Gold Silver Weekly Report: सोने और चांदी की कीमतों के लिए अगस्त का यह आखिरी हफ्ता उतार-चढ़ाव भरा रहा। सप्ताह के शुरुआती दिनों में दोनों कीमती धातुओं ने मजबूत तेजी दिखाई और सोना तीन महीने के ऊंचे स्तर के करीब पहुंच गया। हालांकि, सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख ने बाजार का मूड बदल दिया। शुक्रवार को सोने और चांदी में तेज बिकवाली देखने को मिली।
स्पॉट गोल्ड 28 अगस्त को 3.18 फीसदी गिरकर 4,454 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। इससे पहले 24 अगस्त को सोना करीब 4,696 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गया था। वहीं, चांदी भी 27 अगस्त को लगभग 69 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंचने के बाद 28 अगस्त को 4.48 फीसदी गिरकर करीब 66 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
24 अगस्त को तीन महीने के हाई पर पहुंचा था सोना
अगस्त के आखिरी हफ्ते की शुरुआत सोने के लिए काफी मजबूत रही। 24 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड ने लगभग 4,696 डॉलर प्रति औंस का स्तर छुआ। यह करीब तीन महीने का उच्च स्तर था।
लेकिन सप्ताह के अंत तक तस्वीर पूरी तरह बदल गई। 28 अगस्त को सोने में अचानक तेज गिरावट आई और कीमत 3.18 फीसदी नीचे आ गई। सप्ताह के दौरान ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली भी देखने को मिली।
चांदी ने भी सप्ताह के दौरान तेजी दिखाई। 27 अगस्त को इसकी कीमत करीब 69 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी, लेकिन अगले ही दिन इसमें 4.48 फीसदी की बड़ी गिरावट आई और कीमत करीब 66 डॉलर प्रति औंस रह गई।
फेड चेयरमैन के बयान से बुलियन पर दबाव
सोने और चांदी में शुक्रवार की तेज गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की धारणा में बदलाव रहा।
28 अगस्त को फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के भाषण के बाद बाजार को संकेत मिला कि केंद्रीय बैंक फिलहाल महंगाई को नियंत्रित करने को प्राथमिकता दे रहा है। इस रुख से ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों पर असर पड़ा और सोने-चांदी जैसे गैर-ब्याज देने वाले एसेट्स पर दबाव बढ़ गया।
अमेरिका में जुलाई का पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) इनफ्लेशन 3.7 फीसदी रहा। महंगाई के इस आंकड़े ने भी फेड के रुख को लेकर बाजार की चिंता बढ़ाई।
तेजी के बाद मुनाफावसूली ने बढ़ाई गिरावट
सप्ताह के शुरुआती हिस्से में सोने और चांदी में तेजी के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर मुनाफा बुक करना शुरू किया। लगातार तेजी के बाद यह सामान्य बाजार प्रतिक्रिया मानी जाती है।
इसके अलावा अमेरिकी डॉलर में मजबूती का भी बुलियन की कीमतों पर दबाव पड़ा। आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर दूसरी मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग प्रभावित हो सकती है।
इस सप्ताह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डिबेसमेंट ट्रेड से जुड़ी उम्मीदों ने भी सोने की कीमतों को प्रभावित किया। शुरुआती तेजी के बाद फेड के महंगाई-केंद्रित रुख ने बाजार की दिशा बदल दी।
दिल्ली सर्राफा बाजार में भी सोने की कीमत गिरी
अंतरराष्ट्रीय बाजार की कमजोरी का असर घरेलू सर्राफा बाजार में भी दिखाई दिया। 28 अगस्त को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमत 3,300 रुपये घटकर 1,62,400 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई।
दिल्ली में सोने की कीमतों में यह लगातार तीसरे दिन गिरावट थी। पूरे सप्ताह की बात करें तो दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमत 4,700 रुपये प्रति 10 ग्राम कम हुई।
25 अगस्त को दिल्ली में सोना 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद लगातार तीन कारोबारी सत्रों में गिरावट देखने को मिली।
चांदी पर भी बिकवाली का दबाव
सोने के साथ चांदी में भी सप्ताह के आखिर में तेज बिकवाली हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 27 अगस्त को चांदी करीब 69 डॉलर प्रति औंस तक पहुंची थी, लेकिन 28 अगस्त को इसमें 4.48 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
चांदी पर सोने की कमजोरी के अलावा डॉलर की मजबूती और अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बदलती उम्मीदों का असर पड़ा। चांदी औद्योगिक धातु होने के कारण वैश्विक आर्थिक गतिविधियों और औद्योगिक मांग से जुड़े संकेतों पर भी प्रतिक्रिया देती है।
आगे सोने की कीमत किस दिशा में जाएगी?
आने वाले दिनों में सोने की दिशा कई अहम संकेतकों पर निर्भर करेगी। खास तौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले कदम, महंगाई के आंकड़े, डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर निवेशकों की नजर रहेगी।
अगर महंगाई पर फेड का रुख सख्त बना रहता है और डॉलर में मजबूती जारी रहती है, तो सोने और चांदी पर आगे भी दबाव देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर, अगर ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद फिर मजबूत होती है या वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है, तो बुलियन को दोबारा सपोर्ट मिल सकता है।
फिलहाल सप्ताह के अंत की तेज गिरावट के बाद निवेशक ऊंचे स्तरों पर नई खरीदारी करने से पहले बाजार के अगले संकेतों का इंतजार कर सकते हैं।
नोट: सोने और चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर-रुपया विनिमय दर, घरेलू मांग, टैक्स और अन्य कारकों के कारण लगातार बदलती रहती हैं। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


