Crude Price: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर दिखाई दिया है। सोमवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में 1 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। अमेरिका की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के लराक द्वीप पर हमला किए जाने के बाद बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके जवाब में ईरान की ओर से भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की खबर सामने आई है।
मध्य पूर्व में जारी यह संघर्ष अब छठे महीने में प्रवेश कर चुका है। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने के लिए बातचीत फिलहाल रुकी हुई है। वहीं, मध्यस्थ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा सुरक्षित तरीके से खोलने की कोशिश कर रहे हैं। दुनिया के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है और यहां किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई पर दबाव डाल सकता है।
ब्रेंट क्रूड 89 डॉलर के पार
रॉयटर्स के मुताबिक, सोमवार को Brent crude futures में 1.08 डॉलर यानी करीब 1.23 प्रतिशत की तेजी आई और इसकी कीमत बढ़कर 89.18 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
इसी तरह अमेरिकी West Texas Intermediate (WTI) crude भी 92 सेंट यानी करीब 1.10 प्रतिशत चढ़कर 84.32 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
पिछले सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई थी। ऐसे में सोमवार की तेजी को बाजार में नए सिरे से भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
लराक द्वीप पर अमेरिकी हमला, ईरान ने दिया जवाब
अमेरिकी सेना ने रविवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थित ईरान के लराक द्वीप पर दो लॉन्चरों को निशाना बनाया। जुलाई के आखिर में हुए हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में यह पहला ज्ञात अमेरिकी हमला बताया गया है।
इसके बाद ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई की गई। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के हवाले से ईरानी मीडिया ने सोमवार को बताया कि ईरान ने जॉर्डन में दो अमेरिकी एयर बेस को निशाना बनाया है।
इन घटनाओं ने निवेशकों के बीच यह चिंता बढ़ा दी है कि संघर्ष अगर और लंबा खिंचता है तो तेल की सप्लाई और समुद्री परिवहन पर इसका असर बढ़ सकता है।
संघर्ष बढ़ा तो 85.80-85.90 डॉलर के पार जा सकता है WTI
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान तनाव पर निर्भर करेगी।
रॉयटर्स की रिपोर्ट में IG Markets के मार्केट एनालिस्ट टोनी सिकामोर के हवाले से कहा गया है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और बढ़ता है और WTI क्रूड 85.80-85.90 डॉलर प्रति बैरल के रेजिस्टेंस लेवल को पार करता है, तो कीमतों में और तेजी की गुंजाइश बन सकती है।
इसका मतलब है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर केवल कच्चे तेल की मौजूदा कीमत पर नहीं, बल्कि इस तकनीकी स्तर पर भी रहेगी।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह समुद्री रास्ता कई तेल उत्पादक देशों के लिए वैश्विक बाजार तक पहुंच का प्रमुख माध्यम है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अगर इस रूट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ सकती है। यही वजह है कि होर्मुज में सैन्य गतिविधियों की हर खबर का सीधा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर देखने को मिलता है।
होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटी
शिपिंग डेटा के अनुसार, वीकेंड के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले कमोडिटी जहाजों की संख्या घटकर करीब 5 जहाज प्रतिदिन रह गई। इसे कंपनियों की बढ़ती सावधानी से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्षेत्र में जहाजों पर हमले का खतरा बढ़ने के कारण शिपिंग कंपनियां इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करने में अतिरिक्त सावधानी बरत रही हैं। शनिवार को भी होर्मुज से गुजरते समय एक टैंकर पर किसी प्रोजेक्टाइल से हमला होने की खबर सामने आई थी।
पिछले हफ्ते 4% से ज्यादा गिरा था क्रूड
मध्य पूर्व में तनाव के बावजूद पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई थी। बाजार में संघर्ष को लेकर कुछ राहत और सप्लाई से जुड़ी उम्मीदों के चलते कीमतों पर दबाव बना था।
लेकिन अमेरिका के ताजा हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई ने भू-राजनीतिक जोखिम को फिर बढ़ा दिया है। यही कारण है कि सोमवार को क्रूड की कीमतों में दोबारा तेजी देखने को मिली।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारत के लिए चिंता का विषय हो सकती है क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने पर आयात बिल बढ़ सकता है और इसका असर रुपये, महंगाई तथा पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है।
हालांकि घरेलू ईंधन कीमतों पर तत्काल असर कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है। आने वाले दिनों में सबसे अहम बात यह होगी कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष आगे किस दिशा में जाता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल एवं कमोडिटी जहाजों की आवाजाही कितनी सामान्य रहती है।
नोट: यह खबर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भू-राजनीतिक घटनाओं, सप्लाई, मांग और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुसार तेजी से बदल सकता है।


