नई दिल्ली। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए रेलवे बोर्ड की ओर से कई दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन भारतीय रेलवे के अलग-अलग जोन इन नियमों का पूरी तरह पालन करने में नाकाम रहे हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की बदहाल स्थिति सामने आई है। रिपोर्ट में पेयजल की गुणवत्ता से लेकर वाशरूम की सफाई और अन्य जरूरी सुविधाओं में कमियां दर्ज की गई हैं।
पेयजल में मिला ई-कोली बैक्टीरिया
12 अगस्त को संसद में पेश की गई CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, छह रेलवे जोन के 59 स्टेशनों पर पीने के पानी का बैक्टीरिया विश्लेषण ही नहीं कराया गया। वहीं, कई स्टेशनों से लिए गए पानी के नमूनों में ई-कोली बैक्टीरिया पाया गया।
CAG ने सभी जोन के कुल 512 रेलवे स्टेशनों पर यात्री सेवाओं का अध्ययन किया। जांच के दौरान दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन, दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद स्टेशन, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावाला तथा पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन के वाटर कूलर से लिए गए पानी के नमूनों में ई-कोली के नमूने पाए गए।
पीने के पानी में इस तरह के बैक्टीरिया की मौजूदगी यात्रियों की सेहत और रेलवे की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
बड़े स्टेशनों पर भी यात्री सुविधाओं की कमी
CAG की जांच में देश के कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर बुनियादी यात्री सुविधाओं में कमी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, हावड़ा, सियालदह, नई दिल्ली और मुंबई सेंट्रल जैसे बड़े स्टेशनों पर भी कई जरूरी सुविधाएं अपेक्षित स्तर पर नहीं मिलीं।
इन स्टेशनों पर बैठने की व्यवस्था, यूरिनल और शौचालय, कूड़ेदान तथा इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन इंडिकेटर बोर्ड से जुड़ी कमियां दर्ज की गईं। इससे पता चलता है कि यात्री सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं केवल छोटे स्टेशनों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रमुख स्टेशनों पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है।
पेयजल और पंखों की सुविधा में भी खामी
बड़े स्टेशनों के निरीक्षण के दौरान यात्री सुविधाओं में कई अन्य कमियां भी सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार 12 स्टेशनों पर पेयजल व्यवस्था, जबकि आठ स्टेशनों पर पंखे और वाटर कूलर से संबंधित कमी पाई गई। इसके अलावा पांच स्टेशनों पर संकेतक व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं थी।
गर्मी और भीड़भाड़ के दौरान रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे में पेयजल, पंखे और वाटर कूलर जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी यात्रियों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है।
वाशरूम की सफाई व्यवस्था पर भी सवाल
CAG ने अपनी रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों के वाशरूम की स्थिति का भी उल्लेख किया है। कई स्थानों पर स्वच्छता व्यवस्था संतोषजनक नहीं पाई गई। शौचालय और यूरिनल जैसी आवश्यक सुविधाओं के रखरखाव में कमियां दर्ज की गईं।
रेलवे स्टेशनों पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं। ऐसे में स्वच्छ वाशरूम और साफ पेयजल यात्री सुविधा के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
नियम बनाए गए, लेकिन पालन में कमी
CAG ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग दिशा-निर्देश जारी किए थे। ऑडिट का उद्देश्य यह जांचना था कि इन नियमों और निर्देशों से यात्रियों को अपेक्षित लाभ मिल रहा है या नहीं।
जांच में सामने आई कमियों से स्पष्ट हुआ कि कई रेलवे जोन में निर्धारित मानकों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं हो रहा है। इसके चलते पेयजल, स्वच्छता, बैठने की व्यवस्था और सूचना प्रणाली जैसी यात्री सुविधाओं में खामियां बनी हुई हैं।
CAG रिपोर्ट से सामने आई प्रमुख बातें
- छह जोन के 59 स्टेशनों पर पानी का बैक्टीरिया विश्लेषण नहीं हुआ।
- कई रेलवे स्टेशनों के पानी के नमूनों में ई-कोली बैक्टीरिया मिला।
- 512 स्टेशनों की यात्री सेवाओं का अध्ययन किया गया।
- प्रमुख स्टेशनों पर शौचालय, यूरिनल और कूड़ेदान जैसी सुविधाओं में कमी मिली।
- 12 स्टेशनों पर पेयजल व्यवस्था में खामी पाई गई।
- आठ स्टेशनों पर पंखे और वाटर कूलर की सुविधा में कमी सामने आई।
- पांच स्टेशनों पर संकेतक व्यवस्था में कमी दर्ज की गई।
CAG की रिपोर्ट रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं के निर्धारित मानकों के पालन को लेकर गंभीर स्थिति की ओर इशारा करती है। खासकर पेयजल में बैक्टीरिया की मौजूदगी और स्वच्छता संबंधी कमियां यात्रियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण चिंता का विषय हैं। अब इन कमियों को दूर करने और रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देशों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है।


