India-US Trade: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भरोसे को सबसे अहम आधार बताया है। उन्होंने कहा कि इसी भरोसे की वजह से अमेरिका बड़ी मात्रा में भारतीय जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। LPG और LNG व्यापार का जिक्र करते हुए उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी की बड़ी संभावनाओं की ओर इशारा किया।
भारत-अमेरिका रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत ‘भरोसा’
Amb Sergio Gor : The reason we get 40% of our generic pharmaceuticals from India, which is an incredible number, is because we trust India. There's a reason we're working on energy at unprecedented levels. Our LNG or LPG imports and exports were at 40% last year because we trust…
— Siddhant Mishra (@siddhantvm) August 18, 2026 नई दिल्ली में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत और अमेरिका के आर्थिक रिश्तों पर बात करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसा इस साझेदारी की महत्वपूर्ण ताकत है। उन्होंने भारतीय कंपनियों के अमेरिका में निवेश को दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा बताया।
गोर के मुताबिक, भारतीय कंपनियों को अमेरिका जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार तक पहुंच मिलती है, जबकि उनके निवेश से दोनों देशों में रोजगार और कारोबारी अवसर पैदा होते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधियों की लगातार बड़ी भारतीय और वैश्विक कंपनियों के प्रमुखों से मुलाकात होती रहती है। उनके अनुसार, यह भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में मौजूद व्यापक संभावनाओं को दर्शाता है।
जेनेरिक दवाओं में भारत पर अमेरिका को भरोसा
सर्जियो गोर ने भारत की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका अपनी करीब 40 फीसदी जेनेरिक दवाएं भारत से मंगाता है।
उन्होंने इसकी वजह सीधे तौर पर भरोसे को बताया। उनका कहना था कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाओं की खरीद तभी संभव है, जब सप्लाई और गुणवत्ता को लेकर मजबूत विश्वास हो।
भारत लंबे समय से दुनिया के प्रमुख जेनेरिक दवा उत्पादकों में शामिल है। अमेरिकी बाजार के लिए भारतीय फार्मा कंपनियों की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जेनेरिक दवाएं कम कीमत पर दवा उपलब्ध कराने में मदद करती हैं।
LPG-LNG कारोबार में भी बढ़ रही साझेदारी
अमेरिकी दूत ने भारत-अमेरिका ऊर्जा कारोबार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देश अभूतपूर्व स्तर पर काम कर रहे हैं।
गोर के मुताबिक, पिछले साल अमेरिका के LNG और LPG आयात-निर्यात में भारत से जुड़ा कारोबार करीब 40 फीसदी रहा। उन्होंने इसके पीछे भी दोनों देशों के बीच मौजूद भरोसे को अहम कारण बताया।
ऊर्जा कारोबार में बढ़ती यह साझेदारी भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। अमेरिका से LNG और LPG की खरीद से भारत को अपने ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने में मदद मिल सकती है।
व्यापार बढ़ाने के लिए रुकावटें दूर करना जरूरी
सर्जियो गोर ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका को आर्थिक साझेदारी की पूरी क्षमता हासिल करने के लिए कुछ मौजूदा बाधाओं को मिलकर दूर करना होगा।
उन्होंने टैक्स और रेगुलेटरी सिस्टम को ज्यादा अनुमानित, एक्सपोर्ट कंट्रोल और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर बेहतर संवाद तथा मजबूत इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी सुरक्षा की जरूरत पर जोर दिया।
उनका कहना था कि ऐसा माहौल होना चाहिए जिसमें कंपनियां बिना अनिश्चितता के निवेश कर सकें और नए उत्पाद व तकनीक विकसित कर सकें।
दोनों देशों के लिए बड़ी आर्थिक संभावना
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार केवल वस्तुओं की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। फार्मा, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, निवेश और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की गुंजाइश है।
सर्जियो गोर के बयान से साफ है कि अमेरिका भारत को केवल एक बड़े बाजार के तौर पर नहीं, बल्कि लंबे समय के विश्वसनीय आर्थिक साझेदार के रूप में भी देख रहा है। अगर दोनों देश टैक्स, रेगुलेशन, टेक्नोलॉजी और व्यापार से जुड़ी बाधाओं को कम करने में सफल होते हैं, तो आने वाले समय में भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों का दायरा और बड़ा हो सकता है।


