Nepal Flood Update: नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स भी इस आपदा की चपेट में आए हैं, जहां 900 से ज्यादा कर्मचारियों और मजदूरों के लापता होने की खबर है। ऊपरी त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए नेपाली सेना ने विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है।
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। कई इलाकों में भारी मलबा जमा है और सड़कों व संपर्क मार्गों के क्षतिग्रस्त होने से राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हुआ है। आपदा में मरने वालों की संख्या 900 के पार पहुंच चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
त्रिशूली-3A की सुरंग में जिंदगी तलाश रही सेना
नेपाल सेना की टीम ने ऊपरी त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की एक सुरंग तक पहुंचने में सफलता हासिल की है। सुरंग के अंदर फंसे लोगों की तलाश के लिए विशेषज्ञों की टीम को लगाया गया है।
नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजाराम बस्नेत के मुताबिक, सुरंग विशेषज्ञों ने सुरंग के क्राउन हेड वाले हिस्से का पता लगाया। वहां करीब 2×3 फीट का एक छोटा रास्ता मिला, जिसके जरिए पानी की सतह और करीब सात मीटर तक के हिस्से का आकलन किया गया।
एक सैन्य विशेषज्ञ ने इस संकरे रास्ते से अंदर जाने और लोगों की तलाश करने का प्रयास किया। हालांकि, शुरुआती कोशिश में किसी के जीवित होने के संकेत नहीं मिले। इसके बावजूद सेना ने तलाशी अभियान बंद नहीं किया है।
अब बचाव दल इस रास्ते को और चौड़ा करने में जुटा है। इसका उद्देश्य विशेषज्ञों को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ सुरंग के भीतर भेजकर विस्तृत तलाशी लेना है।
नेपाल में 903 मौतें, 4,247 लोग अब भी लापता
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, सोमवार 31 अगस्त तक आपदा में मरने वालों की संख्या 903 पहुंच गई है। वहीं करीब 4,247 लोग लापता बताए गए हैं।
बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं। आपदा के छठे दिन भी सुरक्षाबल, स्थानीय प्रशासन और अन्य राहत एजेंसियां मलबे में फंसे लोगों और लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।
राहत टीमों के लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना है। कई स्थानों पर बाढ़ और मलबे के कारण सड़कें तथा संपर्क मार्ग बाधित हैं।
इन जिलों में मिले सबसे ज्यादा शव
NDRRMA के आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल के आठ प्रभावित जिलों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं।
- चितवन: 272 शव
- नवलपरासी पूर्व: 207 शव
- नवलपरासी पश्चिम: 151 शव
- नुवाकोट: 95 शव
- गोरखा: 62 शव
- धादिंग: 55 शव
- तनहूं: 37 शव
- रसुवा: 24 शव
अधिकारियों के मुताबिक, लापता लोगों में 85 सुरक्षाकर्मी और 320 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
900 से ज्यादा शव, लेकिन सिर्फ 29 की पहचान
नेपाल में आपदा के बाद बड़ी संख्या में शव बरामद होने के बावजूद उनकी पहचान करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बरामद 900 से अधिक शवों में अभी तक सिर्फ 29 शवों की पहचान हो पाई है। कई शवों की हालत ऐसी है कि सामान्य तरीके से पहचान करना मुश्किल हो रहा है।
प्रशासन अज्ञात शवों की पहचान के लिए DNA सैंपल, टैटू, आभूषण, स्कूल टाई और शवों के साथ मिले दूसरे निजी सामान को रिकॉर्ड कर रहा है। जिन शवों की तत्काल पहचान संभव नहीं हो पा रही है, उन्हें अस्थायी रूप से दफनाया जा रहा है, ताकि बाद में DNA जांच और अन्य सबूतों के जरिए पहचान की जा सके।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में 933 लोग लापता
इस आपदा ने नेपाल के हाइड्रोपावर सेक्टर को भी बड़ा झटका दिया है। कई पावर प्रोजेक्ट बाढ़ और मलबे से प्रभावित हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल ने देशभर के नौ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में 537 कर्मचारियों और श्रमिकों के लापता होने की जानकारी दी है।
वहीं नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े 933 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें नेपाली नागरिकों के साथ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
यही वजह है कि राहत एजेंसियों का एक बड़ा फोकस हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और उनकी सुरंगों पर है।
खराब मौसम के बीच भारी मशीनरी से रेस्क्यू
ऊपरी त्रिशूली-3A इलाके में मौसम में कुछ सुधार आने के बाद राहत एवं बचाव अभियान को गति देने की कोशिश की गई है। नेपाली सेना ने मलबा हटाने के लिए बुलडोजर और दूसरी भारी मशीनरी को प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाया है।
कई जगहों पर मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मशीनरी पहुंचाना आसान नहीं था। कुछ उपकरणों को हेलीकॉप्टर की सहायता से प्रभावित क्षेत्रों तक ले जाया गया।
बारिश और खराब मौसम के बावजूद बचाव दल देर रात तक अभियान में जुटे रहे। सुरंग के प्रवेश क्षेत्र के आसपास लगातार मलबा हटाया जा रहा है, ताकि अंदर जाने का रास्ता सुरक्षित और बड़ा बनाया जा सके।
नेपाल में फंसे भारतीयों को निकालने का अभियान
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है। नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के मुताबिक, 149 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, करीब 275 भारतीय नागरिकों के लापता होने की सूचना मिली थी। इनमें से 128 लोगों से अभी तक संपर्क नहीं हो सका है।
भारतीय अधिकारियों की ओर से लगातार नेपाल के प्रशासन और स्थानीय एजेंसियों के साथ संपर्क बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
अस्पतालों में अपनों की तलाश कर रहे परिवार
नेपाल की इस त्रासदी ने हजारों परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। कई परिवार अपने लापता परिजनों की जानकारी के लिए अस्पतालों, राहत शिविरों और शवगृहों के चक्कर लगा रहे हैं।
काठमांडू स्थित त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में लापता लोगों की तस्वीरें भी लगाई गई हैं। परिजन इन तस्वीरों और उपलब्ध जानकारी के जरिए अपने रिश्तेदारों की तलाश कर रहे हैं।
बाढ़ और मलबे के कारण कई इलाकों में संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है, जिससे परिवारों की चिंता और बढ़ गई है।
अब सुरंगों में फंसे लोगों पर सबसे ज्यादा फोकस
नेपाल में राहत और बचाव एजेंसियों के सामने फिलहाल दो बड़ी चुनौतियां हैं—लापता लोगों को तलाशना और अज्ञात शवों की पहचान करना।
ऊपरी त्रिशूली-3A जैसी परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचना बेहद कठिन है। सेना विशेषज्ञों और भारी मशीनरी की मदद से सुरंगों तक पहुंचने का रास्ता तैयार कर रही है।
हालांकि अभी तक त्रिशूली-3A सुरंग से किसी व्यक्ति के जीवित होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बचाव अभियान जारी है। सेना और अन्य एजेंसियां मलबा हटाकर सुरंग के अंदर विस्तृत तलाशी लेने की तैयारी में हैं। आने वाले समय में इस अभियान से सुरंग में फंसे लोगों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।


