नई दिल्ली: अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। द्वीपों में स्थापित किए जाने वाले पहले 55 मेगावाट LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) आधारित बिजली संयंत्र को अंतिम पर्यावरणीय मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। अंडमान-निकोबार प्रदूषण नियंत्रण समिति ने परियोजना से जुड़ी पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) और पर्यावरण प्रबंधन योजना (EMP) रिपोर्ट पर आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं।
यह परियोजना न केवल द्वीपों की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि डीजल आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता कम कर पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
होप टाउन में बनेगा 55 मेगावाट का LNG बिजली संयंत्र
इस परियोजना के तहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), श्री विजयापुरम (पूर्व में पोर्ट ब्लेयर) के होप टाउन में एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड (NVVN) द्वारा विकसित किए जा रहे 55 मेगावाट के LNG आधारित बिजली संयंत्र को री-गैसीफाइड LNG की आपूर्ति करेगा।
NVVN, एनटीपीसी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है और इसे इस परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है।
2022 में मिल चुकी है प्रारंभिक पर्यावरणीय मंजूरी
इस बिजली परियोजना को सितंबर 2022 में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) से प्रारंभिक पर्यावरणीय मंजूरी मिल चुकी थी। अब LNG परिवहन और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे के लिए अंतिम पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
वर्तमान समय में अंडमान-निकोबार की अधिकांश बिजली जरूरतें डीजल आधारित बिजलीघरों से पूरी होती हैं, जिससे बिजली उत्पादन महंगा होने के साथ-साथ प्रदूषण भी अधिक होता है।
केंद्र सरकार की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति का हिस्सा
यह परियोजना केंद्र सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा है, जिसके तहत द्वीपीय क्षेत्रों में डीजल आधारित बिजली उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर स्वच्छ ईंधन आधारित ऊर्जा व्यवस्था विकसित की जा रही है।
शुरुआत में इस संयंत्र को ड्यूल फ्यूल (डीजल और LNG) पर संचालित करने की योजना थी, लेकिन बाद में सरकार ने इसे पूरी तरह LNG आधारित संयंत्र में बदलने का फैसला लिया।
IOCL विकसित करेगा LNG सप्लाई इंफ्रास्ट्रक्चर
परियोजना के तहत बिजली मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद IOCL को LNG आपूर्ति से जुड़ा पूरा बुनियादी ढांचा विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
योजना के अनुसार—
- छोटे LNG टैंकर समुद्री मार्ग से अंडमान-निकोबार पहुंचेंगे।
- LNG को Floating Storage and Regasification Unit (FSRU) में उतारा जाएगा।
- इसके बाद गैस को पाइपलाइन के जरिए सीधे बिजली संयंत्र तक पहुंचाया जाएगा।
- संयंत्र में री-गैसीफाइड LNG से बिजली का उत्पादन किया जाएगा।
केंद्रीय स्तर पर होगा पर्यावरणीय मूल्यांकन
यह परियोजना पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना 2006 के तहत श्रेणी ‘A’ में आती है, क्योंकि इसमें तेल एवं गैस पाइपलाइन और LNG अवसंरचना शामिल है। इसलिए इसका अंतिम मूल्यांकन पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) द्वारा किया जाएगा।
IOCL ने ‘परिवेश’ पोर्टल के माध्यम से आवश्यक Terms of Reference (ToR) प्राप्त किए थे। इसके बाद मार्च से मई 2023 के दौरान विस्तृत पर्यावरणीय अध्ययन किए गए।
EIA और EMP रिपोर्ट का किया गया संशोधन
IOCL ने चेन्नई की इंडोमर कोस्टल हाइड्रोलिक्स प्राइवेट लिमिटेड को संशोधित EIA और EMP रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी। वहीं, अन्ना विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) की मैपिंग और रिपोर्ट का भी संशोधन किया गया।
नई रिपोर्ट में पहले से उपलब्ध आंकड़ों के साथ हाल में जुटाए गए पर्यावरणीय डेटा को शामिल किया गया है, ताकि परियोजना का वैज्ञानिक और व्यापक मूल्यांकन किया जा सके।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को मिलेगा फायदा
अंडमान-निकोबार प्रशासन का मानना है कि इस परियोजना से द्वीपों में डीजल जनरेटर सेटों पर निर्भरता काफी कम होगी। LNG के उपयोग से बिजली उत्पादन अधिक किफायती होगा और पर्यावरणीय लाभ भी मिलेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार LNG अपनाने से—
- धुंध पैदा करने वाले प्रदूषकों में 60 से 90 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
- ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी संभव है।
- बिजली उत्पादन की लागत घटेगी।
- ऊर्जा आपूर्ति अधिक विश्वसनीय और टिकाऊ बनेगी।
द्वीपों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
अंडमान-निकोबार जैसे दूरस्थ द्वीपों में ईंधन की आपूर्ति एक बड़ी चुनौती रहती है। ऐसे में LNG आधारित बिजली संयंत्र न केवल ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाएगा बल्कि भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा आधारित विकास की नई संभावनाएं भी खोलेगा। यह परियोजना भारत के द्वीपीय क्षेत्रों को हरित ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।


