Foreign Trade Policy Changes: भारत ने विदेश व्यापार नीति में अहम बदलाव किया है। इस संशोधन से भारतीय निर्यातकों के लिए विदेशी कारोबार का इनवॉइस भारतीय रुपये में बनाना और रुपये में भुगतान प्राप्त करना आसान होगा। सरकार के इस कदम का उद्देश्य कारोबार में ज्यादा लचीलापन लाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारतीय रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
उद्योग जगत ने विदेश व्यापार नीति में किए गए इन बदलावों का स्वागत किया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के मुताबिक, नए प्रावधानों से एक्सपोर्टर्स को व्यापारिक लेन-देन में ज्यादा सुविधा और निश्चितता मिलेगी।
रुपये में पेमेंट पाना होगा आसान
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) की ओर से किए गए संशोधनों के बाद निर्यातकों के लिए विदेशी व्यापार में भारतीय रुपये में इनवॉइसिंग और भुगतान हासिल करने का रास्ता आसान हुआ है। इसका सीधा फायदा उन कंपनियों को मिल सकता है जो विदेशी खरीदारों के साथ रुपये में व्यापार करना चाहती हैं।
CII की EXIM पर नेशनल कमेटी के चेयरमैन और पैटन इंटरनेशनल के मैनेजिंग डायरेक्टर संजय बुधिया ने इस बदलाव का स्वागत किया। उनके मुताबिक, भारतीय उद्योग वैश्विक व्यापार में देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने और एक्सपोर्ट इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सरकार के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन पूरा करने में भी फायदा
नए प्रावधानों का एक महत्वपूर्ण फायदा एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन को लेकर है। नेपाल और भूटान को छोड़कर, मंजूर बैंकिंग चैनलों के जरिए भारतीय रुपये में प्राप्त होने वाली निर्यात आय को विदेश व्यापार नीति के तहत मिलने वाले लाभों के लिए योग्य माना जाएगा।
रुपये में मिलने वाली यह निर्यात आय विदेशी मुद्रा में प्राप्त होने वाली आय की तरह ही एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन पूरा करने के लिए गिनी जाएगी। इससे उन निर्यातकों को राहत मिल सकती है जो रुपये में अंतरराष्ट्रीय भुगतान लेने का विकल्प चुनते हैं।
सरकार ने विदेश व्यापार नीति में क्या बदला?
विदेश व्यापार नीति में किए गए बदलावों के तहत निर्यातकों को विदेशी व्यापार सौदों में भारतीय रुपये में बिलिंग और भुगतान की सुविधा दी गई है। इसके प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:
1. FTP बेनिफिट्स में मिलेगी बराबरी
अधिकृत बैंकिंग चैनलों के जरिए भारतीय रुपये में प्राप्त निर्यात भुगतान को विदेशी मुद्रा में होने वाली आय के बराबर माना जाएगा। यानी रुपये में प्राप्त भुगतान को एक्सपोर्ट इंसेंटिव और विदेश व्यापार नीति के तहत मिलने वाले अन्य लाभों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
साथ ही, इस आय को संबंधित निर्यात दायित्वों की पूर्ति में भी शामिल किया जाएगा।
2. इनवॉइसिंग में ज्यादा आजादी
एशियन क्लियरिंग यूनियन (ACU) के बाहर के देशों के साथ व्यापार करने वाले निर्यातकों को अब भारतीय रुपये या अपनी पसंद की किसी विदेशी मुद्रा में व्यापारिक अनुबंध तय करने की ज्यादा स्वतंत्रता मिलेगी।
इससे निर्यातकों को विदेशी खरीदारों के साथ भुगतान की शर्तें तय करने में अधिक लचीलापन मिल सकता है।
3. FEMA और RBI के नियमों से बेहतर तालमेल
विदेश व्यापार नीति में किए गए बदलावों को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) और RBI के 2023 में जारी नियमों के अनुरूप किया गया है। इससे रुपये में होने वाले अंतरराष्ट्रीय लेन-देन को लेकर मौजूद कुछ प्रक्रियात्मक अनिश्चितताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, नेपाल और भूटान के साथ व्यापार के लिए अलग प्रावधान लागू रहेंगे।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये को बढ़ावा देने की कोशिश
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारतीय रुपये के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। रुपये में व्यापार और सेटलमेंट को बढ़ावा मिलने से भारतीय कंपनियों को कुछ मामलों में विदेशी मुद्रा पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिल सकता है।
CII ने भी इस बदलाव को रुपये के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में एक और कदम बताया है। इससे निर्यातकों को भुगतान के विकल्प बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में कारोबार करने के लिए अधिक लचीलापन मिल सकता है।
एक्सपोर्टर्स के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह है कि भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भुगतान और इनवॉइसिंग के लिए रुपये का इस्तेमाल करने की अधिक सुविधा मिलेगी। साथ ही, रुपये में मिलने वाली पात्र निर्यात आय को FTP के तहत मिलने वाले लाभों और एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन की गणना में शामिल किया जा सकेगा।
सरकार की यह पहल भारत के विदेशी व्यापार ढांचे को सरल बनाने और वैश्विक कारोबार में रुपये की भूमिका बढ़ाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा मानी जा रही है। इससे आने वाले समय में भारतीय रुपये में होने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार को और गति मिलने की उम्मीद है।


