Crude Oil Price: मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। 1 सितंबर को ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। क्रूड महंगा होने से पेंट, एयरलाइन और टायर कंपनियों के शेयरों पर दबाव दिखा, जबकि तेल उत्पादन करने वाली ONGC और Oil India के शेयरों में तेजी रही।
Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल रहा है। मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के बीच 1 सितंबर को ब्रेंट क्रूड की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक टैंकर पर हमले की खबरों ने बाजार की चिंता बढ़ाई है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने की चेतावनी भी सामने आई थी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के लिए बेहद अहम तेल मार्ग है। ऐसे में यहां किसी तरह का व्यवधान पैदा होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।
क्रूड की कीमतों में इस उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार में भी नजर आया। खासकर उन कंपनियों के शेयरों में दबाव दिखा, जिनके कारोबार में कच्चे तेल या उससे जुड़े उत्पादों की लागत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं, कच्चे तेल का उत्पादन करने वाली अपस्ट्रीम कंपनियों को इस तेजी से फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
क्रूड महंगा होने से किन कंपनियों पर पड़ता है असर?
कच्चा तेल महंगा होने का असर अलग-अलग सेक्टर पर अलग तरीके से पड़ता है। पेंट कंपनियों के लिए कई पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है। एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF एक बड़ी लागत है, जिसकी कीमतों पर क्रूड का असर पड़ता है।
इसी तरह टायर बनाने वाली कंपनियों के लिए भी सिंथेटिक रबर और दूसरे पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमत महत्वपूर्ण होती है। यदि क्रूड लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
Asian Paints का शेयर 3.42% गिरा
क्रूड की तेजी का असर पेंट कंपनियों के शेयरों पर साफ नजर आया। Asian Paints का शेयर 1 सितंबर को 3.42 फीसदी गिरकर 2,562 रुपये पर बंद हुआ।
इसी तरह Berger Paints में भी कमजोरी रही और इसका शेयर 1.28 फीसदी गिरकर 491.40 रुपये पर बंद हुआ। JSW Dulux का शेयर करीब 0.46 फीसदी नीचे रहा, जबकि Shalimar Paints में 1.05 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
पेंट कंपनियों के लिए क्रूड की कीमत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इनके कई इनपुट पेट्रोकेमिकल उत्पादों से जुड़े होते हैं। कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहने पर इनपुट कॉस्ट बढ़ने की आशंका रहती है।
IndiGo के शेयर में 3.77% की गिरावट
एयरलाइन कंपनियों के शेयर भी क्रूड की तेजी से प्रभावित हुए। InterGlobe Aviation (IndiGo) का शेयर 3.77 फीसदी गिरकर 5,036 रुपये पर बंद हुआ।
वहीं SpiceJet का शेयर 3.20 फीसदी की गिरावट के साथ 9.99 रुपये पर बंद हुआ।
एयरलाइंस की ऑपरेशनल लागत में ATF का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर ATF की कीमतों पर भी दबाव आ सकता है। इससे एयरलाइंस का ईंधन खर्च बढ़ सकता है और यदि कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत को किराए में पूरी तरह ट्रांसफर नहीं कर पातीं, तो उनके मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
टायर कंपनियों के शेयर भी दबाव में
क्रूड की तेजी का असर टायर कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला। JK Tyre का शेयर 1.41 फीसदी गिरकर 373 रुपये पर बंद हुआ।
Goodyear India में 0.65 फीसदी की गिरावट रही और शेयर 738 रुपये पर बंद हुआ। वहीं CEAT का शेयर मामूली 0.058 फीसदी फिसलकर करीब 3,417 रुपये पर बंद हुआ।
टायर इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले कुछ प्रमुख कच्चे माल की कीमतें कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल कीमतों से प्रभावित होती हैं। इसलिए क्रूड में लगातार तेजी रहने की स्थिति में कंपनियों की लागत बढ़ने का जोखिम रहता है।
IOCL, BPCL और HPCL में भी कमजोरी
कच्चे तेल की तेजी के बीच ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली।
Indian Oil Corporation (IOC) का शेयर 1.89 फीसदी गिरकर 136.50 रुपये पर बंद हुआ। BPCL में 2.38 फीसदी की गिरावट रही, जबकि HPCL का शेयर 0.93 फीसदी फिसलकर 362.35 रुपये पर बंद हुआ।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर महंगे क्रूड का असर कई कारकों पर निर्भर करता है। कच्चे तेल की खरीद लागत बढ़ने के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल की कीमतों, रिफाइनिंग मार्जिन और मार्केटिंग मार्जिन का भी असर पड़ता है। इसलिए केवल क्रूड की कीमत देखकर इन कंपनियों के प्रदर्शन का अनुमान लगाना उचित नहीं है।
ONGC और Oil India के शेयरों में तेजी
जहां क्रूड का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों पर दबाव दिखा, वहीं तेल और गैस का उत्पादन करने वाली अपस्ट्रीम कंपनियों के शेयरों में तेजी रही।
ONGC का शेयर 2.02 फीसदी चढ़कर 236.49 रुपये पर बंद हुआ। वहीं Oil India का शेयर 1.31 फीसदी बढ़कर 489.50 रुपये पर पहुंच गया।
आमतौर पर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों के लिए प्राप्ति कीमतों में सुधार की संभावना बनती है। हालांकि, इन कंपनियों के वास्तविक वित्तीय प्रदर्शन पर उत्पादन स्तर, लागत, सरकार की नीतियां और अन्य कारोबारी कारकों का भी असर पड़ता है।
आगे क्रूड की कीमतों पर रहेगी नजर
मध्यपूर्व में तनाव बढ़ने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी किसी भी खबर का असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर पड़ सकता है।
भारत जैसे बड़े क्रूड आयातक देश के लिए तेल की कीमतों में तेज और लंबे समय तक रहने वाली बढ़ोतरी महत्वपूर्ण है। महंगा क्रूड आयात बिल, रुपये पर दबाव और महंगाई से जुड़े जोखिम बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, घरेलू तेल उत्पादक कंपनियों को ऊंची कीमतों से फायदा मिल सकता है।
नोट: शेयर बाजार में किसी भी सेक्टर या कंपनी के शेयर पर क्रूड की कीमत का असर कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है। इसलिए निवेश का फैसला केवल कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के आधार पर नहीं करना चाहिए।


