Ganga Expressway to Haridwar: उत्तर प्रदेश सरकार ने गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक बढ़ाने की योजना को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार, 25 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। प्रस्तावित विस्तार की कुल लंबाई करीब 130 किलोमीटर होगी, जिसमें लगभग 100 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश और 30 किलोमीटर हिस्सा उत्तराखंड में आएगा। इस परियोजना पर करीब ₹10,761 करोड़ खर्च होने का अनुमान है और इसका पूरा खर्च उत्तर प्रदेश सरकार वहन करेगी।
प्रयागराज और हरिद्वार के बीच बनेगा सीधा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर
गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार के बाद प्रयागराज और हरिद्वार के बीच एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए सीधी और तेज कनेक्टिविटी विकसित होगी। यह दोनों प्रमुख धार्मिक नगरियों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण सड़क गलियारा होगा।
मौजूदा समय में उत्तराखंड की सीमा से सटे बिजनौर जिले से हरिद्वार जाने के लिए मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार मार्ग प्रमुख विकल्पों में शामिल है। नए एक्सप्रेसवे से बिजनौर और आसपास के क्षेत्रों को हरिद्वार के साथ अधिक बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
6 लेन का होगा एक्सप्रेसवे, 8 लेन तक विस्तार की गुंजाइश
प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को शुरुआत में छह लेन का बनाया जाएगा। भविष्य में ट्रैफिक बढ़ने की स्थिति में इसे आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा।
सरकार का उद्देश्य ऐसा आधुनिक एक्सप्रेसवे नेटवर्क तैयार करना है, जिससे लंबी दूरी के यातायात को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाया जा सके। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जाएगी। इसके बाद जमीन, निर्माण और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं से जुड़ी कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
₹10,761 करोड़ का आएगा खर्च
गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार विस्तार पर करीब ₹10,761 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। खास बात यह है कि इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार से किसी वित्तीय सहायता का प्रस्ताव नहीं है। परियोजना का पूरा खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब परियोजना की विस्तृत योजना, निर्माण से जुड़ी तकनीकी तैयारियां और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।
दो कुंभ नगरियों को जोड़ेगा गंगा एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रयागराज और हरिद्वार दोनों ही देश के प्रमुख धार्मिक केंद्र हैं और कुंभ जैसे बड़े आयोजनों के कारण यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
एक्सप्रेसवे बनने के बाद दोनों शहरों के बीच सड़क संपर्क तेज होने की उम्मीद है। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यात्रा में सुविधा मिल सकती है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से रास्ते में आने वाले क्षेत्रों में होटल, परिवहन, पर्यटन और अन्य सेवाओं से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
बिजनौर और लखनऊ से भी बेहतर होगी कनेक्टिविटी
हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे पहुंचने से बिजनौर जिले को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी से बिजनौर को हरिद्वार के अलावा उत्तर प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
सरकार के अनुसार, इस परियोजना का असर व्यापार और निवेश पर भी पड़ सकता है। बेहतर सड़क नेटवर्क से औद्योगिक गतिविधियों, लॉजिस्टिक्स और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलने की संभावना है। निर्माण कार्य के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
594 किमी लंबा है मौजूदा गंगा एक्सप्रेसवे
उत्तर प्रदेश का मौजूदा गंगा एक्सप्रेसवे करीब 594 किलोमीटर लंबा है और यह मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है। इसे राज्य के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में शामिल किया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को हरदोई में 594 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। अब इसे हरिद्वार तक बढ़ाने की योजना से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच एक नया एक्सप्रेसवे कॉरिडोर विकसित होने की उम्मीद है।
कब शुरू होगा निर्माण?
कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन हरिद्वार विस्तार के निर्माण की अंतिम समयसीमा अभी तय नहीं हुई है। सरकार की ओर से अब DPR तैयार करने समेत परियोजना की आगे की औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।
DPR और अन्य तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद जमीन अधिग्रहण, निर्माण एजेंसी तथा काम शुरू करने की समयसीमा को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी। इसलिए फिलहाल परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी मिलने को शुरुआती महत्वपूर्ण चरण माना जा सकता है।
क्या होगा फायदा?
गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है:
- प्रयागराज और हरिद्वार के बीच तेज सड़क कनेक्टिविटी विकसित होगी।
- बिजनौर से हरिद्वार का सफर अधिक सुगम हो सकता है।
- धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।
- व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
- लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को बेहतर सड़क नेटवर्क मिल सकता है।
- निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
- उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।
कुल मिलाकर, गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक बढ़ाने की योजना उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को उत्तराखंड तक विस्तार देने की दिशा में अहम कदम है। परियोजना पूरी होने के बाद प्रयागराज से हरिद्वार के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ-साथ बिजनौर और आसपास के क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।


