Share Market Crash: महीने के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। एशियाई बाजारों में कमजोर रुख और अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ी, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 359 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी फिसलकर 24,000 के बेहद करीब पहुंच गया।
सोमवार, 31 अगस्त को सुबह करीब 9:51 बजे सेंसेक्स 358.64 अंक यानी 0.46% की गिरावट के साथ 76,905.87 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 140.45 अंक यानी 0.58% गिरकर 24,035.20 पर आ गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 394.92 अंक तक टूटकर 76,869.59 और निफ्टी 156.10 अंक गिरकर 24,019.55 के स्तर तक पहुंच गया।
बड़े शेयरों के साथ व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 दोनों में आधे फीसदी से ज्यादा की कमजोरी दर्ज की गई।
बाजार में गिरावट की 4 बड़ी वजहें
1. अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
शेयर बाजार में आज की गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव शामिल है। अमेरिका की ओर से ईरान के लारक द्वीप पर सैन्य कार्रवाई की खबरों और इसके बाद ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई के दावों ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी।
निवेशकों को आशंका है कि अगर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर ऊर्जा आपूर्ति, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर आमतौर पर निवेशक जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बनाने लगते हैं, जिसका दबाव शेयर बाजारों पर दिखाई देता है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार उछाल
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 5% उछलकर 90 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया।
भारत के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता का विषय है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। क्रूड महंगा होने से आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई तथा कंपनियों की लागत पर दबाव पड़ सकता है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में अचानक तेजी से घरेलू शेयर बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हुआ।
3. India VIX में तेज उछाल
बाजार में बढ़ती घबराहट का संकेत India VIX में भी देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में India VIX करीब 4.19% चढ़कर 11.13 के स्तर पर पहुंच गया।
India VIX को शेयर बाजार की संभावित अस्थिरता का संकेतक माना जाता है। इसमें तेजी का मतलब होता है कि आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका बढ़ रही है। ऐसे माहौल में निवेशक अक्सर सतर्क रुख अपनाते हैं और जोखिम वाली पोजीशन कम करने की कोशिश करते हैं।
4. IT और Metal शेयरों में भारी बिकवाली
सेक्टोरल स्तर पर भी बाजार को बड़ा झटका लगा। खासतौर पर मेटल और IT शेयरों में बिकवाली ने प्रमुख इंडेक्स पर दबाव बढ़ाया।
शुरुआती कारोबार में निफ्टी मेटल इंडेक्स 2% से ज्यादा कमजोर रहा, जबकि निफ्टी IT इंडेक्स में भी 1% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। दूसरी तरफ प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में खरीदारी दिखाई दी और निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स बढ़त में रहा। हालांकि, बैंकिंग शेयरों की मजबूती बाजार की कुल गिरावट को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
निवेशकों की नजर अब आगे के संकेतों पर
महीने के आखिरी दिन बाजार में भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक बाजारों के रुख पर खास नजर बनी हुई है। अगर अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है तथा क्रूड की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
वहीं, वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से बाजार को राहत मिल सकती है। ऐसे में अगले कुछ कारोबारी सत्रों में विदेशी बाजारों और तेल की चाल भारतीय शेयर बाजार के लिए अहम संकेत साबित हो सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या निवेश से जुड़ा फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या योग्य निवेश विशेषज्ञ से सलाह लें। NewsJagran.in की ओर से किसी निवेश में पैसा लगाने की सलाह नहीं दी जाती है।


