Kriti Sanon: कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक नई चर्चा में बदल गया है। ज्वेलरी ब्रांड GIVA के इस कैंपेन में कृति सेनन के पहनावे और विज्ञापन के कॉन्सेप्ट को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए गए थे। विवाद बढ़ने के बाद ब्रांड ने विज्ञापन को अपने मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा लिया। अब इस पूरे मामले पर अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की मां और निर्माता मधु चोपड़ा की प्रतिक्रिया सामने आई है।
मुंबई में आयोजित ‘वुमेन बिल्डिंग सिनेमा टुगेदर’ कार्यक्रम में मधु चोपड़ा ने महिलाओं की पसंद, कपड़ों और सामाजिक मर्यादाओं से जुड़े सवाल पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि उनके बच्चे भी काम और अपनी पसंद के मुताबिक अलग-अलग तरह के कपड़े पहनते हैं, लेकिन परिस्थितियों और अवसर के अनुसार कुछ सीमाओं का ध्यान रखना जरूरी है।
कृति सेनन के ऐड पर क्यों हुआ विवाद?
दरअसल, रक्षाबंधन के मौके पर ज्वेलरी ब्रांड GIVA ने कृति सेनन को लेकर एक विज्ञापन कैंपेन जारी किया था। विज्ञापन में अभिनेत्री इंडो-वेस्टर्न लुक में दिखाई दी थीं। उनके आउटफिट में ब्रैलेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थे।
विज्ञापन में कृति को अपने ऑन-स्क्रीन भाई के साथ-साथ अपने पालतू कुत्ते को भी राखी बांधते हुए दिखाया गया था। कैंपेन का उद्देश्य परिवार और पालतू जानवरों को परिवार का हिस्सा मानने का संदेश देना था।
हालांकि, विज्ञापन सामने आने के बाद सोशल मीडिया के एक वर्ग ने कृति के पहनावे पर आपत्ति जताई। कुछ यूजर्स का कहना था कि रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक त्योहार से जुड़े विज्ञापन में अभिनेत्री का यह लुक उपयुक्त नहीं था।
इसके बाद सोशल मीडिया पर संस्कृति, परंपरा और महिलाओं के पहनावे को लेकर बहस शुरू हो गई।
‘कुछ सीमाएं जरूरी हैं’ बोलीं मधु चोपड़ा
विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मधु चोपड़ा ने कहा कि व्यक्ति की अपनी पसंद महत्वपूर्ण है, लेकिन परिस्थितियों और जगह के अनुसार कुछ सीमाएं भी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “मेरा शरीर, मेरी पसंद सही है, लेकिन वो सीमाएं जरूरी हैं। गरिमा और दूसरों के मूल्यों का सम्मान करना महत्वपूर्ण है।”
मधु चोपड़ा ने यह भी कहा कि कुछ तरह के कपड़े या फैशन ऐसे स्थानों पर सामान्य हो सकते हैं जहां उन्हें स्वीकार किया जाता है, लेकिन हर जगह एक जैसी सामाजिक स्वीकार्यता नहीं होती।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सोशल मीडिया पर यह बहस चल रही है कि पारंपरिक त्योहारों और सांस्कृतिक अवसरों के दौरान पहनावे को लेकर महिलाओं से कितनी अपेक्षाएं रखी जानी चाहिए।
अपने बच्चों के कपड़ों पर भी बोलीं मधु चोपड़ा
मधु चोपड़ा ने प्रियंका चोपड़ा और अपने परिवार के अन्य सदस्यों के कपड़ों को लेकर भी अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि उनके बच्चे काम और अपनी पसंद के अनुसार अलग-अलग तरह के कपड़े पहनते हैं।
हालांकि, उनका मानना है कि किसी कार्यक्रम या अवसर के हिसाब से लुक का चुनाव भी महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी मौके के लिए पहनावा उचित नहीं लगता, तो आलोचना की संभावना भी बनी रहती है।
इस बयान के बाद मधु चोपड़ा की बात को सोशल मीडिया पर चल रही कृति सेनन के विज्ञापन वाली बहस से जोड़कर देखा जा रहा है।
विवाद के बाद GIVA ने हटाया विज्ञापन
सोशल मीडिया पर बढ़ती आलोचना के बाद ज्वेलरी ब्रांड GIVA ने विज्ञापन को अपने मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा लिया। ब्रांड ने इस मामले में सफाई भी दी।
कंपनी ने कहा कि उसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति, परंपराओं या त्योहारों से जुड़ी किसी भी भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था। ब्रांड के मुताबिक, उसका कैंपेन परिवार के साथ त्योहार मनाने और उस खुशी को पालतू जानवरों तक पहुंचाने के विचार पर आधारित था।
GIVA ने अपने बयान में कहा कि अगर विज्ञापन से समाज के किसी वर्ग की भावनाएं अनजाने में आहत हुई हैं तो ऐसा करना उसका उद्देश्य नहीं था। सम्मान के तौर पर कंपनी ने सभी मीडिया प्लेटफॉर्म से विज्ञापन हटाने का फैसला किया।
कृति सेनन ने भी दिया था करारा जवाब
विज्ञापन को लेकर हो रही आलोचना के बाद कृति सेनन ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपना पक्ष रखा था। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी दूसरी महिला के कपड़ों से किसी व्यक्ति को इतनी परेशानी क्यों होनी चाहिए।
कृति ने महिलाओं के पहनावे को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोगों को अपनी सोच बदलने की जरूरत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विज्ञापन में उन्होंने खुद राखी बांधी थी और उनके लिए रक्षाबंधन का महत्व कपड़ों से कहीं अधिक भावनाओं और रिश्तों से जुड़ा है।
कृति ने रक्षाबंधन को सुरक्षा, प्यार और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने का त्योहार बताया। उन्होंने कहा कि वह और उनकी बहन भी एक-दूसरे को राखी बांधती हैं और एक-दूसरे की सेहत, खुशी और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं।
‘संस्कृति दिल में होती है, नेकलाइन में नहीं’
कृति सेनन ने महिलाओं के पहनावे को लेकर होने वाली सामाजिक टिप्पणियों पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि समय के साथ एथनिक फैशन में काफी बदलाव आया है, लेकिन आज भी किसी महिला के अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान को उसके कपड़ों से जोड़कर देखा जाता है।
उन्होंने अपने बयान में यह संदेश दिया कि संस्कृति और परंपराओं का संबंध व्यक्ति की भावनाओं और मूल्यों से होना चाहिए, केवल उसके पहनावे से नहीं।
कृति के इसी रुख और मधु चोपड़ा की ‘कुछ सीमाएं जरूरी हैं’ वाली टिप्पणी ने रक्षाबंधन विज्ञापन से शुरू हुई बहस को और चर्चा में ला दिया है। अब सोशल मीडिया पर एक तरफ जहां कृति की बात का समर्थन करने वाले लोग हैं, वहीं दूसरी ओर मधु चोपड़ा के बयान को सही ठहराने वाले यूजर्स भी नजर आ रहे हैं।


