Income Tax Department Action: आयकर विभाग ने विदेशों में भेजी गई संदिग्ध रकम की जांच के लिए देशव्यापी वेरिफिकेशन अभियान शुरू किया है। डेटा एनालिसिस और खुफिया जानकारी के आधार पर विभाग को ऐसी कई संस्थाओं का पता चला है, जिनकी घोषित आय और कारोबार की तुलना में विदेश भेजी गई रकम काफी अधिक थी। जांच में कथित फर्जी चैरिटेबल ट्रस्टों के नेटवर्क और Form 15CB जारी करने वाले कुछ प्रोफेशनल्स की भूमिका भी सामने आई है।
HighLights
- संदिग्ध विदेशी रकम भेजने वाली संस्थाओं पर आयकर विभाग की कार्रवाई।
- फर्जी चैरिटेबल ट्रस्टों के जरिए कथित एंट्री उपलब्ध कराने का खुलासा।
- Form 15CB जारी करने वाले प्रोफेशनल्स की भूमिका भी जांच के दायरे में।
- 394 संस्थाओं और 36 प्रोफेशनल्स का वेरिफिकेशन किया जा रहा है।
- 117 संस्थाएं बॉर्डर से सटे राज्यों में स्थित बताई गई हैं।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: आयकर विभाग ने संदिग्ध Foreign Remittances यानी विदेश भेजी गई रकम के मामलों में देशव्यापी जांच अभियान शुरू किया है। विभाग के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों के लेनदेन के डेटा का विश्लेषण करने पर ऐसी कई संस्थाएं सामने आईं, जिन्होंने अपनी घोषित आय और कारोबार की तुलना में विदेशों में बड़ी मात्रा में पैसा भेजा।
फर्जी चैरिटेबल ट्रस्टों का नेटवर्क आया सामने
The Income Tax Department has launched a nationwide verification exercise into suspicious foreign remittances. The exercise follows data analysis and ground intelligence indicating significant overseas remittances by entities with little or no reported business activity.
The… pic.twitter.com/paaJMYLE4Y
— Income Tax India (@IncomeTaxIndia) August 18, 2026 केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान कथित तौर पर ऐसे संस्थानों का नेटवर्क सामने आया है, जो फर्जी चैरिटेबल ट्रस्टों के जरिए दान और योगदान के नाम पर एंट्री उपलब्ध कराने से जुड़े हो सकते हैं।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि विदेश पैसा भेजने वाली कुछ संस्थाएं या तो आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर रही थीं या फिर अपने रिकॉर्ड में बेहद कम कारोबार दिखा रही थीं। इसके बावजूद इनके जरिए विदेशों में बड़ी रकम भेजी गई।
विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इन लेनदेन के पीछे वास्तविक कारोबारी गतिविधियां थीं या फिर किसी अन्य उद्देश्य से पैसे को विदेश भेजने की व्यवस्था की गई।
माल ढुलाई और सॉफ्टवेयर इंपोर्ट के नाम पर भेजा पैसा
आयकर विभाग की जांच में सामने आया है कि कुछ संस्थाओं ने विदेशी भुगतान को माल ढुलाई, सॉफ्टवेयर इंपोर्ट या कंसल्टिंग सर्विसेज के खर्च के रूप में बताया था। हालांकि, फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान कुछ मामलों में इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी।
कई संस्थाएं अपने घोषित पते पर कारोबार करती हुई नहीं मिलीं। ऐसे मामलों ने विभाग का संदेह और बढ़ा दिया है। अब इन संस्थाओं के बैंकिंग लेनदेन, टैक्स रिकॉर्ड, विदेश भेजी गई रकम और वास्तविक कारोबारी गतिविधियों का मिलान किया जा रहा है।
Form 15CB जारी करने वाले प्रोफेशनल्स भी जांच के घेरे में
जांच का एक अहम हिस्सा Form 15CB जारी करने वाले प्रोफेशनल्स से जुड़ा है। विदेश में कुछ प्रकार के भुगतान करने से पहले टैक्स संबंधी अनुपालन के लिए Form 15CB से जुड़ी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।
आयकर विभाग को जांच में यह भी पता चला कि बड़ी संख्या में ऐसे प्रमाणपत्र सीमित संख्या में प्रोफेशनल्स द्वारा जारी किए गए थे। विभाग यह जांच कर रहा है कि प्रमाणपत्र जारी करते समय संबंधित लेनदेन की पर्याप्त जांच और आवश्यक ड्यू डिलिजेंस की गई थी या नहीं।
हालांकि, किसी प्रोफेशनल द्वारा Form 15CB जारी किया जाना अपने आप में किसी गलत गतिविधि का प्रमाण नहीं है। विभाग की मौजूदा कार्रवाई का उद्देश्य संदिग्ध मामलों में वास्तविक भूमिका और जिम्मेदारी का पता लगाना है।
बॉर्डर से सटे राज्यों में भी मिलीं कई संस्थाएं
18 अगस्त 2026 से शुरू किए गए इस वेरिफिकेशन अभियान के तहत अब तक करीब 394 संस्थाओं और 36 प्रोफेशनल्स को जांच के दायरे में लिया गया है। इनमें 117 संस्थाएं बॉर्डर से सटे राज्यों में स्थित बताई गई हैं।
विभाग अब इन संस्थाओं के साथ-साथ उनसे जुड़े व्यक्तियों, शेल कंपनियों और विदेश भेजी गई रकम के अंतिम लाभार्थियों की भी जांच कर रहा है। खासतौर पर यह देखा जा रहा है कि जिन संस्थाओं ने बड़ी रकम विदेश भेजी, उनके पास उस स्तर की वास्तविक आय या कारोबारी गतिविधि मौजूद थी या नहीं।
विभाग ने प्रोफेशनल्स को दी सावधानी बरतने की सलाह
CBDT ने Form 15CB और Form 15CA से जुड़े प्रोफेशनल्स को प्रमाणपत्र जारी करते समय पूरी सावधानी बरतने और उचित जांच-पड़ताल करने की सलाह दी है। विभाग ने पेशेवर जिम्मेदारी और ड्यू डिलिजेंस के पालन पर जोर दिया है।
आयकर विभाग का यह अभियान अभी जारी है। आगे की जांच में यदि किसी मामले में नियमों के उल्लंघन या संदिग्ध लेनदेन की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, आयकर विभाग डेटा एनालिसिस के जरिए उन मामलों की पहचान कर रहा है, जहां किसी संस्था की घोषित वित्तीय स्थिति और उसके विदेशी लेनदेन में बड़ा अंतर दिखाई देता है। इसके बाद फिजिकल वेरिफिकेशन और दस्तावेजों की जांच के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि विदेशी रकम भेजने के पीछे वास्तविक कारोबारी उद्देश्य था या नहीं।
फर्जी संस्थाओं, कथित शेल नेटवर्क और गलत दस्तावेजों के जरिए विदेशी धन हस्तांतरण की आशंका वाले मामलों पर विभाग की नजर अब और कड़ी हो गई है। इस अभियान से आने वाले समय में ऐसे नेटवर्क और उनसे जुड़े लोगों के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।


