Gold Silver Price Today: MCX पर सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। कमजोर अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव, फेड की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें और सुरक्षित निवेश की मांग ने बुलियन मार्केट को सपोर्ट दिया है। MCX पर सोना ₹1.61 लाख और चांदी ₹2.46 लाख के स्तर तक पहुंच गई। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि तेजी आगे भी जारी रहेगी या ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिलेगी।
Gold Silver Price: घरेलू वायदा बाजार में शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर तेजी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुलियन की कीमतों में मजबूत उछाल का असर भारतीय कमोडिटी मार्केट पर भी दिखाई दिया। कमजोर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें और वैश्विक स्तर पर बढ़ी सुरक्षित निवेश की मांग कीमती धातुओं के लिए सकारात्मक साबित हुई।
एक्सचेंज की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को दोपहर 4:55 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोना फ्यूचर्स ₹1,61,405 प्रति 10 ग्राम और चांदी फ्यूचर्स ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। ये क्रमशः 5 अक्टूबर के सोने और 4 सितंबर के चांदी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स की कीमतें हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत करीब तीन महीने के उच्चतम स्तर के आसपास पहुंच गई है। इस तेजी के साथ सोना लगातार तीसरे सप्ताह बढ़त की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, मौजूदा ऊंचे स्तरों के बाद निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बुलियन में आगे नई तेजी आएगी या ऊंचे भाव पर प्रॉफिट-बुकिंग का दौर शुरू हो सकता है।
सोने और चांदी की कीमतों में क्यों आई तेजी?
कीमती धातुओं की मौजूदा तेजी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारक काम कर रहे हैं। इनमें सबसे अहम हैं अमेरिकी डॉलर की कमजोरी, ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव, ब्याज दरों की उम्मीदें, भू-राजनीतिक तनाव और सेफ-हेवन डिमांड।
चॉइस ब्रोकिंग की पिंकी यादव के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX पर हुई तेजी के अनुरूप MCX पर भी सोने और चांदी की कीमतें ऊंचे स्तर पर खुलीं। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक और बढ़ते अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है।
इसके अलावा, तेल की कीमतों में तेजी और ईरान से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर चिंताओं ने महंगाई को लेकर बाजार की आशंकाएं बढ़ाई हैं। ऐसे माहौल में निवेशक अक्सर अपने पोर्टफोलियो में सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों का हिस्सा बढ़ाने की कोशिश करते हैं।
कमजोर डॉलर से सोने को मिला सपोर्ट
अमेरिकी डॉलर की चाल इस समय सोने और चांदी के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स करीब 98.8 के स्तर पर बना हुआ था और साप्ताहिक आधार पर कमजोरी की ओर बढ़ रहा था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमत डॉलर में तय होती है। इसलिए जब डॉलर कमजोर होता है, तो दूसरी मुद्राओं में खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए ये धातुएं अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती हैं। इससे मांग बढ़ने और कीमतों को सपोर्ट मिलने की संभावना रहती है।
गोल्डसिल्वर सेंट्रल के ब्रायन लैन के मुताबिक, डॉलर की कमजोरी ने कीमती धातुओं को व्यापक स्तर पर सपोर्ट दिया है। इसके साथ ही बॉन्ड यील्ड में हुए बदलाव ने भी बुलियन मार्केट की दिशा को प्रभावित किया है।
अमेरिकी ट्रेजरी बायबैक पर भी नजर
अमेरिकी ट्रेजरी का कर्ज प्रबंधन भी इस समय बाजार के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट की ओर से संकेत दिया गया है कि सरकार ट्रेजरी सिक्योरिटीज की रीपरचेज यानी बायबैक को और बढ़ा सकती है।
पहले ही अगले क्वार्टर में लंबी अवधि के कर्ज की बायबैक को प्रति ऑपरेशन कम से कम 4 अरब डॉलर तक बढ़ाने की योजना का संकेत दिया गया था। इस तरह के कदमों से बॉन्ड मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और निवेशकों का ध्यान यील्ड, ब्याज दरों तथा अमेरिकी कर्ज की स्थिति पर जाता है।
OCBC के क्रिस्टोफर वोंग के मुताबिक, बाजार अब इस बात पर नजर रखेगा कि ट्रेजरी बायबैक की यह रणनीति कितनी टिकाऊ रहती है। इसके अलावा अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़े और 27 से 29 अगस्त के बीच होने वाला जैक्सन होल सिम्पोजियम भी डॉलर और बॉन्ड यील्ड की दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
फेड की ब्याज दरों का क्या असर होगा?
सोने की आगे की दिशा तय करने में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें भी अहम रहेंगी।
CME फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार में अगले महीने फेड की ओर से ब्याज दरों को स्थिर रखने की करीब 67% संभावना देखी जा रही थी, जबकि दरों में बदलाव की अन्य संभावना भी बाजार के अनुमान का हिस्सा बनी हुई है।
आम तौर पर ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए दबाव पैदा कर सकती हैं, क्योंकि सोने से ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता। ऐसे समय में निवेशक ब्याज देने वाली संपत्तियों को अधिक आकर्षक मान सकते हैं।
हालांकि, जब ब्याज दरों, महंगाई, डॉलर और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने की सेफ-हेवन अपील मजबूत हो सकती है। यही वजह है कि इस समय केवल ब्याज दरों को देखकर सोने की दिशा तय करना पर्याप्त नहीं होगा।
भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ी सुरक्षित निवेश की मांग
वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव भी सोने की कीमतों के लिए सपोर्टिव फैक्टर बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा प्रतिबंधों से जुड़े घटनाक्रमों ने कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।
तेल की कीमतों में तेजी महंगाई की आशंकाओं को बढ़ा सकती है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों के मुकाबले सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की तरफ रुख कर सकते हैं।
पिंकी यादव के मुताबिक, मजबूत निवेश मांग और चीन के केंद्रीय बैंक की लगातार खरीदारी ने भी कीमती धातुओं को सपोर्ट दिया है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी बनी बड़ी ताकत
सोने की मौजूदा तेजी में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए सोने की खरीदारी कर रहे हैं।
इससे सोने की मांग को एक संरचनात्मक आधार मिलता है। इसके अलावा ग्लोबल गोल्ड ETF में निवेश और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी भी बुलियन की मांग को सपोर्ट कर रही है।
यानी सोने की कीमतों के पीछे केवल ज्वैलरी और रिटेल डिमांड ही नहीं है, बल्कि केंद्रीय बैंक, ETF और निवेश मांग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
चांदी भी ₹2.50 लाख के करीब
सोने के साथ चांदी में भी जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की स्पॉट कीमत करीब 1.8% बढ़कर $69.31 प्रति औंस तक पहुंच गई। इसी दौरान प्लैटिनम 2.6% बढ़कर $1,875.75 और पैलेडियम 1.7% बढ़कर $1,356.59 प्रति औंस पर पहुंच गया।
MCX पर चांदी फ्यूचर्स ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इस तरह यह मनोवैज्ञानिक ₹2.50 लाख प्रति किलो के स्तर से ज्यादा दूर नहीं है।
चांदी पर डॉलर और ब्याज दरों जैसे मैक्रो फैक्टर्स का असर तो होता ही है, लेकिन इसमें औद्योगिक मांग की भी बड़ी भूमिका है। इसलिए चांदी की कीमतों में कभी-कभी सोने की तुलना में अलग गति देखने को मिल सकती है।
भारत में रुपये की चाल भी तय करेगी कीमत
भारतीय निवेशकों के लिए केवल अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत देखना पर्याप्त नहीं है। रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट भी घरेलू सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित करता है।
अगर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो डॉलर में कीमत वाली कमोडिटी को भारत में खरीदना महंगा हो सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत स्थिर रहने के बावजूद घरेलू बाजार में इसकी कीमत बढ़ सकती है।
हालांकि, लगातार ऊंची कीमतों का असर फिजिकल डिमांड पर पड़ सकता है। भारत में ज्वैलरी और रिटेल खरीदार ऊंचे भाव पर खरीदारी टाल सकते हैं। इससे एक तरफ निवेश मांग मजबूत रह सकती है, लेकिन दूसरी तरफ फिजिकल डिमांड में दबाव देखने को मिल सकता है।
Gold Silver Price Outlook: आगे तेजी जारी रहेगी या प्रॉफिट-बुकिंग?
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा कई अहम संकेतकों पर निर्भर करेगी। इनमें अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी यील्ड, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, फेड की ब्याज दरों को लेकर संकेत, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी प्रमुख हैं।
अगर डॉलर कमजोर रहता है, यील्ड में बड़ी तेजी नहीं आती और वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है, तो बुलियन को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है। इसके विपरीत, अगर डॉलर में मजबूत रिकवरी होती है, अमेरिकी यील्ड बढ़ती है या निवेशक ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू करते हैं, तो कीमतों में अस्थायी करेक्शन देखने को मिल सकता है।
इसलिए मौजूदा स्तर पर तेजी को देखते हुए निवेशकों को बिना रणनीति के पीछा करने के बजाय जोखिम और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखना चाहिए। MCX पर सोना ₹1,61,405 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है। ऐसे में अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि ₹2.50 लाख के करीब पहुंच चुकी चांदी और ₹1.61 लाख के पार निकल चुका सोना नई ऊंचाई बनाते हैं या ऊंचे स्तरों पर प्रॉफिट-बुकिंग का सामना करते हैं।
डिस्क्लेमर: newsjagran.in पर प्रकाशित यह जानकारी बाजार से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों और विशेषज्ञों के विचारों पर आधारित है। यह किसी भी तरह की निवेश सलाह नहीं है। कमोडिटी मार्केट में निवेश जोखिम के अधीन है। निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और प्रमाणित वित्तीय विशेषज्ञ की सलाह को ध्यान में रखें।


