नई दिल्ली। दुनिया में रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Minerals) को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है। इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इन खनिजों की रणनीतिक अहमियत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। इसी बीच भारत के तीन बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी, अनिल अग्रवाल और गौतम अदाणी ने देश में रेयर अर्थ मिनरल्स के प्रसंस्करण (Processing) और संबंधित सुविधाओं के विकास में दिलचस्पी दिखाई है।
Highlights
- अंबानी, अदाणी और अनिल अग्रवाल की कंपनियों ने रेयर अर्थ प्रोसेसिंग में रुचि दिखाई।
- भारत चीन पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू रेयर अर्थ इकोसिस्टम विकसित करना चाहता है।
- आंध्र प्रदेश में 211 मिलियन मीट्रिक टन बीच सैंड मिनरल संसाधन मौजूद हैं।
- सरकार रेयर अर्थ कॉरिडोर और मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर काम कर रही है।
- EV, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस सेक्टर को इससे बड़ा फायदा मिल सकता है।
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वैश्विक रेयर अर्थ सप्लाई चेन पर लंबे समय से चीन का दबदबा बना हुआ है। भारत अब अपने विशाल खनिज भंडार का इस्तेमाल कर घरेलू स्तर पर खनन, प्रसंस्करण और मैग्नेट निर्माण क्षमता विकसित करना चाहता है ताकि भविष्य में रणनीतिक क्षेत्रों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम की जा सके।
चीन के दबदबे को चुनौती देने की तैयारी
रेयर अर्थ मिनरल्स ऐसे विशेष तत्व होते हैं जिनका इस्तेमाल आधुनिक तकनीक आधारित उत्पादों में किया जाता है। इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर, विंड टर्बाइन, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, मिसाइल सिस्टम और कई रक्षा उपकरणों में इनका उपयोग होता है।
वर्तमान में रेयर अर्थ खनिजों की प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन में चीन का महत्वपूर्ण स्थान है। कई देशों की इंडस्ट्री इन खनिजों की आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भर है। हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिमों ने कई देशों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने के लिए मजबूर किया है।
भारत भी इसी दिशा में तेजी से काम कर रहा है। केंद्र सरकार रेयर अर्थ खनन और प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत स्तर पर कई कदम उठा रही है। ऐसे में देश के बड़े उद्योग समूहों की दिलचस्पी इस क्षेत्र के लिए बड़ी खबर मानी जा रही है।
लगभग 10 कंपनियों ने दिखाई रुचि
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में चीन पर निर्भरता कम करना चाहती है। इसी उद्देश्य से कई निजी कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज, अनिल अग्रवाल की वेदांता और गौतम अदाणी समूह उन करीब 10 कंपनियों में शामिल हैं जिन्होंने दक्षिण भारत में रेयर अर्थ से जुड़ी सुविधाएं स्थापित करने में रुचि दिखाई है।
इन कंपनियों की भागीदारी से इस सेक्टर में बड़े निवेश की संभावना बढ़ गई है। साथ ही अत्याधुनिक प्रोसेसिंग तकनीक और वैश्विक स्तर की उत्पादन क्षमता विकसित करने में भी मदद मिल सकती है।
आंध्र प्रदेश बन सकता है नया केंद्र
आंध्र प्रदेश इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 16 तटीय क्षेत्रों की पहचान की गई है जहां करीब 211 मिलियन मीट्रिक टन बीच सैंड मिनरल संसाधन मौजूद हैं। इन संसाधनों में रेयर अर्थ तत्व भी शामिल हैं।
जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) के आंकड़ों के मुताबिक भारत में कुल 482.6 मिलियन टन रेयर अर्थ अयस्क संसाधन मौजूद हैं। हालांकि अब तक देश में इन खनिजों के बड़े पैमाने पर औद्योगिक प्रसंस्करण की पर्याप्त क्षमता विकसित नहीं हो पाई है।
राज्य सरकार का लक्ष्य अगले दस वर्षों में रेयर अर्थ और टाइटेनियम सेक्टर में करीब 500 अरब रुपये का निवेश आकर्षित करना है। इसके लिए विशेष औद्योगिक सुविधाएं विकसित करने की तैयारी की जा रही है।
रेयर अर्थ कॉरिडोर में शामिल है आंध्र प्रदेश
केंद्र सरकार ने हाल के बजट में जिन राज्यों को रेयर अर्थ कॉरिडोर विकसित करने के लिए चुना था, उनमें आंध्र प्रदेश भी शामिल है। इस कॉरिडोर का उद्देश्य केवल खनन तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और मैग्नेट निर्माण जैसी पूरी सप्लाई चेन विकसित करना शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत केवल खनन पर ध्यान देता है और प्रोसेसिंग क्षमता विकसित नहीं करता, तो उसे अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पाएगा। इसलिए सरकार पूरी वैल्यू चेन को देश में विकसित करने की रणनीति पर काम कर रही है।
73 अरब रुपये की योजना से मिलेगा बढ़ावा
भारत सरकार ने नवंबर में रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 73 अरब रुपये के कार्यक्रम को मंजूरी दी थी। इस पहल का उद्देश्य घरेलू उद्योगों को आवश्यक कच्चा माल और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना है।
रेयर अर्थ तत्वों से बनने वाले परमानेंट मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, रोबोटिक्स, रक्षा उपकरणों और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। आने वाले वर्षों में इनकी मांग तेजी से बढ़ने का अनुमान है।
भारत के पास पर्याप्त खनिज भंडार तो है, लेकिन उच्च शुद्धता स्तर पर प्रोसेसिंग करने वाली इंडस्ट्रियल-स्केल सुविधाओं की कमी है। नई परियोजनाओं के जरिए इस कमी को दूर करने की कोशिश की जा रही है।
निवेशकों को मिल सकते हैं विशेष प्रोत्साहन
सूत्रों के अनुसार आंध्र प्रदेश सरकार अपनी प्रस्तावित रेयर अर्थ कॉरिडोर नीति को जल्द कैबिनेट से मंजूरी दिलाने की तैयारी कर रही है। मंजूरी मिलने के बाद राज्य सरकार रेयर अर्थ प्रोसेसिंग सुविधाओं के लिए टेंडर जारी कर सकती है।
इसके अलावा 10 अरब रुपये या उससे अधिक निवेश वाले प्रोजेक्ट्स को विशेष प्रोत्साहन देने की योजना भी बनाई जा रही है। इनमें कैपिटल-लिंक्ड इंसेंटिव और अन्य वित्तीय लाभ शामिल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी नीतियां प्रभावी ढंग से लागू होती हैं तो भारत वैश्विक रेयर अर्थ सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
EV और डिफेंस सेक्टर को होगा फायदा
रेयर अर्थ मिनरल्स का सबसे बड़ा उपयोग इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री में होता है। EV मोटर में इस्तेमाल होने वाले परमानेंट मैग्नेट इन तत्वों के बिना नहीं बन सकते। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले रडार, मिसाइल और उन्नत संचार उपकरणों में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
भारत सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर जोर दे रही है। ऐसे में घरेलू रेयर अर्थ प्रोसेसिंग क्षमता विकसित होने से इन दोनों क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिल सकता है।
NewsJagran Analysis
अंबानी, अदाणी और अनिल अग्रवाल जैसे उद्योगपतियों की रुचि इस बात का संकेत है कि भारत में रेयर अर्थ सेक्टर अब रणनीतिक और व्यावसायिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बन चुका है। चीन के प्रभुत्व वाले इस बाजार में प्रवेश आसान नहीं होगा क्योंकि प्रोसेसिंग तकनीक, निवेश और पर्यावरणीय मानकों की बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं।
फिर भी भारत के विशाल भंडार, सरकार की नीतिगत सहायता और निजी क्षेत्र के निवेश को देखते हुए आने वाले वर्षों में देश इस क्षेत्र में मजबूत स्थिति बना सकता है। यदि खनन से लेकर मैग्नेट निर्माण तक पूरी वैल्यू चेन भारत में विकसित हो जाती है तो यह न केवल चीन पर निर्भरता कम करेगा बल्कि देश को वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण केंद्र भी बना सकता है।
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