Nepal Flood Alert: नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड के कुछ ही दिनों बाद एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। चीन ने नेपाल को चेतावनी दी है कि ऊपरी इलाके में बनी एक अस्थायी झील किसी भी समय टूट सकती है। झील के जलस्तर और उसके प्राकृतिक बांध में बदलाव पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
नेपाल अभी हाल में आई विनाशकारी बाढ़ से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है कि एक नई चिंता सामने आ गई है। चीन ने नेपाल के विदेश मंत्रालय को ऊपरी क्षेत्र में बनी एक अस्थायी झील को लेकर अलर्ट किया है। चीन के मुताबिक, झील में कुछ ऐसे बदलाव दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें संभावित खतरे के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
यह चेतावनी उस फ्लैश फ्लड के करीब चार दिन बाद आई है, जिसने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। चीन की ओर से की गई बाढ़ मॉडलिंग के अनुसार, यदि झील को रोकने वाली प्राकृतिक रुकावट का कोई हिस्सा टूटता है, तो नदी में पानी का अधिकतम बहाव करीब 500 घन मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच सकता है।
झील के रंग में बदलाव ने बढ़ाई चिंता
चीनी अधिकारियों ने झील की स्थिति में हो रहे बदलाव को लेकर नेपाल को जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, झील के पानी का रंग लगातार गहरा होता जा रहा है। इसे झील की स्थिति में बदलाव का एक संकेत माना जा रहा है।
नेपाल को भेजे गए संदेश में बताया गया कि हाल में बननी शुरू हुई झील के पानी का रंग बदल रहा है और इसके चलते इसके टूटने की आशंका पर नजर रखना जरूरी है।
हालांकि, चीन ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल झील में पानी की मात्रा बहुत अधिक नहीं है। यदि प्राकृतिक रुकावट टूटती भी है, तो शुरुआती आकलन के मुताबिक निचले हिस्से में नदी के बहाव में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन बहुत बड़े स्तर की वृद्धि की संभावना कम बताई गई है।
फिर भी निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
कैसे बनी अस्थायी झील?
बताया जा रहा है कि ग्लेशियर के ढहने के बाद बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो गया। इस मलबे ने प्राकृतिक रुकावट का रूप ले लिया और इसके पीछे पानी जमा होने से एक अस्थायी झील बन गई।
यह झील ल्हेन्डे नदी सिस्टम के ऊपरी हिस्से में बनी है। इसका संबंध चीन के तिब्बत क्षेत्र की चोचेन नदी और नेपाल की ओर बहने वाली पुरेपु नदी के संगम के पास के इलाके से बताया गया है।
चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, झील का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। शुक्रवार तक इसमें लगभग 25 लाख घन मीटर पानी जमा होने का अनुमान था।
चीनी अधिकारियों ने इससे पहले अनुमान लगाया था कि अगले कुछ दिनों में झील में करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी जमा हो सकता है।
अगर प्राकृतिक बांध टूटा तो कितना बढ़ेगा पानी?
चीन ने संभावित स्थिति का अनुमान लगाने के लिए बाढ़ मॉडलिंग की है। इसमें यह देखा गया है कि अगर झील को रोकने वाली प्राकृतिक रुकावट का कुछ हिस्सा टूटता है तो पानी किस गति से नीचे की ओर जा सकता है।
मॉडल के अनुसार, पानी का अधिकतम बहाव करीब 500 घन मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच सकता है। चीनी अधिकारियों का आकलन है कि यह बहाव नदी के किनारों के भीतर रह सकता है।
इसके बावजूद स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, क्योंकि प्राकृतिक बांध की मजबूती और झील में जमा होने वाले पानी की मात्रा मौसम तथा आसपास की भौगोलिक परिस्थितियों के साथ बदल सकती है।
ड्रोन और सैटेलाइट से हो रही निगरानी
संभावित खतरे को देखते हुए चीन की ओर से इलाके की निगरानी के लिए ड्रोन और सैटेलाइट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य झील के आकार, जलस्तर और प्राकृतिक रुकावट में होने वाले बदलावों को लगातार ट्रैक करना है।
यह निगरानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अचानक रुकावट टूटने की स्थिति में निचले इलाकों में पानी तेजी से पहुंच सकता है।
झील से पानी नदियों में बहना शुरू
शुक्रवार को झील का पानी ल्हेंडे खोला और त्रिशूली नदियों की ओर बहने लगा। चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV के मुताबिक, दोपहर तक इस बहाव से तत्काल बड़े खतरे की स्थिति नियंत्रण में मानी जा रही थी।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है। झील में पानी का स्तर और प्राकृतिक बांध की स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
नेपाल पहले से ही बड़ी तबाही से जूझ रहा
नई चेतावनी ऐसे समय आई है जब नेपाल में हालिया अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में काम कर रहे हैं और नदी के ऊपरी हिस्सों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में कम से कम 579 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तिब्बत में कम से कम सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
ऐसे में नई अस्थायी झील को लेकर जारी चेतावनी ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल अधिकारियों की प्राथमिकता झील के जलस्तर, प्राकृतिक बांध की मजबूती और नदी के बहाव में होने वाले बदलावों पर लगातार नजर रखना है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्टों और अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी पर आधारित है। प्राकृतिक झील और बाढ़ की स्थिति तेजी से बदल सकती है, इसलिए स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी ताजा निर्देशों को प्राथमिकता दें।


