नई दिल्ली: भारत में सोयाबीन तेल की मांग अगस्त में अचानक तेज हो गई है। कारोबारियों के मुताबिक, इस महीने देश का सोयाबीन तेल आयात करीब 6.20 लाख टन तक पहुंच सकता है। यह मौजूदा मार्केटिंग ईयर में अब तक के औसत मासिक आयात से करीब 46% अधिक है। सस्ते दाम, त्योहारी सीजन से पहले बढ़ती मांग और सूरजमुखी तेल की सप्लाई में आई रुकावट इसके पीछे प्रमुख वजहें हैं।
इस पूरी तस्वीर में रूस-यूक्रेन युद्ध की भी बड़ी भूमिका है। ब्लैक सी क्षेत्र में बंदरगाहों और समुद्री बुनियादी ढांचे पर हमलों के कारण सूरजमुखी तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत के कई खरीदारों ने अब सोयाबीन तेल का रुख किया है।
अगस्त में 6.20 लाख टन तक पहुंच सकता है आयात
व्यापारियों के मुताबिक, अगस्त में भारत का सोयाबीन तेल आयात करीब 6,20,000 टन रहने का अनुमान है। नवंबर से शुरू हुए मौजूदा मार्केटिंग ईयर में भारत का औसत मासिक सोयाबीन तेल आयात करीब 4,24,549 टन रहा है। यानी अगस्त का अनुमानित आयात इस औसत से लगभग 46% ज्यादा है।
सोयाबीन तेल की कीमतें फिलहाल खरीदारों के लिए आकर्षक बनी हुई हैं। साथ ही, आने वाले त्योहारी सीजन के लिए रिफाइनर पहले से ही पर्याप्त स्टॉक जुटाने में लगे हैं। इससे आयात की मांग को और समर्थन मिला है।
रूस-यूक्रेन युद्ध का सीधा असर
भारत के सूरजमुखी तेल आयात में रूस और यूक्रेन की बड़ी हिस्सेदारी है। लेकिन ब्लैक सी क्षेत्र में जारी संघर्ष ने इस सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। बंदरगाहों और समुद्री बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने से तेल की शिपमेंट में देरी हुई है।
कारोबारियों का अनुमान है कि अगस्त में भारत का सूरजमुखी तेल आयात घटकर करीब 1.80 लाख टन रह सकता है। यह फरवरी 2026 के बाद का सबसे निचला स्तर होगा और पिछले महीने की तुलना में लगभग 28% कम है।
एक कारोबारी के अनुसार, रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण अगस्त और सितंबर में डिलीवरी के लिए तय करीब 1.50 लाख टन सूरजमुखी तेल की सप्लाई में देरी हुई है।
सूरजमुखी तेल की जगह सोयाबीन तेल
दक्षिण भारत में सूरजमुखी तेल की मांग आम तौर पर मजबूत रहती है। लेकिन सप्लाई में रुकावट आने के कारण वहां के खरीदार अब सोयाबीन तेल की तरफ बढ़ रहे हैं।
पश्चिमी तट पर कांडला और JNPT जैसे बंदरगाहों के अलावा दक्षिण भारत के कृष्णापट्टनम और काकीनाडा बंदरगाहों पर भी सोयाबीन तेल की खेप पहुंच रही है। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों में इसकी उपलब्धता बढ़ी है।
पाम ऑयल के मुकाबले भी हुआ आकर्षक
सोयाबीन तेल की प्रतिस्पर्धी कीमतों ने इसकी मांग को और मजबूत किया है। कारोबारियों के मुताबिक, अप्रैल में पाम ऑयल की तुलना में सोयाबीन तेल का प्रीमियम 100 डॉलर प्रति टन से ज्यादा था। अब यह घटकर करीब 50 डॉलर प्रति टन रह गया है।
दूसरी ओर, पाम ऑयल की कीमतों पर कई कारणों से दबाव बना हुआ है। खराब मौसम से उत्पादन को लेकर चिंता है। साथ ही इंडोनेशिया में बायोफ्यूल के लिए पाम ऑयल के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदमों ने भी कीमतों को समर्थन दिया है।
प्रीमियम घटने से भारतीय खरीदारों के लिए सोयाबीन तेल की लागत पहले के मुकाबले ज्यादा आकर्षक हो गई है।
सितंबर में भी ऊंचा रह सकता है आयात
कारोबारियों का अनुमान है कि सितंबर में भी भारत का सोयाबीन तेल आयात 6 लाख टन से ऊपर रह सकता है। भारत सितंबर से दिसंबर के बीच शिपमेंट के लिए करीब 14 लाख टन तेल खरीद चुका है।
इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा मांग केवल अगस्त तक सीमित नहीं है। भारतीय रिफाइनर आने वाले महीनों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए भी खरीदारी कर रहे हैं।
भारत ने बढ़ाई सोयाबीन तेल की खरीद
सोयाबीन तेल की पर्याप्त उपलब्धता और प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण भारत ने अपनी खरीद बढ़ाई है। इसके अलावा स्थानीय तिलहन उत्पादन को लेकर मौसम संबंधी चिंताएं भी आयात को बढ़ावा दे रही हैं।
आमतौर पर भारत सोयाबीन तेल का बड़ा हिस्सा अर्जेंटीना और ब्राजील से खरीदता है। लेकिन तत्काल जरूरत पूरी करने के लिए चीन, मिस्र, थाईलैंड और तुर्की जैसे देशों से भी सोयाबीन तेल मंगाया जा रहा है।
कारोबारियों के अनुसार, भारत कई महीने आगे की डिलीवरी के लिए भी तेल की खरीद कर रहा है। अक्टूबर से दिसंबर की शिपमेंट के लिए पाम ऑयल और सोयाबीन तेल की लैंडेड कॉस्ट लगभग बराबर बताई जा रही है। वहीं, सूरजमुखी तेल करीब 200 डॉलर प्रति टन के प्रीमियम पर कारोबार कर रहा है।
आगे क्या है तस्वीर?
भारत में सोयाबीन तेल की बढ़ती मांग के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सूरजमुखी तेल की सप्लाई में आई बाधा, सोयाबीन तेल की अपेक्षाकृत कम कीमत, पाम ऑयल की बढ़ती लागत और त्योहारी सीजन की तैयारी—इन सभी ने मिलकर आयात को बढ़ाया है।
अगर ब्लैक सी क्षेत्र से सूरजमुखी तेल की सप्लाई में आगे भी बाधा बनी रहती है और सोयाबीन तेल की कीमतें प्रतिस्पर्धी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में भारत की सोयाबीन तेल खरीद मजबूत बनी रह सकती है।


