भारतीय रेलवे ट्रेनों की साफ-सफाई पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च करता है, लेकिन इसके बावजूद यात्रियों की शिकायतें कम नहीं हो रही हैं। CAG की रिपोर्ट में ऑनबोर्ड सफाई व्यवस्था और टॉयलेट की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे देश में रोजाना लाखों यात्रियों को सफर कराता है। यात्रियों की सुविधा और स्वच्छता के लिए रेलवे की ओर से हर साल करोड़ों रुपये का बजट भी निर्धारित किया जाता है। इसके बावजूद ट्रेनों में गंदगी, बदबूदार टॉयलेट और सफाई व्यवस्था को लेकर यात्रियों की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। अब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट ने रेलवे की सफाई व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेनों में उपलब्ध ऑनबोर्ड सफाई व्यवस्था से करीब 50 फीसदी यात्री संतुष्ट नहीं हैं। वहीं, बड़ी संख्या में यात्रियों ने टॉयलेट में बदबू और पानी जमा होने जैसी समस्याओं की शिकायत की। इससे साफ है कि सफाई के लिए बजट उपलब्ध होने के बावजूद उसका असर जमीनी स्तर पर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा है।
सफाई व्यवस्था से 50 फीसदी यात्री असंतुष्ट
CAG की रिपोर्ट में रेलवे की ऑनबोर्ड हाउसकीपिंग व्यवस्था को लेकर यात्रियों की प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया गया है। सर्वे में करीब आधे यात्रियों ने सफाई व्यवस्था को लेकर असंतोष जताया।
लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों को कई घंटे तक सफर करना पड़ता है। ऐसे में कोच और टॉयलेट की खराब सफाई उनके सफर को मुश्किल बना सकती है। खासकर परिवार, बुजुर्ग और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए स्वच्छता एक अहम सुविधा है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता और सर्विस को लेकर भी बड़ी संख्या में यात्री संतुष्ट नहीं थे।
बदबूदार टॉयलेट और पानी जमा होने की शिकायत
CAG के सर्वे में 40 फीसदी से अधिक यात्रियों ने टॉयलेट की बदबू और वहां पानी जमा होने को लेकर नाराजगी जताई। रेलवे में बायो-टॉयलेट की व्यवस्था को स्वच्छता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था, लेकिन इनके रखरखाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
अगर टॉयलेट की नियमित सफाई और रखरखाव ठीक तरीके से न हो तो यात्रियों को बदबू, गंदगी और पानी जमा होने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि रिपोर्ट में रेलवे की स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल उठाए गए हैं।
बजट की कमी नहीं, फिर समस्या क्यों?
CAG की रिपोर्ट का एक अहम पहलू यह है कि रेलवे के पास स्वच्छता और रखरखाव के लिए बजट की कमी नहीं बताई गई है। इसके बावजूद कई जगहों पर सफाई व्यवस्था अपेक्षित स्तर पर नहीं मिली।
ऑडिट में यह सवाल उठता है कि जब सफाई के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है, तो उसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है और उसका वास्तविक असर यात्रियों को क्यों नहीं दिखाई दे रहा है।
रिपोर्ट में वित्तीय अनुशासन और जमीनी स्तर पर कामकाज को लेकर भी चिंता जाहिर की गई है। इसका मतलब है कि सिर्फ बजट आवंटित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि पैसा सही काम पर और प्रभावी तरीके से खर्च हो।
खर्च हुए पैसे की पूरी जानकारी नहीं
CAG ने रेलवे की व्यवस्था में पारदर्शिता से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कमी की ओर भी इशारा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऑडिट टीम को यह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने में परेशानी हुई कि सफाई और रखरखाव के लिए आवंटित बजट में से कितना पैसा खर्च हुआ और कितना इस्तेमाल नहीं किया गया।
इस तरह की जानकारी का व्यवस्थित रिकॉर्ड होना जरूरी है, क्योंकि इससे यह पता लगाया जा सकता है कि बजट का कितना हिस्सा वास्तव में यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने में इस्तेमाल हुआ।
ठेकेदारों पर कार्रवाई का भी रिकॉर्ड सवालों के घेरे में
रेलवे में सफाई से जुड़े कई काम ठेकेदारों के माध्यम से भी कराए जाते हैं। CAG की रिपोर्ट में ठेकेदारों की लापरवाही और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि किसी ठेकेदार ने निर्धारित मानकों के अनुसार काम नहीं किया तो उस पर कितना जुर्माना लगाया गया या भुगतान में कितनी कटौती की गई, इसका पर्याप्त रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई।
इससे यह सवाल उठता है कि सफाई व्यवस्था में लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करने और ठेकेदारों पर कार्रवाई करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
कई रेलवे प्रोजेक्ट भी अटके
CAG की रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों से जुड़े कुछ प्रोजेक्ट की स्थिति पर भी ध्यान दिया गया है। रिपोर्ट में झांसी और ग्वालियर जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि बजट उपलब्ध होने के बावजूद कुछ परियोजनाएं निर्धारित तरीके से आगे नहीं बढ़ सकीं।
इससे यह सवाल उठता है कि रेलवे के पास उपलब्ध संसाधनों और बजट का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है और प्रोजेक्ट की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
यात्रियों को बेहतर सफाई का इंतजार
रेलवे देश के सबसे बड़े सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में से एक है। ऐसे में यात्रियों को साफ कोच, स्वच्छ टॉयलेट और बेहतर ऑनबोर्ड हाउसकीपिंग मिलना बुनियादी सुविधा का हिस्सा है।
CAG की रिपोर्ट में सामने आई कमियां यह बताती हैं कि सिर्फ करोड़ों रुपये का बजट आवंटित करना काफी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि खर्च की निगरानी हो, ठेकेदारों की जवाबदेही तय हो और यात्रियों की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की जाए।
अगर इन कमियों को दूर किया जाता है तो रेलवे की सफाई व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ यात्रियों के यात्रा अनुभव को भी बेहतर बनाया जा सकता है।


