Tamilnad Mercantile Bank: करीब तीन साल पहले एक बैंकिंग गलती ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया था। तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक ने गलती से एक ऑटो रिक्शा चलाने वाले व्यक्ति के खाते में करीब ₹9,000 करोड़ जमा कर दिए थे। यह रकम उस समय बैंक की करीब ₹53,000 करोड़ की बैलेंस शीट का लगभग 17% थी। हालांकि बैंक ने करीब आधे घंटे के भीतर इस रकम को रिवर्स कर दिया, लेकिन इस घटना ने बैंक के टेक्नोलॉजी सिस्टम और रिस्क मैनेजमेंट को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
अब तीन साल बाद बैंक ने इस घटना से मिले सबक के आधार पर अपने टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव किए हैं। बैंक ने मैनुअल प्रोसेस को कम किया है, क्लियरिंग हाउस और कोर बैंकिंग सिस्टम के बीच सीधे इंटीग्रेशन की दिशा में कदम उठाया है और बड़े ट्रांजैक्शन की निगरानी के लिए रियल-टाइम फ्रॉड मॉनिटरिंग और AI आधारित सिस्टम पर जोर बढ़ाया है।
कैसे हुई थी ₹9,000 करोड़ की गलती?
करीब तीन साल पहले NACH यानी National Automated Clearing House की एक फाइल बैंक के सिस्टम में अपलोड की जा रही थी। इसी दौरान अकाउंट नंबर के आगे गलती से एक अतिरिक्त अंक जुड़ गया।
उस समय NACH और कुछ अन्य क्लियरिंग सिस्टम से आने वाली फाइलों को प्रोसेस करने में मैनुअल प्रक्रिया शामिल थी। इसी मैनुअल प्रोसेसिंग के दौरान हुई गलती के कारण करीब ₹9,000 करोड़ की रकम एक ऑटो रिक्शा चालक के बैंक खाते में पहुंच गई।
बैंक के आईटी प्रमुख और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट डेविस जोस थेट्टायिल के मुताबिक, यह घटना फाइल प्रोसेसिंग के दौरान हुई मानवीय गलती का नतीजा थी।
हालांकि रकम कुछ ही समय में वापस ले ली गई, लेकिन बैंक के लिए यह घटना एक बड़ा सबक बन गई। खास बात यह थी कि उस समय ₹9,000 करोड़ बैंक की कुल बैलेंस शीट का बहुत बड़ा हिस्सा था।
अब कितनी बड़ी हो गई बैंक की बैलेंस शीट?
उस घटना के समय तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक की बैलेंस शीट करीब ₹53,000 करोड़ थी। अब वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बैंक की बैलेंस शीट बढ़कर करीब ₹75,300 करोड़ हो चुकी है।
यानी पिछले कुछ वर्षों में बैंक का आकार काफी बढ़ा है। ऐसे में बड़े पैमाने पर ट्रांजैक्शन को सुरक्षित तरीके से प्रोसेस करने के लिए मजबूत टेक्नोलॉजी सिस्टम की जरूरत भी बढ़ गई है।
CBS और क्लियरिंग हाउस के बीच से हटाया मैनुअल सिस्टम
₹9,000 करोड़ की घटना के बाद बैंक ने सबसे महत्वपूर्ण बदलाव अपने ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग सिस्टम में किया है।
पहले RBI या क्लियरिंग हाउस से आने वाली फाइलें एक सिस्टम में आती थीं। इसके बाद बैंक कर्मचारी उन्हें मैनुअली प्रोसेस करके Core Banking System (CBS) में अपलोड करते थे।
NACH के अलावा CTS यानी Cheque Truncation System से आने वाली फाइलों में भी मैनुअल प्रोसेस का इस्तेमाल होता था।
अब बैंक ने इस बीच की मैनुअल प्रक्रिया को हटाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। क्लियरिंग हाउस से आने वाली फाइलों को सीधे बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम तक पहुंचाने के लिए सिस्टम को इंटीग्रेट किया गया है।
इसका मकसद साफ है—इंसानी हस्तक्षेप कम करना और फाइल प्रोसेसिंग के दौरान होने वाली गलती की संभावना घटाना।
अब Finacle पर चल रहा है बैंक का CBS
तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक का कोर बैंकिंग सिस्टम अब Infosys Finacle पर है। बैंक ने अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी लगातार अपग्रेड किया है।
इस साल बैंक ने अपने इंटरनेट बैंकिंग प्लेटफॉर्म को Infosys Digital Engagement Hub (DEH) पर अपग्रेड किया है।
DEH एक यूनिफाइड प्लेटफॉर्म की तरह काम करता है, जो ग्राहकों को अलग-अलग डिवाइस से बैंक के बैकएंड सिस्टम से जोड़ने में मदद करता है। इसमें कोर बैंकिंग, पेमेंट्स और ट्रेड फाइनेंस जैसी बैंकिंग सेवाओं के साथ कनेक्टिविटी शामिल है।
बड़े ट्रांजैक्शन पर रियल-टाइम अलर्ट
बैंक ने फ्रॉड रोकने के लिए ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम को भी मजबूत किया है।
अगर किसी ग्राहक के खाते से उसकी सामान्य गतिविधि की तुलना में अचानक बहुत बड़ा ट्रांजैक्शन होता है, तो सिस्टम Fraud Risk Management (FRM) टीम को अलर्ट भेज सकता है।
इसके बाद बैंक ग्राहक से संपर्क करके यह पुष्टि कर सकता है कि ट्रांजैक्शन वास्तव में उसी ने किया है या नहीं। पुष्टि के बाद ही आगे की प्रक्रिया की जा सकती है।
यह सिस्टम बैंक को असामान्य ट्रांजैक्शन की पहचान करने में मदद करेगा और संभावित फ्रॉड को शुरुआती स्तर पर रोकने का मौका देगा।
99% तक अलर्ट हो सकते हैं फॉल्स, इसलिए AI की मदद
बैंक के सामने एक दूसरी चुनौती भी है। फ्रॉड मॉनिटरिंग सिस्टम में बड़ी संख्या में अलर्ट आने पर हर अलर्ट की मैनुअली जांच करना मुश्किल हो सकता है।
बैंक के मुताबिक बड़ी संख्या में अलर्ट गलत भी हो सकते हैं। ऐसे में बैंक AI की मदद से पॉजिटिव अलर्ट की पहचान करने पर काम कर रहा है, ताकि बैंक कर्मचारी उन अलर्ट पर ज्यादा ध्यान दे सकें जिनमें वास्तव में फ्रॉड का जोखिम अधिक है।
इस तरह AI का इस्तेमाल सिर्फ फ्रॉड पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि बैंक की टीम के काम को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए भी किया जा रहा है।
Anti-Money Laundering सिस्टम में भी AI
बैंक ने अपने Anti-Money Laundering (AML) मैकेनिज्म को भी AI से लैस किया है।
इसका उद्देश्य संदिग्ध ट्रांजैक्शन और पैटर्न की पहचान को ज्यादा तेज और प्रभावी बनाना है। बैंकिंग में डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़ने के साथ AML और फ्रॉड मॉनिटरिंग सिस्टम की भूमिका भी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
बैंक बनाएगा बड़ा Data Lake
तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक की टेक्नोलॉजी रणनीति केवल फ्रॉड रोकने तक सीमित नहीं है।
बैंक एक Data Lake तैयार करने की योजना पर भी काम कर रहा है। इसमें ग्राहक से जुड़ी अलग-अलग तरह की जानकारी को एक जगह लाने का लक्ष्य है।
इसमें शामिल हो सकते हैं:
- कस्टमर इंटरैक्शन
- कॉल सेंटर डेटा
- ईमेल
- स्ट्रक्चर्ड डेटा
- अनस्ट्रक्चर्ड डेटा
- अन्य ग्राहक व्यवहार संबंधी जानकारी
इस डेटा का इस्तेमाल AI और एनालिटिक्स के जरिए ग्राहकों को बेहतर तरीके से समझने में किया जा सकता है।
NPA और Customer Churn का भी लगाया जाएगा अनुमान
बैंक एक अलग AI और Analytics Unit बनाने की भी योजना पर काम कर रहा है।
इसका इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, बैंक ग्राहकों के व्यवहार के आधार पर यह समझने की कोशिश कर सकता है कि कौन से ग्राहक बैंक छोड़ने की संभावना रखते हैं।
इसके अलावा AI और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल NPA का अनुमान लगाने और ग्राहकों के लिए ज्यादा टारगेटेड ऑफर या सेवाएं तैयार करने में भी किया जा सकता है।
यानी बैंक अब टेक्नोलॉजी को केवल बैकएंड ऑपरेशन के तौर पर नहीं, बल्कि बिजनेस स्ट्रैटेजी का हिस्सा बनाने की दिशा में बढ़ रहा है।
Cyber Security पर बढ़ेगा खर्च
डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सिक्योरिटी भी बैंकों के लिए बड़ी प्राथमिकता बन गई है।
तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक ने साइबर सिक्योरिटी पर खर्च बढ़ाने की योजना बनाई है। बैंक के आईटी प्रमुख के अनुसार, इस वित्त वर्ष में आईटी बजट का करीब 20% हिस्सा साइबर सिक्योरिटी पर खर्च किए जाने की उम्मीद है।
इसमें फ्रॉड मॉनिटरिंग, AI आधारित सिस्टम, डेटा सुरक्षा और डिजिटल बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हो सकते हैं।
₹9,000 करोड़ की गलती से मिली बड़ी सीख
तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक की करीब ₹9,000 करोड़ की गलती भले ही कुछ ही समय में ठीक कर दी गई थी, लेकिन इसने बैंक को अपने सिस्टम की कमजोरियों को समझने का मौका दिया।
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि जहां पहले कुछ महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में मैनुअल हस्तक्षेप था, वहीं अब बैंक ऑटोमेशन, सिस्टम इंटीग्रेशन, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और AI पर ज्यादा निर्भरता बढ़ा रहा है।
बैंकिंग सिस्टम जितना डिजिटल होता जा रहा है, उतना ही जरूरी है कि उसके पीछे के सिस्टम भी तेज, ऑटोमेटेड और सुरक्षित हों। ऐसे में तीन साल पुरानी यह घटना तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक के लिए एक बड़ी चेतावनी के साथ-साथ टेक्नोलॉजी अपग्रेड करने का अहम सबक भी साबित हुई है।


