भारत अपनी एलपीजी सप्लाई को मजबूत करने के साथ-साथ आयात के लिए अलग-अलग देशों पर निर्भरता बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में देश की सबसे बड़ी रिफाइनिंग और फ्यूल रिटेल कंपनियों में शामिल इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने अल्जीरिया की सरकारी ऊर्जा कंपनी सोनाट्रैक (Sonatrach) के साथ एक अहम एलपीजी इम्पोर्ट डील की है। इस समझौते के तहत 2027 से भारत को हर महीने अल्जीरिया से एलपीजी की एक बड़ी खेप मिल सकती है।
जानकारी रखने वाले ट्रेड सूत्रों के मुताबिक, इस डील के तहत IOC हर महीने एक बड़े गैस कैरियर के जरिए करीब 45,000 से 55,000 टन एलपीजी आयात करेगी। यह एलपीजी मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होगी, जिसका इस्तेमाल भारत में घरेलू और कमर्शियल खाना पकाने के लिए किया जाता है।
भारत क्यों बढ़ा रहा है LPG के आयात के स्रोत?
भारत में एलपीजी की मांग लगातार ऊंची बनी हुई है। उज्ज्वला योजना समेत कई सरकारी योजनाओं के कारण देश में घरेलू एलपीजी कनेक्शन की पहुंच बढ़ी है। ऐसे में देश के लिए यह जरूरी हो गया है कि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए एलपीजी की पर्याप्त और भरोसेमंद सप्लाई बनी रहे।
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। लंबे समय से मिडिल ईस्ट भारत के लिए एलपीजी का प्रमुख सप्लाई क्षेत्र रहा है। हालांकि, हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री मार्गों से जुड़ी चुनौतियों ने इस निर्भरता के जोखिम को सामने ला दिया है।
खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में किसी तरह की रुकावट का असर तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई पर पड़ सकता है। ऐसे हालात में भारत के लिए अलग-अलग देशों से एलपीजी खरीदना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।
इसी वजह से अब भारत अल्जीरिया और अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से भी एलपीजी खरीद बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
2027 से हर महीने आएगा एक बड़ा LPG टैंकर
नई डील की सबसे खास बात इसकी नियमित सप्लाई है। सूत्रों के अनुसार, IOC को 2027 से अल्जीरिया से हर महीने एक बड़ा एलपीजी कार्गो मिल सकता है।
हर कार्गो में लगभग 45,000 से 55,000 टन एलपीजी होगी। अगर पूरे साल इस मात्रा के आसपास सप्लाई बनी रहती है, तो सालाना आधार पर अल्जीरिया से भारत आने वाली एलपीजी की मात्रा कई लाख टन तक पहुंच सकती है।
यह सप्लाई प्रोपेन और ब्यूटेन के मिश्रण के रूप में होगी। यही दोनों गैसें घरेलू एलपीजी सिलेंडर में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख घटक हैं।
इसका मतलब यह है कि अल्जीरिया के साथ समझौता केवल एक-दो कार्गो की खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत की लंबी अवधि की एलपीजी सप्लाई रणनीति में भूमिका निभा सकता है।
IOC और Sonatrach के बीच पहले भी रहा है कारोबारी संबंध
सूत्रों के मुताबिक, IOC और Sonatrach के बीच पहले भी एलपीजी सप्लाई का टर्म कॉन्ट्रैक्ट रहा है। हालांकि बाद में IOC ने मिडिल ईस्ट से एलपीजी खरीद पर ज्यादा ध्यान देना शुरू कर दिया था।
अब बदलते वैश्विक ऊर्जा बाजार और सप्लाई जोखिमों के बीच अल्जीरिया से दोबारा नियमित खरीद की दिशा में बढ़ना भारत की रणनीति में बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
अल्जीरिया उत्तरी अफ्रीका का एक प्रमुख तेल और गैस उत्पादक देश है। वहां से एलपीजी की नियमित सप्लाई मिलने से भारत को अपने आयात पोर्टफोलियो में एक और महत्वपूर्ण स्रोत जोड़ने में मदद मिल सकती है।
Saudi Aramco के मुकाबले सस्ती हो सकती है अल्जीरियाई LPG
इस डील का एक और महत्वपूर्ण पहलू इसकी कीमत है। एक सूत्र के मुताबिक, अल्जीरिया से मिलने वाली एलपीजी की कीमत सऊदी अरामको की कॉन्ट्रैक्ट कीमत से कम है।
अगर यह अंतर पर्याप्त रहा तो IOC के लिए यह सौदा आर्थिक रूप से भी फायदेमंद हो सकता है। एलपीजी की खरीद लागत कम होने का असर सरकारी तेल कंपनियों की आयात लागत और घरेलू एलपीजी बाजार की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
हालांकि, केवल गैस की कीमत से ही वास्तविक लागत तय नहीं होती। इसमें समुद्री परिवहन, बीमा, पोर्ट हैंडलिंग और अन्य लॉजिस्टिक्स लागत भी शामिल होती हैं। इसके बावजूद अगर अल्जीरिया से मिलने वाला कार्गो कुल लागत के लिहाज से प्रतिस्पर्धी रहता है, तो भारत के लिए यह एक आकर्षक सप्लाई स्रोत बन सकता है।
FOB आधार पर होगी कार्गो खरीद
सूत्रों के मुताबिक, IOC और Sonatrach के बीच डील Free on Board यानी FOB आधार पर कार्गो उठाने के लिए है।
FOB व्यवस्था में खरीदार को जहाज और आगे के परिवहन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक इंतजाम खुद करने होते हैं। इसलिए IOC के लिए इस डील में केवल एलपीजी की कीमत ही नहीं, बल्कि समुद्री परिवहन और संबंधित खर्च भी महत्वपूर्ण होंगे।
IOC और Sonatrach से इस संबंध में पूछे गए सवालों का Reuters को तत्काल जवाब नहीं मिला था।
जून से शुरू हुआ अल्जीरिया से LPG आयात
शुरुआती LSEG ट्रेड फ्लो आंकड़ों के अनुसार, भारत ने जून 2026 में अल्जीरिया से एलपीजी का आयात शुरू किया था।
आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में भारत को अल्जीरिया से करीब 1.10 लाख टन एलपीजी मिलने की उम्मीद है। इससे पता चलता है कि अल्जीरिया भारत के एलपीजी आयात में पहले ही एक उभरते हुए सप्लायर के तौर पर जगह बना रहा है।
अगर 2027 से IOC की मासिक 45,000-55,000 टन वाली डील नियमित रूप से लागू होती है, तो आने वाले समय में अल्जीरिया से भारत की एलपीजी खरीद मौजूदा स्तर से काफी बढ़ सकती है।
अमेरिका से भी बढ़ा रहा है भारत LPG Import
भारत सिर्फ अल्जीरिया पर ही निर्भर नहीं होना चाहता। मिडिल ईस्ट से सप्लाई में संभावित कमी को पूरा करने के लिए भारतीय कंपनियों ने अमेरिका से भी एलपीजी खरीद बढ़ाई है।
अमेरिका दुनिया के बड़े ऊर्जा उत्पादकों में शामिल है और वहां से एलपीजी की उपलब्धता ने भारत को एक वैकल्पिक सप्लाई स्रोत दिया है।
सूत्रों के अनुसार, भारत 2027 में अपने कुल एलपीजी आयात का करीब एक-चौथाई हिस्सा अमेरिका से खरीदने की योजना पर भी काम कर रहा है।
इस रणनीति को अगर अल्जीरिया से होने वाली नियमित खरीद के साथ देखा जाए तो साफ है कि भारत एलपीजी के लिए अपने आयात स्रोतों का दायरा बढ़ा रहा है।
तीन सरकारी कंपनियां जारी कर सकती हैं संयुक्त टेंडर
भारत की तीन प्रमुख सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां—IOC, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL)—अमेरिका से एलपीजी खरीदने के लिए संयुक्त टेंडर जारी करने की योजना पर भी विचार कर रही हैं।
संयुक्त खरीद से इन कंपनियों को बड़े वॉल्यूम में कार्गो लेने का फायदा मिल सकता है। इससे खरीद की शर्तों और कीमतों पर बेहतर बातचीत की गुंजाइश भी बन सकती है।
भारत के लिए यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि घरेलू एलपीजी की मांग को पूरा करने के लिए आयातित गैस की नियमित उपलब्धता जरूरी है।
घरेलू LPG ग्राहकों पर क्या होगा असर?
अल्जीरिया और अमेरिका जैसे नए स्रोतों से एलपीजी आयात बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा सप्लाई सिक्योरिटी के रूप में देखने को मिल सकता है।
अगर किसी एक क्षेत्र से सप्लाई में अचानक बाधा आती है, तो भारतीय कंपनियां दूसरे स्रोतों से कार्गो मंगाकर कमी को पूरा कर सकती हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय संकट के समय घरेलू एलपीजी बाजार में सप्लाई बाधित होने का जोखिम कम हो सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अल्जीरिया से सस्ती गैस मिलने के साथ घरेलू सिलेंडर की कीमत तुरंत कम हो जाएगी। भारत में घरेलू एलपीजी की कीमत पर अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों के अलावा सरकार की सब्सिडी नीति, टैक्स, मुद्रा विनिमय दर, परिवहन लागत और तेल कंपनियों की लागत जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।
इसलिए इस डील का तत्काल फायदा उपभोक्ताओं को कीमत में दिखाई देने के बजाय पहले सप्लाई की स्थिरता और आयात स्रोतों के विविधीकरण के रूप में मिल सकता है।
भारत की Energy Security के लिए क्यों अहम है यह डील?
भारत दुनिया के बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में शामिल है और अपनी तेल एवं गैस जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है। ऐसे में सप्लाई रूट और सप्लायर देशों में विविधता लाना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
अल्जीरिया के साथ IOC की नई डील इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा दिखाई देती है। एक तरफ भारत मिडिल ईस्ट से मिलने वाली एलपीजी सप्लाई को बनाए रख रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों से भी खरीद बढ़ा रहा है।
इससे भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजार में किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता से बचने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
भारत का नया एलपीजी इम्पोर्ट प्लान देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है। 2027 से IOC द्वारा हर महीने 45,000 से 55,000 टन तक एलपीजी अल्जीरिया से मंगाने की योजना से भारत के पास एक नया नियमित सप्लाई स्रोत जुड़ जाएगा।
इसके साथ अमेरिका से बढ़ती खरीद और तीन सरकारी तेल कंपनियों की संभावित संयुक्त खरीद योजना यह दिखाती है कि भारत एलपीजी आयात को ज्यादा विविध और लचीला बनाने की कोशिश कर रहा है।
मिडिल ईस्ट में किसी भी भू-राजनीतिक तनाव या समुद्री मार्ग में बाधा की स्थिति में यह रणनीति भारत को घरेलू एलपीजी सप्लाई बनाए रखने में मदद कर सकती है। हालांकि, आम उपभोक्ता के लिए इसका असर तुरंत सिलेंडर की कीमत में दिखे, यह जरूरी नहीं है। फिलहाल इस डील का सबसे बड़ा महत्व भारत की LPG Supply Security और Energy Security को मजबूत करने में है।


