Nepal Flood: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और ग्लेशियर टूटने की घटना ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस आपदा के बीच धार्मिक यात्रा पर नेपाल गए तमिलनाडु के 21 श्रद्धालु शुक्रवार को सुरक्षित भारत लौट आए। चेन्नई पहुंचने के बाद यात्रियों ने उस भयावह पल को याद किया, जब अचानक आई बाढ़ ने उनके काफिले को घेर लिया था। एक महिला ने बताया कि पानी और मलबे के तेज बहाव के दौरान आवाज इतनी भयानक थी, जैसे कोई बम धमाका हुआ हो।
नेपाल में प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर जनजीवन को प्रभावित किया है। बाढ़ और मलबे के तेज बहाव के कारण कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और प्रभावित क्षेत्रों में लोगों तक मदद पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
इसी बीच नेपाल की धार्मिक यात्रा पर गए तमिलनाडु के 21 श्रद्धालु सुरक्षित भारत लौट आए हैं। शुक्रवार को चेन्नई एयरपोर्ट पहुंचने के बाद उन्होंने नेपाल में बिताए खौफनाक समय के बारे में जानकारी दी। यात्रियों के मुताबिक, अचानक आई बाढ़ ने उन्हें संभलने तक का मौका नहीं दिया और अपनी जान बचाने के लिए उन्हें ऊंचाई वाले इलाके की तरफ भागना पड़ा।
सुरक्षित भारत लौटे 21 श्रद्धालु
शुक्रवार को तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री चेन्नई एयरपोर्ट पहुंचे। लंबे और मुश्किल सफर के बाद भारत लौटने की राहत उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी। हालांकि, नेपाल में देखी गई तबाही को याद करते हुए कई यात्री भावुक भी नजर आए।
बताया गया कि श्रद्धालु धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल गए थे। उन्हें अंदाजा नहीं था कि उनकी यात्रा इतनी भयावह परिस्थिति में बदल जाएगी। अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने उनके बस काफिले को खतरे में डाल दिया।
26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद पहाड़ी इलाकों में पानी, बर्फ, पत्थर और मलबा तेजी से नीचे की ओर आया। इसके चलते नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास के कई क्षेत्रों में हालात बेहद खराब हो गए और स्थानीय लोगों के साथ-साथ वहां मौजूद यात्रियों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
‘आवाज ऐसी थी जैसे बम धमाका हुआ हो’
बाढ़ के बीच फंसीं विजयभुवनेश्वरी ने उस भयावह घटना को याद करते हुए बताया कि अचानक हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें अपनी जान बचाने के लिए ऊंचाई की ओर भागना पड़ा।
उन्होंने NDTV से बातचीत में बताया कि बाढ़ आने के दौरान तेज आवाज सुनाई दी। उनके मुताबिक, आवाज इतनी जोरदार थी कि ऐसा लगा जैसे कोई बम धमाका हुआ हो।
उन्होंने बताया कि उनके काफिले में तीन बसें थीं। बाढ़ आने के बाद आगे और पीछे की बसें फंस गईं। इसके बाद यात्रियों ने किसी तरह ऊपर की तरफ जाने का फैसला किया। वे एक पहाड़ी पर पहुंचे, जहां आर्म्ड रिजर्व पुलिस का कैंप था।
पुलिस ने वहां यात्रियों की मदद की और उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा। यही वजह रही कि काफिले में शामिल सभी 21 श्रद्धालु सुरक्षित भारत वापस लौट सके।
‘मेरे लिए यह नया जन्म है’
इस हादसे के बाद यात्रियों के लिए भारत लौटना किसी बड़ी राहत से कम नहीं था। किरुबाथिरी ने इस अनुभव को अपनी जिंदगी का बेहद डरावना दौर बताया। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में उन्हें लगातार अपनी बेटी की चिंता सता रही थी।
उन्होंने इस घटना को अपने लिए दूसरी जिंदगी मिलने जैसा बताया। उनके मुताबिक, जलवायु परिवर्तन एक वास्तविक चुनौती है और प्राकृतिक आपदाओं का सबसे ज्यादा असर अक्सर आम और गरीब लोगों पर पड़ता है।
नेपाल में आई बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां मौजूद लोगों को अपनी जान बचाने के लिए कुछ ही समय में ऊंचे स्थानों की ओर जाना पड़ा।
‘ऐसा लगा जैसे कंक्रीट का ज्वालामुखी फट गया’
एक अन्य यात्री वल्लीनायकी ने बाढ़ के दौरान सामने आए मंजर की तुलना ज्वालामुखी विस्फोट से की।
उन्होंने बताया कि पानी के साथ पत्थर, मलबा और अन्य सामग्री इतनी तेजी से नीचे आ रही थी कि पूरा दृश्य किसी भयावह ज्वालामुखी विस्फोट जैसा लग रहा था। उनके मुताबिक, उस समय सुरक्षित बच निकलना किसी चमत्कार से कम नहीं था।
यात्रियों के लिए सबसे डरावना पल वह था, जब कुछ ही समय में सामान्य स्थिति पूरी तरह बदल गई। जिस रास्ते से वे यात्रा कर रहे थे, वही रास्ता अचानक पानी और मलबे के तेज बहाव की चपेट में आ गया।
चेन्नई एयरपोर्ट पर हुआ स्वागत
शुक्रवार को चेन्नई एयरपोर्ट पहुंचने पर तमिलनाडु के मंत्री नारायणसामी आनंद और मंत्री डी सरथकुमार ने लौटे हुए श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
कई दिनों तक मुश्किल परिस्थितियों में रहने के बाद यात्रियों के सुरक्षित भारत लौटने से उनके परिवारों ने भी राहत की सांस ली। एयरपोर्ट पर यात्रियों के पहुंचने के बाद उनके परिजनों के बीच भावुक माहौल देखने को मिला।
नेपाल में राहत-बचाव अभियान जारी
बाढ़ और ग्लेशियर टूटने की घटनाओं के बाद नेपाल और तिब्बत सीमा से लगे प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान जारी है। प्रभावित गांवों तक जरूरी सहायता पहुंचाने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ विभिन्न टीमें काम कर रही हैं।
शनिवार को भारत की 11 सदस्यीय टीम भी नेपाल पहुंची। यह टीम स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और बचाव अभियान में सहयोग करेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, इस आपदा में नेपाल में 626 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि सीमा के दोनों तरफ 2,500 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में राहत अभियान के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है।
नेपाल में आई इस आपदा ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़, ग्लेशियर टूटने और जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों को सामने ला दिया है। फिलहाल राहत एजेंसियों की प्राथमिकता प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाना और लापता लोगों की तलाश करना है।


