Share Market Today: अगस्त महीने के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कमजोर वैश्विक संकेतों का असर घरेलू बाजार के सेंटीमेंट पर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 300 अंकों तक फिसला, जबकि निफ्टी भी लाल निशान में कारोबार करता नजर आया।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी लाल
सोमवार, 31 अगस्त को बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव देखने को मिला। BSE Sensex 77,130.73 के स्तर पर खुला, जबकि Nifty 50 करीब 58 अंक गिरकर 24,117.55 के स्तर पर पहुंच गया। बाद में बाजार में गिरावट और बढ़ी तथा सेंसेक्स करीब 300 अंकों तक नीचे चला गया।
बाजार में कमजोरी का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता रही। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जिससे भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े आयातक देश के लिए चिंता बढ़ी है।
सेंसेक्स के 30 शेयरों में सिर्फ 4 में तेजी
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के 30 शेयरों में से केवल चार शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए, जबकि बाकी शेयरों में गिरावट रही।
तेजी वाले प्रमुख शेयरों में:
- HDFC Bank
- Eternal (Zomato)
- ICICI Bank
- Maruti Suzuki
इनमें HDFC Bank सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। शेयर में शुरुआती कारोबार में मजबूती देखने को मिली। बाजार में HDFC Bank के शेयर पर निवेशकों की खास नजर है क्योंकि बैंक के मौजूदा MD और CEO शशिधर जगदीशन ने अक्टूबर 2026 में अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है।
IndiGo समेत इन शेयरों में गिरावट
दूसरी ओर, शुरुआती कारोबार में IndiGo सबसे ज्यादा दबाव में नजर आया। इसके अलावा Asian Paints, Tata Steel समेत कई बड़े शेयरों में भी कमजोरी रही।
सेक्टोरल स्तर पर भी बाजार का रुझान कमजोर रहा। शुरुआती कारोबार में Nifty Metal और Nifty IT में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जबकि कई अन्य सेक्टर इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमत बनी चिंता
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता इस समय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया है। महंगे तेल से भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर रुपये और शेयर बाजार दोनों पर पड़ सकता है।
इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर भी बाजार सतर्क है। फेड चेयर केविन वार्श की महंगाई को लेकर सख्त टिप्पणियों के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की आशंका बढ़ी है। इससे वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
बाजार में आगे भी रह सकती है volatility
31 अगस्त को बाजार के लिए कई अहम घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया का तनाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक बाजारों का रुख घरेलू शेयर बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
इसके अलावा MSCI इंडेक्स में होने वाले बदलाव और नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को लेकर भी बाजार में हलचल रहने की संभावना है। तकनीकी स्तर पर बाजार विशेषज्ञों की नजर Nifty के 24,060 के आसपास के सपोर्ट और 24,215 के स्तर पर रहेगी। 24,215 के ऊपर मजबूती आने पर बाजार में रिकवरी की गुंजाइश बन सकती है, जबकि 24,060 के नीचे फिसलने पर दबाव बढ़ सकता है।
नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


