नई दिल्ली: हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से MBA करने के बाद भारत लौटकर अपना बिजनेस शुरू करना नैया सग्गी के लिए आसान फैसला नहीं था। अमेरिका में पढ़ाई के बाद उन्हें वहां काम करने का मौका मिला था, लेकिन उन्होंने भारत लौटकर कुछ अपना बनाने का फैसला किया। उनके इस फैसले से परिवार के कुछ लोग खुश नहीं थे। उनके दादाजी ने तो करीब तीन महीने तक उनसे बात तक नहीं की।
हाल ही में कंटेंट क्रिएटर विराज अला के साथ एक इंटरव्यू में नैया सग्गी ने बताया कि अमेरिका में मिले अवसर को छोड़कर भारत लौटने के उनके फैसले पर परिवार की क्या प्रतिक्रिया थी। नैया सग्गी ‘बेबीचक्रा’ की संस्थापक और ‘द गुड ग्लैम ग्रुप’ की सह-संस्थापक के तौर पर जानी जाती हैं। अब वह अपनी तीसरी कंपनी EDT पर काम कर रही हैं।
हार्वर्ड से मिली थी पूरी स्कॉलरशिप
नैया सग्गी ने अपने MBA की पढ़ाई Harvard Business School से की। उन्हें इस पढ़ाई के लिए पूरी स्कॉलरशिप मिली थी। इससे पहले उन्होंने National Law School of India University से BA LLB (ऑनर्स) की पढ़ाई पूरी की थी।
उनके LinkedIn प्रोफाइल के मुताबिक, हार्वर्ड में पढ़ाई के दौरान वह Fulbright Scholar और JN Tata Scholar भी रहीं। MBA पूरा करने के बाद उन्होंने करीब एक साल तक The Bridgespan Group में कंसल्टेंट के तौर पर काम किया।
इसके बाद 2015 में उन्होंने अमेरिका छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया। उनका मकसद नौकरी करने के बजाय भारत में अपनी कंपनी बनाना था।
दादाजी ने तीन महीने तक नहीं की बात
भारत लौटने का फैसला नैया के लिए जितना महत्वपूर्ण था, उतना ही उनके परिवार के लिए चौंकाने वाला भी। खासकर उनके दादाजी को यह फैसला समझ नहीं आया।
नैया ने बताया कि उन्हें लगता था कि अमेरिका में रहने, नौकरी करने और मिली स्कॉलरशिप के बाद भारत लौटना एक बड़ा अवसर गंवाने जैसा है। उनके दादाजी इस फैसले से इतने नाराज थे कि उन्होंने करीब तीन महीने तक नैया से बात नहीं की।
नैया के सामने सवाल था कि जब अमेरिका में आगे बढ़ने के इतने मौके मौजूद हैं, तो वह भारत वापस क्यों आईं? लेकिन नैया अपने फैसले को लेकर स्पष्ट थीं। वह भारत में रहकर कुछ ऐसा बनाना चाहती थीं, जिसका असर बड़े स्तर पर हो।
बहन की परेशानी ने दिया बिजनेस आइडिया
भारत लौटने के बाद नैया सग्गी ने 2015 में BabyChakra की शुरुआत की। इस बिजनेस का आइडिया उन्हें अपनी बहन की प्रेग्नेंसी के दौरान आया।
उन्होंने देखा कि गर्भावस्था और पैरेंटिंग से जुड़ी भरोसेमंद जानकारी हासिल करना आसान नहीं था। इसी समस्या को हल करने के लिए उन्होंने ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया, जहां महिलाओं और पैरेंट्स को जरूरी जानकारी और सेवाएं मिल सकें।
समय के साथ BabyChakra एक बड़े कम्युनिटी प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित हुआ।
BabyChakra का हुआ MyGlamm के साथ विलय
साल 2021 में BabyChakra का MyGlamm के साथ विलय हुआ। इसके बाद नैया सग्गी, प्रियंका गिल और दर्पण संघवी के साथ The Good Glamm Group की सह-संस्थापक बनीं।
इस बिजनेस ग्रुप ने ब्यूटी, पर्सनल केयर और कंज्यूमर ब्रांड्स के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। BabyChakra से शुरू हुई नैया की उद्यमिता की यात्रा अब तीसरी कंपनी तक पहुंच चुकी है।
‘मैं किसी अमीर परिवार से नहीं आती’
नैया सग्गी ने अपनी सफलता को लेकर बनी एक आम धारणा पर भी बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका जन्म किसी बेहद अमीर परिवार में नहीं हुआ था।
उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता सरकारी नौकरी में थे और वह एक सामान्य परिवार से आती हैं। उनके मुताबिक, उनके परिवार की पृष्ठभूमि ऐसी नहीं थी कि उन्हें बिजनेस शुरू करने के लिए पहले से बड़ी आर्थिक विरासत मिली हो।
नैया की कहानी इस बात को दिखाती है कि मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि और अवसरों के साथ-साथ खुद का रास्ता चुनने का साहस भी उद्यमिता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अब बना रही हैं तीसरी कंपनी
BabyChakra और The Good Glamm Group के बाद नैया सग्गी अब अपनी तीसरी कंपनी EDT बना रही हैं। यह एक कंज्यूमर-टेक वेंचर है।
उनकी अब तक की तीनों कंपनियों की कुल वैल्यू 1 अरब डॉलर से अधिक बताई गई है। हालांकि, उनकी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा केवल यह आंकड़ा नहीं है, बल्कि वह फैसला है जिसने इस पूरी यात्रा की शुरुआत की थी।
हार्वर्ड जैसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के बाद अमेरिका में करियर बनाने का मौका छोड़कर भारत लौटना उनके लिए जोखिम भरा कदम था। परिवार की नाराजगी के बावजूद उन्होंने अपने फैसले पर भरोसा किया और भारत में ही अपना बिजनेस खड़ा किया।
भारतीय फाउंडर्स के लिए नैया का बड़ा संदेश
नैया सग्गी का मानना है कि भारतीय उद्यमियों को ग्लोबल कंपनी बनाने के लिए जरूरी नहीं कि वे अपना बिजनेस विदेश से शुरू करें। भारत में रहते हुए भी भारतीय फाउंडर्स दुनिया के लिए बड़े ब्रांड और कंपनियां बना सकते हैं।
उनकी कहानी का यही हिस्सा आज के युवा उद्यमियों के लिए सबसे बड़ा संदेश देता है—बड़ा अवसर हमेशा विदेश में नहीं होता। सही समस्या पहचानकर, सही टीम के साथ और लंबे समय तक लगातार काम करके भारत से भी ग्लोबल कंपनी बनाई जा सकती है।


