Success Story of Surekha Rajkumar: कर्नाटक की सुरेखा राजकुमार ने करीब 20 साल तक शिक्षा के क्षेत्र में काम किया और 11 स्कूलों का सफल नेटवर्क खड़ा किया। लेकिन कोरोना महामारी के बाद जब शिक्षा कारोबार प्रभावित हुआ तो उन्होंने ऐसा फैसला लिया, जिसका हर कोई विरोध कर रहा था। उन्होंने पुश्तैनी बंजर जमीन पर ऑर्गेनिक मोरिंगा (सहजन) की खेती शुरू की। शुरुआती असफलताओं और भारी नुकसान के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। आज उनकी खेती से इस साल अब तक करीब 70 लाख रुपये की कमाई हो चुकी है और उनका लक्ष्य सालाना 2 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल करना है।
Highlights
- 20 साल तक टीचर और स्कूल संचालक रहीं सुरेखा राजकुमार
- कोरोना के बाद एजुकेशन सेक्टर छोड़ खेती में रखा कदम
- 21 एकड़ बंजर जमीन पर शुरू की ऑर्गेनिक मोरिंगा की खेती
- शुरुआत में लाखों रुपये का नुकसान, लेकिन नहीं मानी हार
- इस साल अब तक 70 लाख रुपये की कमाई
- अब 2 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर का लक्ष्य
शिक्षा से खेती तक का अनोखा सफर

कर्नाटक के कलबुर्गी जिले की रहने वाली सुरेखा राजकुमार ने वर्ष 2005 में बी.एड. की पढ़ाई पूरी की। उस समय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। हालात ऐसे थे कि घर का किराया देना भी मुश्किल हो गया था। मजबूरी में सुरेखा ने मात्र 700 रुपये महीने और उनकी बहन ने 600 रुपये महीने की नौकरी से अपने करियर की शुरुआत की।
स्कूल में काम के दौरान उन्हें कई तरह की मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसी अनुभव ने उन्हें अपना स्कूल शुरू करने की प्रेरणा दी। परिवार के घर के दस्तावेज गिरवी रखकर उन्होंने 2007 में पहला स्कूल खोला।
कड़ी मेहनत के दम पर वर्ष 2014 तक उन्होंने ‘बसवा रत्न स्कूल्स’ के नाम से 11 ग्रामीण स्कूलों का नेटवर्क तैयार कर लिया। इस कारोबार से उन्हें हर साल लगभग 30 से 40 लाख रुपये की आय होने लगी।
कोरोना महामारी ने बदल दी जिंदगी
कोविड-19 महामारी ने शिक्षा क्षेत्र को गहरा झटका दिया। ग्रामीण इलाकों में ऑनलाइन पढ़ाई और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की बढ़ती लोकप्रियता के कारण छात्रों की संख्या तेजी से घटने लगी।
जिस व्यवसाय से कभी लाखों रुपये की कमाई होती थी, उसकी आय घटकर सिर्फ 5 लाख रुपये सालाना रह गई। ऐसे समय में सुरेखा ने अपने करियर को नई दिशा देने का फैसला लिया और पुश्तैनी जमीन पर खेती करने का निर्णय लिया।
हर कोई फैसले के खिलाफ था

साल 2024 में जब सुरेखा ने खेती शुरू करने का फैसला लिया तो परिवार और रिश्तेदारों ने इसका विरोध किया। उनका मानना था कि बिना अनुभव खेती करना जोखिम भरा कदम होगा।
21 एकड़ की जमीन बंजर थी और पानी की भी भारी कमी थी। खेती शुरू करने के लिए उन्होंने बैंक से 10 लाख रुपये का लोन लिया। इसके अलावा रिश्तेदारों और अन्य स्रोतों से कर्ज लेकर कुल 40 से 45 लाख रुपये का निवेश किया।
उन्होंने खेत में बोरवेल, 63 HP ट्रांसफॉर्मर, ड्रिप इरिगेशन सिस्टम और निगरानी के लिए छोटा मकान बनवाया। इसके बाद ODC-3 किस्म के लगभग 15,000 मोरिंगा पौधे लगाए।
गलत सलाह से हुआ भारी नुकसान
खेती का अनुभव नहीं होने के कारण सुरेखा ने शुरुआत में कई कृषि विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों की सलाह मानी। रासायनिक खाद और यूरिया के इस्तेमाल की वजह से फसल को भारी नुकसान हुआ।
पहले साल बाजार में कीमतें भी कम थीं और उन्हें केवल 3 लाख रुपये की आय हुई। दूसरे साल यूरिया के अधिक इस्तेमाल से हरे-भरे पौधे सूखने लगे, जिससे उन्हें दोबारा बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।
खुद की रिसर्च से बदली किस्मत

लगातार असफलताओं के बाद सुरेखा ने हार मानने की बजाय खेती को गहराई से समझना शुरू किया। उन्होंने पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती अपनाने का फैसला किया।
उन्होंने खेत में गोबर की खाद, जीवामृत और नीमास्त्र जैसे जैविक उपायों का उपयोग शुरू किया। साथ ही परागण बढ़ाने के लिए मधुमक्खियों के पांच बक्से लगाए।
इन बदलावों का असर जल्द दिखाई दिया। फसल की उत्पादकता लगभग 30 प्रतिशत बढ़ गई और उनके खेत में करीब 7,000 स्वस्थ मोरिंगा के पेड़ तैयार हो गए।
सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया उत्पाद
सुरेखा की सफलता की कहानी सोशल मीडिया और कृषि से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चर्चा का विषय बनी। इसके बाद उन्हें बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ा।
आज वह अपने उत्पाद सीधे भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ लंदन, वॉशिंगटन, नेपाल और ओमान के खरीदारों तक पहुंचा रही हैं। उनके ग्राहक बीज कंपनियां, तेल निर्माता और अन्य कृषि उद्यमी भी हैं।
इसके अलावा वह व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से अन्य किसानों को भी ऑर्गेनिक मोरिंगा खेती की जानकारी और मार्गदर्शन देती हैं।
कमाई के कई स्रोत बनाए

सुरेखा ने केवल सहजन बेचने तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने आय के कई अलग-अलग स्रोत विकसित किए हैं।
- 300 क्विंटल ताजा सहजन बेचकर करीब 30 लाख रुपये की कमाई
- प्रीमियम ODC-3 बीजों की बिक्री से लगभग 40 लाख रुपये की आय
- मोरिंगा लीफ पाउडर की बिक्री भी शुरू, जिसकी कीमत करीब 1,000 रुपये प्रति किलो है
इन सभी स्रोतों से उन्हें इस वर्ष अब तक करीब 70 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है।
अब 2 करोड़ रुपये टर्नओवर का लक्ष्य
सुरेखा ने इस सीजन में 4,000 क्विंटल सहजन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही खेत की सीमाओं पर काजू के पेड़ लगाए जा रहे हैं।
वह शकरकंद की इंटरक्रॉपिंग के साथ गेंदा और सूरजमुखी जैसी फसलों की खेती भी कर रही हैं। उनका उद्देश्य खेती को बहुआयामी बनाना और आय के नए स्रोत तैयार करना है।
इन योजनाओं के सफल होने पर उन्हें उम्मीद है कि उनका कृषि व्यवसाय जल्द ही 2 करोड़ रुपये से अधिक का सालाना टर्नओवर हासिल कर लेगा।
सुरेखा राजकुमार की सफलता से क्या सीख मिलती है?
सुरेखा राजकुमार की कहानी बताती है कि मुश्किल हालात और शुरुआती असफलताएं सफलता की राह में स्थायी बाधा नहीं होतीं। सही रिसर्च, नई तकनीक अपनाने की इच्छा और लगातार मेहनत के दम पर पारंपरिक खेती को भी लाभदायक व्यवसाय में बदला जा सकता है। उनका सफर उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो करियर बदलने या कृषि क्षेत्र में नया अवसर तलाशने की सोच रहे हैं।

