे हैं। अमेरिका में महंगाई, फेड की ब्याज दर नीति, पश्चिम एशिया का तनाव और कच्चे तेल की कीमतें बाजार के लिए प्रमुख ट्रिगर बने हुए हैं। ऐसे माहौल में किसी एक संकेत के आधार पर बाजार की दिशा तय करना जोखिम भरा हो सकता है।
खासकर भारतीय निवेशकों को अमेरिकी CPI के आंकड़ों के बाद डॉलर और क्रूड की चाल पर भी नजर रखनी चाहिए। अगर तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बाजारों में कमजोरी बनी रहती है, तो इसका असर घरेलू इक्विटी मार्केट के सेंटीमेंट पर पड़ सकता है। वहीं, महंगाई के आंकड़े उम्मीद से बेहतर आने पर वैश्विक बाजारों को कुछ राहत मिल सकती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए बाजार संबंधी तथ्य और विश्लेषण उपलब्ध बाजार आंकड़ों पर आधारित हैं। यह निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार और कमोडिटी बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


