Piyush Goyal Japan Visit: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान यात्रा के दौरान जापानी कंपनियों से भारत में निवेश बढ़ाने और औद्योगिक साझेदारी को मजबूत करने की अपील की है। उन्होंने भारत में सुजुकी के सफल कारोबार का उदाहरण देते हुए कहा कि देश को ऐसी 1,580 और सफल कंपनियां तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
नई दिल्ली: भारत और जापान के बीच कारोबारी और औद्योगिक संबंधों को और मजबूत करने की कोशिशों के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल जापान के दौरे पर हैं। 24 से 27 अगस्त तक चलने वाली इस यात्रा में उनके साथ 220 से अधिक भारतीय उद्योग प्रतिनिधि भी शामिल हैं। इस दौरान गोयल ने जापानी कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने और यहां अपने ग्लोबल ऑपरेशंस का विस्तार करने का न्योता दिया।
जापानी कंपनियों के लिए भारत में मौजूद अवसरों को समझाते हुए गोयल ने सुजुकी की सफलता का खास तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य सिर्फ विदेशी कंपनियों को आकर्षित करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी कंपनियों को विकसित करना भी होना चाहिए जो भारत से निकलकर पूरी दुनिया में अपना कारोबार बढ़ाएं।
भारत से निकलें 1,580 सुजुकी जैसी कंपनियां
पीयूष गोयल ने भारत में काम कर रही करीब 1,580 जापानी कंपनियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को सुजुकी की सफलता से प्रेरणा लेनी चाहिए। उनका कहना था कि भारत ऐसा वातावरण तैयार करना चाहता है, जहां बड़ी संख्या में कंपनियां सुजुकी की तरह वैश्विक स्तर पर सफल हो सकें।
गोयल ने जापानी कारोबारी समुदाय के सामने भारत के बढ़ते औद्योगिक और कारोबारी अवसरों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत में सुजुकी का कारोबार बेहद मजबूत स्थिति में पहुंच चुका है और उसकी भारतीय इकाई का बाजार मूल्य उसकी मूल कंपनी से भी अधिक हो चुका है।
उनके मुताबिक, यह इस बात का उदाहरण है कि किसी विदेशी कंपनी के लिए भारत में लंबे समय तक निवेश और विस्तार कितना फायदेमंद हो सकता है।
जापानी कंपनियों के लिए भारत में बड़े अवसर
केंद्रीय मंत्री ने जापानी कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल सप्लाई चेन से जुड़े अवसरों का लाभ उठाने की अपील की। भारत लगातार अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और वैश्विक कंपनियों को यहां उत्पादन केंद्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
गोयल का जोर इस बात पर भी रहा कि जापानी कंपनियां भारत को केवल एक बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में न देखें, बल्कि इसे अपने वैश्विक कारोबार के लिए एक महत्वपूर्ण उत्पादन और निर्यात केंद्र के तौर पर भी इस्तेमाल करें।
220 से ज्यादा भारतीय उद्योग प्रतिनिधि जापान में
पीयूष गोयल की जापान यात्रा में भारतीय उद्योग जगत की भी बड़ी भागीदारी है। 220 से अधिक कारोबारी और उद्योग प्रतिनिधि इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं।
इस दौरे का एक अहम उद्देश्य भारत-जापान के बीच व्यापारिक संबंधों को और गहरा करना है। साथ ही दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार असंतुलन को कम करने के तरीकों पर भी चर्चा की जा रही है।
भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 27.47 अरब डॉलर का है। भारत की ओर से जापान से मशीनरी, टेक्नोलॉजी और अन्य मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े उत्पादों का आयात भी काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में भारत की कोशिश है कि व्यापार संबंधों में निर्यात और निवेश का संतुलन और बेहतर हो।
एनर्जी और मोबिलिटी सेक्टर पर भी बातचीत
जापान यात्रा के दौरान पीयूष गोयल ने Sumitomo Corporation के CEO शिंगो उएनो से मुलाकात की। बैठक में एनर्जी ट्रांजिशन, मोबिलिटी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भारत में कंपनी की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई।
भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, क्लीन एनर्जी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से निवेश हो रहा है। ऐसे में जापानी कंपनियों के लिए इन क्षेत्रों में दीर्घकालिक निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं।
गोयल ने Mitsubishi Corporation के प्रतिनिधि निदेशक जुरो बाबा से भी मुलाकात की। इस बैठक में मोबिलिटी, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
फार्मा और वैक्सीन सेक्टर में बढ़ सकता है सहयोग
भारत-जापान सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र फार्मास्यूटिकल्स भी है। गोयल ने Meiji Seika Pharma के प्रेसिडेंट और रिप्रेजेंटेटिव डायरेक्टर तोशियाकी नागासातो से मुलाकात की।
दोनों पक्षों ने फार्मा मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।
Meiji Seika Pharma की ओर से जापानी इंसेफेलाइटिस वैक्सीन की सप्लाई के लिए Serum Institute of India के साथ संभावित साझेदारी पर भी विचार किया जा रहा है। इससे वैक्सीन और हेल्थकेयर सेक्टर में भारत-जापान सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।
सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स पर भी नजर
भारत और जापान के बीच सहयोग अब पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। दोनों देश सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। ऐसे में भारत और जापान के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जापान ने भारत में 62 अरब डॉलर निवेश का रखा लक्ष्य
जापान ने अगले 10 वर्षों में भारत में करीब 62 अरब डॉलर का निवेश करने का लक्ष्य रखा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस लक्ष्य की दिशा में करीब 1.2 अरब डॉलर का निवेश पहले ही किया जा चुका है।
भारत इस निवेश को मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, एनर्जी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में आकर्षित करना चाहता है। गोयल की जापान यात्रा को इसी व्यापक निवेश और औद्योगिक साझेदारी को गति देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
जापानी कंपनियों के प्लांट का दौरा करेगा भारतीय प्रतिनिधिमंडल
यात्रा के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने जापान के प्रमुख कारोबारी और औद्योगिक संगठनों के साथ भी बातचीत की। इसमें Keidanren, जापान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, फिनटेक एसोसिएशन ऑफ जापान और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा शामिल है।
भारतीय उद्योग प्रतिनिधियों के Hitachi, Daikin, Panasonic, Omron और Horiba जैसी प्रमुख जापानी कंपनियों की सुविधाओं का दौरा करने का कार्यक्रम भी है।
इन दौरों का उद्देश्य जापानी तकनीक और औद्योगिक प्रक्रियाओं को समझना, अनुभव साझा करना और भारत-जापान के बीच नए निवेश एवं कारोबारी साझेदारी के अवसर तलाशना है।
भारत-जापान आर्थिक रिश्तों के लिए क्यों अहम है यह दौरा?
पीयूष गोयल की जापान यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और वैश्विक कंपनियों को देश में निवेश के लिए आकर्षित करने पर जोर दे रहा है। जापान के पास ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में मजबूत तकनीकी क्षमता है।
वहीं, भारत के पास बड़ा घरेलू बाजार, युवा कार्यबल और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। दोनों देशों की ताकत का यह मेल आने वाले वर्षों में निवेश और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर पैदा कर सकता है।
पीयूष गोयल का ‘1,580 सुजुकी जैसी कंपनियां’ वाला बयान इसी बड़े विजन को दर्शाता है—भारत केवल विदेशी निवेश हासिल करने वाला बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सफल कंपनियों के निर्माण और विस्तार का प्रमुख केंद्र बनना चाहता है।


