Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में 2 सितंबर की सुबह निवेशकों को बड़ा झटका लगा। कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा फिसल गया, जबकि निफ्टी भी 23,800 के स्तर के नीचे पहुंच गया। बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिल रही है और खासतौर पर ऑटो शेयरों पर भारी दबाव बना हुआ है।
बाजार में गिरावट का असर सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में भी करीब 1-1 फीसदी की कमजोरी दिखाई दे रही है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और India VIX में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
शुरुआती कारोबार में Sensex 800 अंक से ज्यादा टूटा
2 सितंबर को सुबह 9:38 बजे सेंसेक्स 581.62 अंक यानी 0.76 फीसदी गिरकर 76,362.66 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 207.65 अंक यानी 0.86 फीसदी टूटकर 23,848.15 पर आ गया।
इंट्रा-डे कारोबार में स्थिति और खराब हुई। सेंसेक्स एक समय 808.56 अंक गिरकर 76,135.72 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 269 अंक टूटकर 23,786.80 के स्तर तक फिसल गया।
यानी निफ्टी के लिए 23,800 का अहम स्तर भी शुरुआती कारोबार में टूट गया।
बाजार में क्यों मचा हाहाकार? 5 बड़ी वजहें
1. अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव शामिल है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से ग्लोबल सप्लाई चेन और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
ऐसे माहौल में निवेशक आमतौर पर जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बनाने लगते हैं। इसका सीधा असर शेयर बाजार पर दिखाई देता है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।
भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल का आयात करता है। इसलिए क्रूड महंगा होने पर देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
यही वजह है कि कच्चे तेल में तेज उछाल को भारतीय शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
3. अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड में उछाल
अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड करीब 4.80 फीसदी तक पहुंच गई है। अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका बढ़ने से ग्लोबल इक्विटी मार्केट पर दबाव बढ़ा है।
रॉयटर्स के मुताबिक, फेड फंड्स फ्यूचर्स के आंकड़े अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली बैठक में 25 बेसिस पॉइंट की दर बढ़ोतरी की करीब 67 फीसदी संभावना की ओर संकेत कर रहे हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों के लिए डॉलर आधारित सुरक्षित निवेश अधिक आकर्षक हो सकता है। इससे उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी के बाहर जाने की आशंका बढ़ती है और भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बन सकता है।
4. India VIX में बढ़ी बाजार की घबराहट
बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर India VIX पर भी दिखाई दे रहा है। India VIX को शेयर बाजार की अपेक्षित वोलैटिलिटी यानी उतार-चढ़ाव का प्रमुख संकेतक माना जाता है।
फिलहाल India VIX करीब 3.39 फीसदी बढ़कर 11.88 के स्तर पर पहुंच गया है।
VIX में तेजी का मतलब आमतौर पर यह होता है कि निकट अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका है। ऐसे में निवेशक ज्यादा सतर्क हो जाते हैं और बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
5. ऑटो सेक्टर में भारी बिकवाली
बाजार की गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव ऑटो सेक्टर से देखने को मिल रहा है। शुरुआती कारोबार में निफ्टी ऑटो इंडेक्स 2 फीसदी से ज्यादा कमजोर हुआ।
ऑटो शेयरों में बिकवाली ने पूरे बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है। इसके अलावा निफ्टी आईटी और निफ्टी मेटल में भी 1-1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई।
वहीं निफ्टी रियल्टी करीब डेढ़ फीसदी से अधिक नीचे है। निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में भी करीब आधे-आधे फीसदी की कमजोरी दिखाई दे रही है।
सभी प्रमुख सेक्टरों पर बिकवाली का दबाव
2 सितंबर की शुरुआती ट्रेडिंग में प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में व्यापक कमजोरी देखने को मिली। ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा, जबकि आईटी, मेटल और रियल्टी शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा गिरावट किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल संकेतों और बढ़ते जोखिम के कारण बाजार के व्यापक सेंटीमेंट पर असर पड़ा है।
आगे निवेशकों को किन स्तरों पर रखनी चाहिए नजर?
निफ्टी का 23,800 का स्तर अब बाजार के लिए अहम बन गया है। शुरुआती कारोबार में इसके नीचे फिसलने से कमजोरी का संकेत मिला है। ऐसे में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि इंडेक्स इस स्तर के ऊपर वापस आता है या इसके नीचे अपनी पकड़ मजबूत करता है।
दूसरी तरफ, अगर बाजार में रिकवरी आती है तो सबसे पहले यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निफ्टी खोए हुए स्तरों को कितनी मजबूती से वापस हासिल करता है।
फिलहाल ग्लोबल मार्केट संकेत, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और पश्चिम एशिया का तनाव भारतीय बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख फैक्टर बने हुए हैं।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
मौजूदा माहौल में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इसलिए केवल शुरुआती गिरावट देखकर जल्दबाजी में कोई निवेश फैसला लेने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और बाजार की व्यापक स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी स्टॉक या अन्य वित्तीय उत्पाद में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या योग्य एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। NewsJagran.in किसी निवेश या खरीद-बिक्री की सलाह नहीं देता है।


