Asian Market: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने सोमवार को वैश्विक वित्तीय बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला और ब्रेंट क्रूड ऑयल पहली बार एक महीने से अधिक समय बाद 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। तेल की कीमतों में इस तेजी ने महंगाई को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं, जिससे एशियाई शेयर बाजारों में दबाव देखने को मिल रहा है। दूसरी ओर, निवेशकों की नजर इस सप्ताह आने वाले Alphabet, Tesla और Intel जैसी दिग्गज टेक कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी बनी हुई है, जो AI सेक्टर में निवेशकों के भरोसे की परीक्षा माने जा रहे हैं।
पश्चिम एशिया संकट से तेल बाजार में उबाल
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना ने लगातार नौवें दिन ईरान से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई की है, जबकि जवाबी हमलों ने पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
इस तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 3% उछलकर 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई, जिससे वैश्विक स्तर पर ईंधन महंगा होने की आशंका बढ़ गई है। यदि यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है तो दुनिया भर में परिवहन लागत, उत्पादन लागत और महंगाई पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
महंगाई बढ़ने की चिंता, फेड पर बढ़ा दबाव
हालांकि पिछले सप्ताह अमेरिका के उपभोक्ता महंगाई (CPI) के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे थे, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार की धारणा बदल दी है।
फ्यूचर्स मार्केट के संकेत बताते हैं कि निवेशक अब मान रहे हैं कि साल के अंत तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में लगभग 29 बेसिस पॉइंट की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकता है। वहीं सितंबर तक दरें बढ़ने की संभावना करीब 60% मानी जा रही है।
जेपी मॉर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रूस कासमैन का मानना है कि यदि महंगाई का दबाव बढ़ता है तो फेड उम्मीद से पहले सख्त रुख अपना सकता है। हाल के दिनों में फेड अधिकारियों के बयान भी इसी दिशा की ओर संकेत कर रहे हैं।
30-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड फिर 5% के पार
ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं के बीच अमेरिकी बॉन्ड बाजार में भी हलचल तेज हो गई है। 30-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड दोबारा 5.0% के अहम स्तर से ऊपर पहुंच गई है।
आमतौर पर बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों का रुझान शेयर बाजार से हटकर फिक्स्ड इनकम निवेश की ओर बढ़ जाता है, जिससे इक्विटी बाजारों पर दबाव बन सकता है।
एशियाई बाजारों का हाल
सोमवार सुबह एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला।
- गिफ्ट निफ्टी 56 अंक (0.23%) की गिरावट के साथ 24,292.50 पर कारोबार करता दिखा।
- जापान का निक्केई सार्वजनिक अवकाश के कारण बंद रहा। पिछले सप्ताह इसमें 6.4% की गिरावट दर्ज की गई थी।
- दक्षिण कोरिया का कोस्पी दबाव में रहा और इसमें तेज कमजोरी देखने को मिली।
- सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स लगभग सपाट कारोबार करता दिखा।
- हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स करीब 570 अंक की मजबूती के साथ 25,133 के आसपास कारोबार करता नजर आया।
- ताइवान शेयर बाजार हल्की गिरावट में रहा।
- शंघाई कंपोजिट में लगभग 1.5% से अधिक की मजबूती दर्ज की गई।
विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों का फोकस फिलहाल भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी मौद्रिक नीति पर बना रहेगा।
AI कंपनियों के नतीजों पर रहेगी बाजार की नजर
इस सप्ताह अमेरिकी शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर टेक कंपनियों के तिमाही नतीजे होंगे। Alphabet, Tesla और Intel जैसी कंपनियों के रिजल्ट यह संकेत देंगे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में हो रहा भारी निवेश कंपनियों की कमाई में कितना योगदान दे रहा है।
यदि इन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो वैश्विक टेक शेयरों को सहारा मिल सकता है। वहीं कमजोर नतीजे आने पर निवेशकों की चिंता और बढ़ सकती है।
भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?
वैश्विक संकेतों को देखते हुए भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत दबाव में हो सकती है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय हैं क्योंकि इससे महंगाई, चालू खाता घाटा और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके अलावा यदि अमेरिकी फेड ब्याज दरों पर सख्त रुख अपनाता है तो विदेशी निवेशकों (FII) का रुझान उभरते बाजारों से विकसित बाजारों की ओर बढ़ सकता है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।
डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से तैयार किया गया है। NewsJagran निवेश की सलाह नहीं देता। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


