US-Iran War Update: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दक्षिणी ईरान से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, होर्मोजगान प्रांत में एक रिहायशी मकान अमेरिकी मिसाइल हमले के बाद मलबे और छर्रों की चपेट में आ गया। बताया जा रहा है कि जिस घर के आसपास यह घटना हुई, वहां शादी का समारोह चल रहा था। हादसे में एक बच्चे समेत कम से कम 5 लोगों की मौत हुई है, जबकि 50 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।
इसी बीच ईरान ने भी अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। तेहरान की ओर से जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य हितों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने की खबर है।
शादी के जश्न के बीच मचा मातम
ईरानी रेड क्रिसेंट के अनुसार, यह घटना दक्षिणी ईरान के होर्मोजगान प्रांत के सिरिक काउंटी स्थित कुहेस्तक शहर में हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस रिहायशी इलाके में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का असर पहुंचा, वहां एक शादी का कार्यक्रम चल रहा था।
बताया गया है कि मिसाइल हमले के बाद गिरे मलबे और छर्रों ने आसपास के मकानों को नुकसान पहुंचाया। इसी दौरान शादी समारोह में मौजूद लोग भी इसकी चपेट में आ गए।
शुरुआती जानकारी में चार लोगों की मौत की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर 5 बताई गई। इनमें एक बच्चा भी शामिल है। वहीं, 50 से ज्यादा लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि, इस घटना से जुड़े मृतकों और घायलों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
मलबे में तब्दील हुआ मकान, सामने आया वीडियो
हमले के बाद का कथित वीडियो ईरानी सरकारी मीडिया की ओर से जारी किया गया है। फुटेज में घटनास्थल पर मलबा बिखरा दिखाई देता है और मकान को काफी नुकसान पहुंचा हुआ नजर आता है।
वीडियो में घटनास्थल के आसपास लोगों की आवाजें और अफरा-तफरी भी सुनाई देती है। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और यह स्पष्ट नहीं है कि फुटेज कब और किस स्थान पर रिकॉर्ड किया गया।
ईरान ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में किया पलटवार
दक्षिणी ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी हमले किए। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी से जुड़े ठिकानों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया।
ये हमले ऐसे समय में हुए जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को अमेरिका पर हमला करने की स्थिति में गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी।
ईरान की ओर से किए गए हमलों का उद्देश्य अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उससे जुड़े सैन्य हितों को निशाना बनाना बताया गया है। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान और अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने संबंधी ईरानी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जॉर्डन ने 10 ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने का दावा किया
जॉर्डन से भी ईरानी मिसाइल हमले को लेकर जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, जॉर्डन ने करीब 10 ईरानी मिसाइलों को हवा में ही रोकने या इंटरसेप्ट करने का दावा किया है।
दूसरी ओर, ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े दावों में जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने की बात कही गई है।
ईरानी मीडिया में जिस ठिकाने का जिक्र किया गया है, उसकी पहचान कैंप टिटिन के रूप में की गई है। ईरानी न्यूज एजेंसी तस्नीम की रिपोर्ट में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने और भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका का दावा- IRGC से जुड़े ठिकानों को बनाया गया निशाना
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर वॉशिंगटन की ओर से कहा गया है कि ईरान में किए गए हमलों में ईरानी सैन्य ढांचे और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
अमेरिका ने इन सैन्य कार्रवाइयों को हालिया घटनाक्रमों से जोड़ते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों और अमेरिकी सैनिकों से जुड़े कथित खतरों के जवाब में सैन्य कार्रवाई की गई।
हालांकि, दोनों देशों की ओर से किए जा रहे दावों के बीच स्वतंत्र सत्यापन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि युद्ध के दौरान सामने आने वाली शुरुआती सूचनाएं कई बार अधूरी या विवादित हो सकती हैं।
होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी दुनिया की नजर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और ईरानी मिसाइल हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है।
खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद महत्वपूर्ण है। यह दुनिया के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है और यहां किसी भी लंबे सैन्य तनाव से कच्चे तेल की सप्लाई, समुद्री व्यापार और वैश्विक बाजार प्रभावित हो सकते हैं।
अगर सैन्य टकराव और बढ़ता है तथा जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर भी पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए ऐसी स्थिति खास तौर पर महत्वपूर्ण होगी।
खाड़ी देशों में बढ़ा सुरक्षा का खतरा
ईरान की ओर से जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरों ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
इन देशों में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी लंबे समय से रही है और ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ने पर ये ठिकाने संभावित जवाबी कार्रवाई के केंद्र बन सकते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई कितनी दूर तक जाती है और क्या क्षेत्रीय शक्तियां इस टकराव को सीमित करने में सफल होती हैं।
Disclaimer: इस रिपोर्ट में शामिल युद्ध, हमले, मौत और सैन्य नुकसान से जुड़े कुछ दावे संबंधित पक्षों या मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। जहां स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, वहां इसे स्पष्ट रूप से बताया गया है। युद्ध जैसी तेजी से बदलती परिस्थितियों में आंकड़े और दावे बदल सकते हैं।


