Shiprocket Share Price: शिपरॉकेट के शेयरों ने शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री की है। 19 अगस्त को कंपनी के शेयर करीब 35 फीसदी प्रीमियम के साथ लिस्ट हुए और लिस्टिंग के बाद भी इनमें जोरदार तेजी देखने को मिली। दोपहर करीब 12:30 बजे तक शेयर लगभग 44.23 फीसदी की तेजी के साथ 139 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। ऐसे में आईपीओ में शेयर पाने वाले निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि इस तेजी में मुनाफा बुक किया जाए, शेयर होल्ड किया जाए या फिर और खरीदारी का मौका तलाशा जाए?
आईपीओ को मिला था जबरदस्त रिस्पॉन्स
Shiprocket के आईपीओ को निवेशकों की ओर से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। कंपनी का इश्यू 99 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था। आईपीओ के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 12 से 14 अगस्त के बीच चली थी।
लिस्टिंग से पहले ही ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयरों को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे थे। आईपीओ की लिस्टिंग से पहले शिपरॉकेट के शेयर पर करीब 36-37 फीसदी का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) बताया जा रहा था। ऐसे में बाजार में यह उम्मीद बनी हुई थी कि कंपनी के शेयर मजबूत प्रीमियम के साथ स्टॉक एक्सचेंज पर एंट्री कर सकते हैं।
लिस्टिंग के दिन शेयर ने इन उम्मीदों को काफी हद तक सही साबित किया और इसके बाद भी खरीदारी जारी रही।
IPO निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो सकती है?
शिपरॉकेट के आईपीओ में जिन निवेशकों को शेयर अलॉट हुए हैं, उनके लिए मौजूदा तेजी निश्चित तौर पर अच्छी खबर है। हालांकि, केवल तेज लिस्टिंग देखकर पूरा निवेश बनाए रखना या तुरंत पूरा पैसा निकाल लेना, दोनों ही फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए।
आनंदराठी शेयर्स के फंडामेंटल रिसर्च हेड नरेंद्र सोलंकी के मुताबिक, शिपरॉकेट को भारत में ई-कॉमर्स इकोसिस्टम की स्ट्रक्चरल ग्रोथ का फायदा मिल सकता है। हालांकि, कंपनी जिस बाजार में काम करती है, वहां प्रतिस्पर्धा भी काफी ज्यादा है।
ऐसे में जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर मिले हैं, वे कुछ हिस्से में लिस्टिंग गेन बुक करने पर विचार कर सकते हैं और बाकी शेयरों को लंबी अवधि के लिए होल्ड कर सकते हैं। इस रणनीति से निवेशक शुरुआती मुनाफे का कुछ हिस्सा सुरक्षित कर सकते हैं और कंपनी की आगे की ग्रोथ में भागीदार भी बने रह सकते हैं।
नए निवेशक क्या करें? वेट एंड वॉच बेहतर
जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर नहीं मिले हैं, उनके लिए लिस्टिंग के दिन तेजी के पीछे भागना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर तब, जब शेयर आईपीओ प्राइस से पहले ही काफी ऊपर जा चुका हो।
कांतिलाल छगनलाल सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट महेश एम. ओझा ने नए निवेशकों के लिए ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाने की बात कही है। उनके मुताबिक, निवेशकों को कंपनी के प्रदर्शन को समझने के लिए अगली 1-2 तिमाहियों के नतीजों पर नजर रखनी चाहिए।
निवेश का फैसला लेने से पहले कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ, ऑपरेटिंग प्रॉफिट, मार्जिन और बिजनेस की ग्रोथ को देखना जरूरी होगा। अगर कंपनी बाजार की उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन करती है, तो मौजूदा तेजी के बाद भी लंबी अवधि में निवेश के मौके बन सकते हैं।
शिपरॉकेट के बिजनेस में क्या खास है?
शिपरॉकेट की शुरुआत मुख्य रूप से शिपिंग सर्विस उपलब्ध कराने वाली कंपनी के रूप में हुई थी। समय के साथ कंपनी ने अपने बिजनेस मॉडल का विस्तार किया और अब यह एक फुल-स्टैक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करती है।
कंपनी डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स से लेकर छोटे और मध्यम कारोबारियों यानी MSME को लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराती है।
कंपनी के बिजनेस को मुख्य तौर पर कोर बिजनेस और इमर्जिंग बिजनेस में बांटा गया है। यही विविधता भविष्य में कंपनी के लिए ग्रोथ का आधार बन सकती है।
कई तरह की शिपिंग और ई-कॉमर्स सेवाएं
शिपरॉकेट के कोर बिजनेस में डोमेस्टिक शिपिंग और शिपिंग एप्लिकेशन जैसी सेवाएं शामिल हैं। वहीं, इमर्जिंग बिजनेस में कंपनी कई नए क्षेत्रों में काम कर रही है।
इनमें प्रमुख रूप से:
- कार्गो और फुलफिलमेंट
- क्रॉस-बॉर्डर शिपिंग
- एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग सॉल्यूशंस
- कैपिटल सॉल्यूशंस
- हाइपरलोकल डिलीवरी
जैसी सेवाएं शामिल हैं।
भारत में ई-कॉमर्स, D2C ब्रांड्स और डिजिटल कारोबार का विस्तार होने के साथ लॉजिस्टिक्स और फुलफिलमेंट की मांग भी बढ़ सकती है। इसका फायदा शिपरॉकेट को मिलने की संभावना है।
टेमासेक और जोमैटो का भी निवेश
शिपरॉकेट को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी की एक वजह कंपनी से जुड़े बड़े निवेशक भी हैं। कंपनी में टेमासेक और जोमैटो जैसे नामों का निवेश रहा है। इससे कंपनी के बिजनेस मॉडल और भविष्य की संभावनाओं को लेकर बाजार में दिलचस्पी बढ़ती है।
हालांकि, बड़े निवेशकों की मौजूदगी को अकेले शेयर खरीदने का आधार नहीं माना जाना चाहिए। निवेशकों को कंपनी के मौजूदा वैल्यूएशन, मुनाफे, कैश फ्लो, प्रतिस्पर्धा और भविष्य की ग्रोथ को भी ध्यान में रखना चाहिए।
शिपरॉकेट के सामने चुनौतियां भी कम नहीं
शिपरॉकेट के बिजनेस में संभावनाएं जरूर हैं, लेकिन इसके सामने चुनौतियां भी हैं। ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जिसके कारण इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भी लगातार बढ़ रही है।
कंपनी को अपनी सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ लागत को नियंत्रित करना होगा। इसके अलावा, नए कारोबारों में निवेश के कारण कंपनी की कमाई और मुनाफे पर शुरुआती दौर में दबाव भी पड़ सकता है।
इसलिए निवेशकों के लिए सिर्फ मजबूत लिस्टिंग या एक दिन की तेजी के बजाय कंपनी के अगले कई तिमाहियों के कारोबारी प्रदर्शन को देखना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।
खरीदें, बेचें या होल्ड करें?
मौजूदा स्थिति को तीन तरह के निवेशकों के नजरिए से समझा जा सकता है।
IPO में शेयर पाने वाले निवेशक: अगर आपका लक्ष्य शॉर्ट टर्म में मुनाफा कमाना है, तो तेजी के दौरान कुछ हिस्से में लिस्टिंग गेन बुक किया जा सकता है। वहीं, कंपनी के बिजनेस पर भरोसा रखने वाले निवेशक बाकी हिस्से को लंबी अवधि के लिए होल्ड करने पर विचार कर सकते हैं।
जिन्हें IPO में शेयर नहीं मिले: ऐसे निवेशकों के लिए लिस्टिंग के दिन तेज उछाल के बाद तुरंत खरीदारी करने के बजाय कुछ समय इंतजार करना बेहतर हो सकता है। कंपनी के शुरुआती तिमाही नतीजों और शेयर के वैल्यूएशन का आकलन करने के बाद फैसला लिया जा सकता है।
लंबी अवधि के निवेशक: अगर कंपनी लगातार रेवेन्यू और मुनाफे में मजबूत वृद्धि दिखाती है तथा ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर की ग्रोथ का फायदा उठाती है, तो लंबी अवधि में इसमें संभावनाएं बन सकती हैं। लेकिन मौजूदा वैल्यूएशन को नजरअंदाज करके निवेश करना उचित नहीं होगा।
निष्कर्ष
Shiprocket के शेयरों ने लिस्टिंग के दिन ही निवेशकों को शानदार रिटर्न देकर बाजार में मजबूत शुरुआत की है। आईपीओ का जबरदस्त सब्सक्रिप्शन, मजबूत लिस्टिंग और उसके बाद की तेजी ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
हालांकि, लिस्टिंग के दिन की तेजी को कंपनी के भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं माना जा सकता। IPO निवेशकों के लिए कुछ मुनाफा बुक करके बाकी हिस्से को होल्ड करना एक विकल्प हो सकता है, जबकि नए निवेशकों को कंपनी के अगले 1-2 तिमाही नतीजों का इंतजार करके फैसला लेने की रणनीति अपनानी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे शेयर खरीदने या बेचने की सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपनी रिसर्च करें और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।


