Fertilizer Stocks: फर्टिलाइजर कंपनियों के शेयरों में मंगलवार, 25 अगस्त को जोरदार खरीदारी देखने को मिली। FACT का शेयर करीब 17% तक उछल गया, जबकि RCF, Madras Fertilizers, Paradeep Phosphates और National Fertilizers में भी तेजी रही। इस तेजी के पीछे रूस से फर्टिलाइजर सप्लाई को लेकर आया बड़ा बयान अहम वजह माना जा रहा है।
Fertilizer Stocks: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 25 अगस्त को फर्टिलाइजर कंपनियों के शेयर निवेशकों के रडार पर रहे। खास तौर पर Fertilizers and Chemicals Travancore (FACT) के शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। कारोबारी सत्र के दौरान FACT का शेयर करीब 17% तक चढ़ गया। इसके अलावा Rashtriya Chemicals and Fertilizers (RCF), Madras Fertilizers, Paradeep Phosphates और National Fertilizers के शेयरों में भी तेजी देखने को मिली।
फर्टिलाइजर शेयरों में आई इस तेजी को समझने के लिए सिर्फ घरेलू बाजार को देखना काफी नहीं है। इसके पीछे वैश्विक स्तर पर फर्टिलाइजर्स की सप्लाई, ऊर्जा कीमतों और रूस की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। खासकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से भारत को फर्टिलाइजर और एनर्जी की पर्याप्त सप्लाई जारी रखने के आश्वासन को बाजार ने सकारात्मक संकेत के तौर पर लिया है।
FACT के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी
25 अगस्त को फर्टिलाइजर सेक्टर में FACT के शेयर सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। दोपहर करीब 1 बजे कंपनी का शेयर लगभग 16% की तेजी के साथ 910 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। बाद में भी शेयर में मजबूत खरीदारी बनी रही।
वहीं Paradeep Phosphates के शेयर में करीब 4.56% की तेजी देखी गई और यह 156.10 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। कंपनी का शेयर पिछले छह महीनों में 34% से ज्यादा मजबूत हो चुका है।
Rashtriya Chemicals and Fertilizers के शेयरों में भी करीब 6% की तेजी रही और यह 126 रुपये के आसपास पहुंच गया। इसी तरह Madras Fertilizers करीब 7% चढ़कर 70 रुपये के आसपास कारोबार करता नजर आया।
National Fertilizers के शेयर में भी करीब 4% की तेजी दर्ज की गई। यानी मंगलवार को सिर्फ एक कंपनी नहीं, बल्कि पूरे फर्टिलाइजर सेक्टर में खरीदारी का रुझान दिखाई दिया।
आखिर रूस और पुतिन का फर्टिलाइजर शेयरों से क्या कनेक्शन है?
भारत अपनी फर्टिलाइजर जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में फर्टिलाइजर की कीमतों और सप्लाई में होने वाला बदलाव सीधे भारतीय कंपनियों और किसानों पर असर डाल सकता है।
इसी बीच भारत और रूस के बीच फर्टिलाइजर सप्लाई को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 24 अगस्त को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में फर्टिलाइजर और ऊर्जा समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
रूस की सरकारी न्यूज एजेंसी TASS की रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन ने भारत को फर्टिलाइजर और ऊर्जा की पर्याप्त सप्लाई का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि रूस भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए सप्लाई बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है और आगे भी ऐसा करने के लिए तैयार है।
यही बयान भारतीय फर्टिलाइजर सेक्टर के लिए सकारात्मक माना जा रहा है। अगर भारत को रूस से फर्टिलाइजर्स की सप्लाई लगातार मिलती रहती है, तो वैश्विक सप्लाई को लेकर बनी चिंता कुछ कम हो सकती है।
अमेरिका-ईरान तनाव से क्यों बढ़ी चिंता?
फर्टिलाइजर शेयरों में तेजी का एक बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर कमोडिटी सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता भी है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने ऊर्जा और अन्य कमोडिटीज की सप्लाई को लेकर बाजार की चिंता बढ़ाई है।
फर्टिलाइजर उद्योग का ऊर्जा बाजार से गहरा संबंध है। खासकर प्राकृतिक गैस और LNG यूरिया उत्पादन में महत्वपूर्ण कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल होते हैं। इसलिए जब ऊर्जा की कीमतों में तेजी आती है, तो फर्टिलाइजर के उत्पादन की लागत पर भी दबाव पड़ सकता है।
भारत जैसे देश के लिए यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि देश को घरेलू उत्पादन के साथ-साथ फर्टिलाइजर का आयात भी करना पड़ता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और सप्लाई में बदलाव का असर सरकार के सब्सिडी बिल पर भी पड़ सकता है।
फर्टिलाइजर सब्सिडी पर सरकार का बढ़ रहा खर्च
फर्टिलाइजर सेक्टर से जुड़ी एक और बड़ी बात सरकार का बढ़ता सब्सिडी खर्च है। वैश्विक बाजार में फिनिश्ड फर्टिलाइजर्स और LNG की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। LNG का इस्तेमाल भारत में यूरिया के उत्पादन के लिए किया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती साढ़े चार महीनों में फर्टिलाइजर सब्सिडी पर सरकार का खर्च पिछले साल की तुलना में करीब 56% बढ़ गया है। इस अवधि में सरकार करीब 99,000 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में फर्टिलाइजर सब्सिडी के लिए करीब 1.77 लाख करोड़ रुपये का अनुमान रखा है। हालांकि, अगर अंतरराष्ट्रीय फर्टिलाइजर और ऊर्जा कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकार का वास्तविक खर्च बजट अनुमान से अधिक जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
रूस भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
रूस वैश्विक फर्टिलाइजर बाजार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से ऊर्जा और कमोडिटी सेक्टर में व्यापारिक संबंध रहे हैं। ऐसे में रूस से फर्टिलाइजर की नियमित सप्लाई भारत के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।
भारत की कोशिश रहती है कि फर्टिलाइजर की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और किसानों को समय पर खाद मिल सके। इसके लिए सरकार कई देशों से आयात स्रोतों को बनाए रखने के साथ-साथ सप्लाई को डायवर्सिफाई करने पर भी ध्यान देती है।
जयशंकर और पुतिन की बातचीत में भी मुश्किल वैश्विक परिस्थितियों के बीच दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं, भारत के लिए भरोसेमंद सप्लाई पार्टनर महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
किन Fertilizer Stocks पर नजर रही?
25 अगस्त के कारोबार में कई फर्टिलाइजर कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली।
FACT: Fertilizers and Chemicals Travancore के शेयरों में सेक्टर की सबसे तेज तेजी देखने को मिली और यह इंट्राडे करीब 17% तक उछला।
Paradeep Phosphates: कंपनी का शेयर करीब 4.5% से ज्यादा मजबूत हुआ। पिछले छह महीनों में इसमें 34% से अधिक की तेजी दर्ज की जा चुकी है।
RCF: Rashtriya Chemicals and Fertilizers के शेयर में करीब 6% की तेजी देखने को मिली।
Madras Fertilizers: कंपनी का शेयर करीब 7% तक मजबूत हुआ।
National Fertilizers: इसके शेयरों में भी लगभग 4% की तेजी रही।
इस तरह मंगलवार को फर्टिलाइजर सेक्टर में व्यापक खरीदारी देखने को मिली। बाजार की नजर अब वैश्विक सप्लाई परिस्थितियों और भारत को मिलने वाली फर्टिलाइजर सप्लाई पर बनी रह सकती है।
क्या Fertilizer Stocks में तेजी आगे भी जारी रह सकती है?
फर्टिलाइजर कंपनियों के शेयरों में मंगलवार की तेजी को सिर्फ एक दिन के मूवमेंट के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। इस सेक्टर के लिए कई वैश्विक और घरेलू फैक्टर महत्वपूर्ण हैं।
सबसे बड़ा फैक्टर फर्टिलाइजर की अंतरराष्ट्रीय कीमतें हैं। इसके बाद प्राकृतिक गैस और LNG की कीमतें, रूस समेत प्रमुख देशों से सप्लाई, भारत की आयात जरूरत, सरकारी सब्सिडी और किसानों के लिए फर्टिलाइजर की उपलब्धता अहम भूमिका निभाते हैं।
अगर रूस से भारत को फर्टिलाइजर की पर्याप्त और नियमित सप्लाई जारी रहती है तथा वैश्विक बाजार में सप्लाई संबंधी चिंताएं कम होती हैं, तो यह भारतीय फर्टिलाइजर सेक्टर के लिए सकारात्मक हो सकता है। दूसरी ओर, ऊर्जा कीमतों में तेज बढ़ोतरी या वैश्विक सप्लाई में नई बाधा कंपनियों की लागत और सरकार के सब्सिडी खर्च पर दबाव बढ़ा सकती है।
इसलिए निवेशकों को केवल एक दिन की तेजी देखकर किसी फर्टिलाइजर शेयर में निवेश करने के बजाय कंपनी की कमाई, वैल्यूएशन, कर्ज, उत्पादन क्षमता, सरकारी नीतियों और वैश्विक फर्टिलाइजर कीमतों का भी आकलन करना चाहिए।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
25 अगस्त की तेजी ने एक बार फिर दिखाया है कि भारतीय फर्टिलाइजर कंपनियों के शेयरों पर वैश्विक घटनाक्रम का कितना असर पड़ सकता है। रूस की ओर से भारत को फर्टिलाइजर सप्लाई का भरोसा मिलने से बाजार में सकारात्मक सेंटीमेंट बना है।
हालांकि, शेयर बाजार में किसी भी तेजी को सीधे निवेश का संकेत नहीं माना जा सकता। FACT और दूसरे फर्टिलाइजर शेयरों में पहले से तेज उछाल आ चुका है, इसलिए आगे इनमें उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन जरूर करें।


