Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार के लिए नया कारोबारी सप्ताह कई अहम घटनाक्रमों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है। बाजार की दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया के हालात, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और रुपये की चाल अहम भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा निवेशकों की नजर जैक्सन होल आर्थिक संगोष्ठी और अमेरिकी फेड प्रमुख की टिप्पणियों पर भी रहेगी।
पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स 468.42 अंक गिरा, जबकि निफ्टी में करीब 114 अंकों की कमजोरी रही। ऐसे में लगातार दो सप्ताह की गिरावट के बाद निवेशक यह जानना चाहेंगे कि नए सप्ताह में बाजार स्थिर होगा या फिर बिकवाली का दबाव जारी रहेगा।
जैक्सन होल पर बाजार की नजर
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा के मुताबिक, इस सप्ताह निवेशकों का प्रमुख फोकस जैक्सन होल आर्थिक संगोष्ठी पर रहेगा। खासतौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख के संबोधन से ब्याज दरों की आगामी दिशा को लेकर संकेत मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका में महंगाई और रोजगार बाजार से जुड़े आंकड़े फेड के लिए अभी भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में फेड प्रमुख की टिप्पणियों से सितंबर की मौद्रिक नीति बैठक से पहले बाजार को यह अंदाजा मिल सकता है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर किस दिशा में आगे बढ़ सकता है।
अमेरिकी GDP अनुमान, ड्यूरेबल गुड्स ऑर्डर और कंज्यूमर कॉन्फिडेंस जैसे आंकड़े भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। इन आंकड़ों से दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मिलेगा और इसका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमत बनी रहेगी बड़ा जोखिम
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमत इस सप्ताह भी सबसे महत्वपूर्ण बाहरी संकेतकों में से एक रहेगी। ब्रेंट क्रूड पहले ही 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से देश के आयात बिल, रुपये, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, अगर क्रूड में नरमी आती है तो भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रम ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। पश्चिम एशिया में किसी भी नए घटनाक्रम का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव भी महत्वपूर्ण
वैश्विक निवेशक अमेरिका-ईरान तनाव पर भी लगातार नजर रखेंगे। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आ सकती है। इससे वैश्विक बाजारों में जोखिम बढ़ सकता है और निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर सकते हैं।
इसके उलट तनाव कम होने के संकेत मिलने पर तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों पर दबाव कुछ कम हो सकता है। यही वजह है कि इस सप्ताह भू-राजनीतिक घटनाक्रम शेयर बाजार के लिए एक बड़ा ट्रिगर रहेगा।
Nvidia के नतीजे भी देंगे संकेत
इस सप्ताह वैश्विक टेक्नोलॉजी शेयरों के लिहाज से Nvidia के तिमाही नतीजे भी अहम रहेंगे। AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में Nvidia की स्थिति को देखते हुए उसके नतीजों और भविष्य के आउटलुक का असर अमेरिकी टेक शेयरों के साथ-साथ दुनिया के दूसरे बाजारों पर भी पड़ सकता है।
अगर कंपनी के नतीजे और गाइडेंस बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहते हैं तो टेक्नोलॉजी शेयरों में सकारात्मक सेंटीमेंट बन सकता है। वहीं कमजोर आउटलुक से ग्लोबल इक्विटी मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
FPI की खरीदारी पर भी नजर
भारतीय बाजार के लिए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। अगस्त में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 23,544 करोड़ रुपये लगाए हैं।
इससे पहले जुलाई में FPI ने भारतीय शेयरों में करीब 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इससे पहले लगातार चार महीनों तक विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली देखने को मिली थी।
कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे, रुपये में अपेक्षाकृत स्थिरता और भारतीय बाजार की संभावनाओं को लेकर बेहतर धारणा विदेशी निवेशकों के रुख में सुधार की वजह बन सकती है।
रुपये की चाल भी अहम
डॉलर के मुकाबले रुपये में होने वाली हलचल का असर भी बाजार पर पड़ सकता है। रुपये में कमजोरी से आयात पर निर्भर कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, जबकि निर्यात आधारित कुछ कंपनियों को फायदा मिल सकता है।
निवेशक इस सप्ताह डॉलर-रुपया, विदेशी निवेश और घरेलू बाजार में नकदी के प्रवाह को भी करीब से ट्रैक करेंगे।
क्या इस सप्ताह संभल सकता है निफ्टी?
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका के मुताबिक, निफ्टी में लगातार दो सप्ताह गिरावट देखने को मिली है। ऐसे में मौजूदा स्तरों से बाजार में कुछ स्थिरता और निकट अवधि में मामूली रिकवरी की संभावना बन सकती है।
हालांकि बाजार के लिए बाहरी जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। खासकर ब्रेंट क्रूड का 90 डॉलर से ऊपर रहना, पश्चिम एशिया का तनाव और अमेरिकी फेड की नीति को लेकर अनिश्चितता बाजार में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकती है।
इस सप्ताह बाजार के 5 बड़े ट्रिगर
- जैक्सन होल संगोष्ठी और फेड प्रमुख का भाषण
- ब्रेंट क्रूड की कीमत और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रम
- अमेरिका-ईरान तनाव
- Nvidia के तिमाही नतीजे
- FPI की खरीदारी और रुपये की चाल
कुल मिलाकर, लगातार दो सप्ताह की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह स्थिरता और मामूली रिकवरी की उम्मीद की जा रही है। हालांकि कच्चे तेल और पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम बाजार की दिशा को तेजी से बदल सकते हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए ग्लोबल संकेतों के साथ-साथ विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और घरेलू बाजार की मजबूती पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
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