Hyderabad Building Collapse: हैदराबाद के अंजैया नगर में शनिवार को एक निर्माणाधीन सात मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के घायल होने की खबर है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। राहत और बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू कर दी।
अंजैया नगर में अचानक ढह गई सात मंजिला इमारत
यह हादसा हैदराबाद के अंजैया नगर इलाके में हुआ, जो माधापुर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है। जानकारी के मुताबिक, जिस इमारत का निर्माण चल रहा था, वह अचानक भरभराकर नीचे आ गई। घटना के बाद आसपास के इलाके में धूल और मलबा फैल गया।
राहत एवं बचाव दलों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मलबे को हटाने का काम शुरू किया। अधिकारियों की प्राथमिकता यह पता लगाना है कि मलबे के नीचे कोई और व्यक्ति फंसा हुआ तो नहीं है। हादसे में घायल लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है।
करीब 50 वर्ग गज के प्लॉट पर हो रहा था निर्माण
खबरों के अनुसार, यह निर्माणाधीन इमारत करीब 50 वर्ग गज के प्लॉट पर बनाई जा रही थी। खास बात यह है कि इमारत एक नाले के पास स्थित थी। इस वजह से निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अधिकारियों की जांच में यह पता लगाया जाएगा कि भवन निर्माण के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं। साथ ही यह भी जांच होगी कि निर्माण के दौरान स्वीकृत नक्शे और स्थानीय भवन नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
हालांकि, फिलहाल प्रशासन ने इमारत गिरने की अंतिम वजह की पुष्टि नहीं की है। ढांचे की कमजोरी, निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, नींव से जुड़ी समस्या या नियमों के संभावित उल्लंघन समेत कई पहलुओं की जांच की जा सकती है।
आसपास की इमारतों को भी हुआ नुकसान
इमारत गिरने से आसपास मौजूद संपत्तियां भी प्रभावित हुई हैं। बताया जा रहा है कि गिरने वाली इमारत का मलबा पास के एक अपार्टमेंट पर जा गिरा, जिससे उसे काफी नुकसान पहुंचा।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पास स्थित एक हॉस्टल को भी खाली कराया गया। प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि क्षतिग्रस्त इमारतों में लोगों की आवाजाही से कोई और हादसा न हो।
फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं है कि हादसे के समय निर्माणाधीन इमारत में कुल कितने मजदूर या अन्य लोग मौजूद थे। बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
निर्माण नियमों की होगी जांच
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल इमारत के निर्माण की अनुमति और सुरक्षा मानकों को लेकर है। अधिकारियों की विस्तृत जांच में यह देखा जाएगा कि निर्माण स्वीकृत योजना के मुताबिक हो रहा था या नहीं।
इसके अलावा इमारत की संरचनात्मक मजबूती, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, नींव और आसपास की जमीन की स्थिति जैसे पहलुओं की भी जांच की जा सकती है। अगर नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई संभव है।
हैदराबाद में पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
हैदराबाद और तेलंगाना में निर्माणाधीन इमारतों से जुड़े हादसे पहले भी सामने आ चुके हैं। मार्च 2026 में टोलिचौकी इलाके में एक निर्माणाधीन इमारत की स्कैफोल्डिंग गिरने से दो मजदूरों की मौत हो गई थी।
डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आया था कि इमारत के लिए सिर्फ दो मंजिल बनाने की अनुमति मिली थी, जबकि कथित तौर पर चार अतिरिक्त मंजिल और एक पेंटहाउस का निर्माण किया गया था। हादसे के समय मजदूर छठी मंजिल पर काम कर रहे थे।
वहीं, मार्च 2025 में तेलंगाना के भद्राचलम में भी निर्माणाधीन छह मंजिला इमारत का ऊपरी हिस्सा ढह गया था। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया था कि ऊपरी मंजिलों का निर्माण कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से किया गया था। हादसे के बाद कम से कम दो मजदूरों की मौत की आशंका जताई गई थी।
जांच के बाद सामने आएगी हादसे की असली वजह
अंजैया नगर की ताजा घटना में फिलहाल राहत और बचाव अभियान सबसे अहम है। इसके बाद प्रशासन और संबंधित विभाग इमारत के निर्माण से जुड़े दस्तावेजों और सुरक्षा मानकों की जांच करेंगे।
सात मंजिला इमारत के अचानक गिरने की वास्तविक वजह विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि हादसा निर्माण में तकनीकी खामी, संरचनात्मक कमजोरी, नियमों के उल्लंघन या किसी अन्य कारण से हुआ।


