Ram Mandir Chanda Chori Case: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े मामले की जांच अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। विशेष जांच दल (SIT) ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े 30 बैंक लॉकरों में रखी संपत्तियों और दस्तावेजों का फॉरेंसिक सत्यापन शुरू कर दिया है। टीम लॉकरों में मौजूद सामान का ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज इन्वेंट्री से मिलान कर रही है। पूरी प्रक्रिया की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, SIT ने मंगलवार, 26 अगस्त को भी अपनी जांच जारी रखी। जांच टीम लॉकर खोलने से लेकर उसमें मौजूद प्रत्येक वस्तु के सत्यापन तक हर चरण को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाद में जांच के दौरान किसी भी भौतिक साक्ष्य की प्रामाणिकता पर सवाल न उठे।
30 बैंक लॉकरों में क्या तलाश रही है SIT?
SIT की जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि राम मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड में जिन वस्तुओं और संपत्तियों का विवरण दर्ज है, वे वास्तव में बैंक लॉकरों में मौजूद हैं या नहीं। टीम सामान की संख्या, पहचान और स्थिति का मिलान संबंधित दस्तावेजों से कर रही है।
फॉरेंसिक सत्यापन के दौरान प्रत्येक वस्तु को रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी से क्रॉस-चेक किया जा रहा है। यदि किसी सामान की संख्या, विवरण या उपलब्धता में अंतर मिलता है, तो उसे जांच का हिस्सा बनाया जाएगा।
इस प्रक्रिया से जांच टीम को कागजी रिकॉर्ड और वास्तविक रूप से मौजूद संपत्तियों के बीच संभावित अंतर का पता लगाने में मदद मिलेगी।
हर सामान की हो रही ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग
लॉकरों की जांच को पारदर्शी और प्रमाणिक बनाए रखने के लिए SIT प्रत्येक महत्वपूर्ण प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रही है। लॉकर खोलने से लेकर उसमें मौजूद सामान की पहचान और सत्यापन तक पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
सामान की पहचान, उसकी संख्या, रिकॉर्ड में दर्ज विवरण और मौके पर उसकी मौजूदगी को भी दस्तावेज के रूप में सुरक्षित किया जा रहा है। जांच एजेंसी इस दौरान केवल कागजी दस्तावेजों पर निर्भर रहने के बजाय भौतिक साक्ष्यों का भी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर रही है।
पेन ड्राइव में सुरक्षित होंगे डिजिटल साक्ष्य
फॉरेंसिक जांच के दौरान तैयार किए जा रहे वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित तरीके से संरक्षित किया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, जांच से जुड़े दस्तावेजों और वीडियो रिकॉर्ड को पेन ड्राइव में संकलित करने की तैयारी है।
SIT अपनी जांच रिपोर्ट के साथ इन डिजिटल साक्ष्यों को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश कर सकती है। इससे न्यायिक प्रक्रिया में जांच के दौरान रिकॉर्ड किए गए भौतिक साक्ष्यों को भी शामिल किया जा सकेगा।
सितंबर के पहले सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट देने की तैयारी
SIT की जांच अब अंतिम चरण में बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, टीम सितंबर के पहले सप्ताह में अपनी अंतिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर सकती है। वहीं, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक 2 सितंबर को प्रस्तावित है।
रिपोर्टों में संभावना जताई गई है कि इसी अवधि के आसपास SIT अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में सौंप सकती है। हालांकि, रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तारीख को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
रिकॉर्ड और लॉकर में मौजूद सामान के मिलान पर नजर
30 बैंक लॉकरों का फॉरेंसिक सत्यापन इस मामले में इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज संपत्तियों और वास्तविक रूप से मौजूद सामान की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
जांच टीम यह देख रही है कि रिकॉर्ड में दर्ज प्रत्येक वस्तु मौके पर उपलब्ध है या नहीं। साथ ही किसी वस्तु के विवरण, संख्या या स्थिति में अंतर मिलने पर उसे भी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
SIT की अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आए और आगे की कानूनी कार्रवाई किस दिशा में बढ़ेगी।
आरोपियों के वकील ने BNS की धाराओं पर उठाए सवाल
इसी मामले में आरोपियों की ओर से पेश वकील कुल शेखर सिंह ने मंगलवार को विशेष अदालत में पुलिस की ओर से लगाई गई धाराओं पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मामले में चोरी और गबन से संबंधित धाराएं एक साथ लगाई गई हैं, जबकि उनके मुताबिक दोनों धाराओं को एक साथ लागू नहीं किया जा सकता।
सिंह ने अयोध्या के विशेष जज (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रजत वर्मा की अदालत में यह दलील दी। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने आरोपियों को लोक सेवक के रूप में पेश किया है, जबकि राम मंदिर ट्रस्ट लोक प्राधिकरण नहीं है।
वकील के मुताबिक, पुलिस ने आरोपियों पर सार्वजनिक संपत्ति के गबन से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अगली सुनवाई के लिए 2 सितंबर की तारीख तय की गई है।
जून में SIT ने सौंपी थी प्रारंभिक रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया था। SIT ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद मामले में FIR दर्ज की गई और मंदिर में चढ़ावे की गिनती से जुड़ी प्रक्रिया में शामिल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया।
जांच आगे बढ़ने के साथ इसका दायरा भी बढ़ाया गया। पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए।
अब 30 बैंक लॉकरों के फॉरेंसिक सत्यापन और डिजिटल साक्ष्यों के संकलन के बाद SIT की अंतिम रिपोर्ट पर सबकी नजर है। रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने के बाद ही मामले की जांच से जुड़े कई अहम सवालों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।


