शिवपुरी (मध्य प्रदेश), 25 अप्रैल 2026।
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के बदरवास ब्लॉक में शुरू हुआ नया गारमेंट स्किल्स और प्रोडक्शन सेंटर सिर्फ एक प्रशिक्षण परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का एक बड़ा प्रयोग बनकर उभर रहा है। Adani Foundation द्वारा स्थापित यह केंद्र महिलाओं को आधुनिक मशीनों पर प्रशिक्षण देने के साथ-साथ उन्हें बाजार से जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि उनकी आय स्थायी रूप से बढ़ सके।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब देशभर में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और “लखपति दीदी” जैसे लक्ष्यों को जमीन पर उतारने पर जोर दिया जा रहा है। शिवपुरी जैसे अर्ध-ग्रामीण इलाके में इस तरह का उत्पादन केंद्र स्थापित होना स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के साथ-साथ सामाजिक बदलाव का संकेत भी देता है।
क्यों खास है यह पहल?
ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं सिलाई-कढ़ाई का काम करती हैं, लेकिन यह गतिविधि अक्सर घर तक सीमित रहती है और इससे नियमित आय नहीं बन पाती। इस सेंटर के जरिए पहली बार इन महिलाओं को संगठित ढांचे में काम करने, बड़े ऑर्डर लेने और बाजार से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा।
फाउंडेशन के CEO अभिषेक लख्ताकिया ने ANI से बातचीत में बताया कि इस केंद्र से लगभग 1,500 महिलाओं को जोड़ा जाएगा। यहां उन्हें आधुनिक मशीनों पर ट्रेनिंग दी जाएगी और उनके बनाए उत्पादों के लिए बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा। उनके अनुसार, अगर डिजाइन, गुणवत्ता और मार्केट लिंकिंग बेहतर होती है, तो महिलाओं की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
इस परियोजना का सबसे बड़ा प्रभाव स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के रूप में सामने आ सकता है। प्रोजेक्ट मैनेजर अरविंद भार्गव के अनुसार, बदरवास ब्लॉक में पहले से ही करीब 3,500 महिलाएं सिलाई और जैकेट बनाने के काम से जुड़ी हैं।
नए केंद्र में 600 मशीनों के जरिए 1,200 से 1,400 महिलाओं को सीधे रोजगार मिलने की संभावना है। यह सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय संरचना में बदलाव का संकेत है।
अगर हर महिला की मासिक आय में स्थिर बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर भी दिखेगा। यही कारण है कि इस परियोजना को “लखपति दीदी” जैसे राष्ट्रीय विजन से जोड़कर देखा जा रहा है।
‘लैब टू मार्केट’ मॉडल की झलक
इस सेंटर की खास बात यह है कि यह सिर्फ प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन और मार्केटिंग को भी साथ लेकर चलता है।
आमतौर पर स्किल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में ट्रेनिंग के बाद महिलाओं को बाजार से जुड़ने में दिक्कत आती है। लेकिन यहां फाउंडेशन खुद मार्केट लिंकिंग की जिम्मेदारी ले रहा है। इसका मतलब है कि महिलाएं सिर्फ सिलाई नहीं सीखेंगी, बल्कि अपने उत्पाद बेचकर आय भी अर्जित करेंगी।
यह मॉडल अगर सफल होता है, तो इसे अन्य जिलों और राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।
प्रशिक्षण से रोजगार तक का सफर
केंद्र में ट्रेनर के रूप में काम कर रहीं अनीशा दीक्षित बताती हैं कि अब तक 113 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और इस साल 1,300 और महिलाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।
उनके अनुसार, ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के पास कौशल तो है, लेकिन प्लेटफॉर्म नहीं। यह सेंटर उसी गैप को भरने का काम कर रहा है।
यहां आने वाली ज्यादातर महिलाएं पहले घर पर सीमित स्तर पर काम करती थीं। अब उन्हें बड़े पैमाने पर उत्पादन, डिजाइन सुधार और गुणवत्ता नियंत्रण जैसी चीजें सिखाई जा रही हैं, जिससे वे बेहतर अवसरों के लिए तैयार हो सकें।
CSR से सामाजिक बदलाव तक
Adani Foundation की यह पहल कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के उस मॉडल को दर्शाती है, जिसमें सिर्फ दान नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विकास पर ध्यान दिया जाता है।
फाउंडेशन वर्तमान में देश के 22 राज्यों के 7,071 गांवों में काम कर रहा है और करीब 9.6 मिलियन लोगों के जीवन को प्रभावित कर चुका है।
शिवपुरी का यह सेंटर उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जा रही है।
‘लखपति दीदी’ विजन से कनेक्शन
प्रधानमंत्री के ‘लखपति दीदी’ विजन का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की आय को सालाना एक लाख रुपये से अधिक तक ले जाना है।
शिवपुरी का यह गारमेंट सेंटर इसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा सकता है। अगर यहां प्रशिक्षित महिलाएं नियमित रूप से काम कर पाती हैं और बाजार से जुड़ती हैं, तो उनकी आय में स्थायी वृद्धि संभव है।
इस तरह की पहलें दिखाती हैं कि कैसे स्किल डेवलपमेंट, उत्पादन और मार्केटिंग को जोड़कर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि यह पहल सकारात्मक है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं।
सबसे बड़ी चुनौती है—लंबे समय तक निरंतर काम और ऑर्डर सुनिश्चित करना। अगर बाजार से पर्याप्त मांग नहीं मिली, तो उत्पादन केंद्र की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाएगा।
इसके अलावा, महिलाओं को लगातार प्रशिक्षण और स्किल अपग्रेड की जरूरत होगी, ताकि वे बदलते फैशन और बाजार की मांग के अनुसार खुद को ढाल सकें।
क्यों अहम है यह मॉडल?
भारत जैसे देश में, जहां बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, वहां इस तरह के स्किल और प्रोडक्शन सेंटर रोजगार सृजन का नया रास्ता खोल सकते हैं।
शिवपुरी का यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि अगर सही तरीके से योजना बनाई जाए, तो छोटे शहर और गांव भी मैन्युफैक्चरिंग और उत्पादन के केंद्र बन सकते हैं।
यह सिर्फ महिलाओं की आय बढ़ाने की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसे आर्थिक मॉडल की शुरुआत है, जिसमें स्थानीय संसाधनों और कौशल का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
निष्कर्ष
शिवपुरी में शुरू हुआ यह गारमेंट स्किल्स और प्रोडक्शन सेंटर आने वाले समय में ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
अगर यह मॉडल सफल होता है, तो यह न केवल हजारों महिलाओं को रोजगार देगा, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की पहल को प्रेरित करेगा।
अंततः, यह पहल इस बात को साबित करती है कि सही रणनीति और संसाधनों के साथ ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकती हैं।
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